अमितेश सिंह, वरिष्ट पत्रकार
गाजीपुर: भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने की तमाम कोशिशे केंद्र व प्रदेश की सरकार नाकाम साबित हो रही है। ताजा मामला गाजीपुर के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में देखने को मिला। जहां अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत से जिले के आठ विद्यालयों के प्रबंधकों ने छात्रों को दी जाने वाली 5 करोड़ ज्यादा की धनराशि डकार गए। इस मामले में सन 2004 में सतर्कता विभाग की टीम को खुली जांच के आदेश दिए गए थे। लेकिन बारह साल बाद जगी सतर्कता विभाग की टीम ने मामले का खुलासा किया। इस पूरे प्रकरण में देखा जाए तो कही न कही सतर्कता विभाग की भी भूमिका संदिग्धता के घेरे में है। फिलहाल सतर्कता विभाग की टीम ने छात्रवृत्ति वितरण का विवरण खंगालना शुरू किया तो जांच में जानकारी मिली की जिन विद्यालयों को छात्रवृत्ति मुहैया कराई गई थी जिसमें कुछ विद्यालय बंद हो गए और कुछ विद्यालयों के जमीन पर दूसरे नाम से विद्यालय संचालित किया जा रहा है। इन विद्यालयों और तत्कालीन अधिकारी, कर्मचारियों के खिलाफ वाराणसी के सतर्कता विभाग द्वारा जिले के शहर कोतवाली में मामला दर्ज कर जांच में जुटी हुई है।
गाजीपुर जिले में शिक्षा माफिया विभागों पर किस कदर हावी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि साल 1998 से 2001 के बीच जिले में अल्पसंख्यक विभाग द्वारा तकरीबन 19 करोड़ से ज्यादा की छात्रवृत्ति के लिए सरकार द्वारा धन आवंटित किया गया था। जिसमें आठ विद्यालय के संचालकों ने फर्जी दस्तावेज लगाकर 5 करोड़ से अधिक की धनराशि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी की मिली भगत से डकार गए। सालों बाद छात्रवृत्ति की जांच पड़ताल करने आई सतर्कता विभाग की टीम ने दस्तावेजों को खंगालना शुरू किया तो पता चला कि जिन विद्यालयों ने छात्रवृत्ति लिया है उनमें अधिकतर विद्यालय बंद हो चुके है तो कुछ विद्यालय दुसरे नाम से संचालित किए जा रहे है। इस पूरे प्रकरण में सतर्कता टीम ने अल्पसंख्यक विभाग के तत्कालीन अधिकारी सहित पांच कर्मचारियों और आठ विद्यालयों के खिलाफ कोतवाली में मामला दर्ज कराया। जिसमें तत्कालीन अल्पसंख्य कल्याण अधिकारी सिराजुद्दीन अंसारी और कर्मचारी सिराज अहमद, इर्शाद, ओम प्रकाश पाण्डेय, मोहम्द सलीम, अवधेश पाण्डेय और अमिरूलहसन समेत आठ विद्यालयों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया है। वहीं मामले में पुलिस अधीक्षक ने रामकिशोर ने कहा कि वाराणसी सतर्कता अधिष्ठान के निरीक्षक काशीनाथ सिंह द्वारा जिले के तत्कालीन अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और कर्मचारियों के खिलाफ कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है। उनकी जांच चल रही है। गिरफ्तारी का वारंट देगें तो जिले की पुलिस दोषियों को गिरफ्तार करेगी।

