गोली चाहे कोई भी हो नीली हो,सफेद हो किसे अच्छी लगती है। काजल को तो राजमा चावल चाहिए। उसे अच्छा लगता है। मौक़ा था देशव्यापी साप्ताहिक आयरन एंड फोलिक एसिड सप्लीमेंट (डब्ल्यूआईएसएफ) जागरूकता अभियान की शुरुआत का, जिसे बॉलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा के साथ मिलकर शुरू किया। दिल्ली के एमपी गर्ल सीनियर सेकेंड्री हाई स्कूल की नौवीं की छात्रा काजल की यह बात सुनकर खचाखच भरे हॉल में कोई भी ऐसा न होगा जिसने मासूम काजल की बात पर तालियां न बजाईं होगी। काजल नीलि गोली तो खाती है लेकिन उसे गोली नहीं राजमा—चावल, रोटी सब्जी, मटर—पनीर और आलू—पूड़ी खाना पसंद है। लेकिन आये तो कहां से, खाए तो कैसे। पिता सब्जी की रेड़ी लगाते हैं। मां चिल्ड्रेन पार्क में सफाई कर काजल और उसके दो भाईयों का भरण पोषण करती है। उसकी एक बहन भी है जो 11 वीं कक्षा में पढ़ती है। खून की कमी की वजह से उसे दो बोतल खून चढ़ाना पड़ा था। मासूम काजल के मन में यह बात बैठ गयी है कि खून की कमी से उसकी बहन बीमार हो गयी। इसलिए वह नीली गोली लेती है, और औरों को भी इसके लिए प्रेरित करती है। हालांकि स्कूल में दी जाने वाली मध्याह्न भोजन में उसे पूड़ी तो मिल जाती है, लेकिन वह चाहती है कि इसके साथ ही राजमा चावल भी दी जाए। केला उसे घर में मिल जाता है,यह सस्ता है, साथ ही पौष्टिक भी। लेकिन वह चाहती है कि स्कूल में पौस्टिक आहार दिया जाये ताकि गोली न लेना पड़े।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा काजल की बात से सहमती रखते हैं कि बच्चियां नीली गोली नहीं लेना चाहती। उन्हें पौष्टिक आहार चाहिए। वे भरोसा दिलाते हैं कि स्कूल में और पौष्टिक आहार की व्यवस्था करेंगे। काजल के चेहरे पर संतोष का भाव है कि उसे और आहार मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि देश भर के सरकारी स्कूलों में छठी से 12वीं तक के सभी बच्चों को हर हफ्ते आयरन और फोलिक एसिड (आइएफए) की नीली गोली खिलाने के विशेष अभियान को अब 11 करोड़ बच्चों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। आइएफए गोली के साथ ही साल में दो बार पेट के कीड़े मारने के लिए एलबेंडाजोल की गोली भी मुहैया करवाई जाएगी।
मैं भी हर हफ्ते लेती हूं नीली गोली: प्रियंका चोपड़ा
इस अभियान की ब्रांड एंबेस्डर फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने कहा है कि वे खुद भी पिछले छह महीने से यह सरकारी गोली खा रही हैं। इससे उन्हें अपनी अनियमित दिनचर्या के बावजूद बहुत फायदा मिला है। उन्होंने कहा कि इस टैबलेट को ले कर किशोरों को डरने की कोई जरूरत नहीं, उन्हें इतने महीने में कभी कोई समस्या नहीं हुई।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उनके मां-पिता दोनों ही डाक्टर हैं और वे देश के विकास में स्वास्थ्य की अहमियत को काफी अच्छे से समझती हैं। इसलिए यूनिसेफ के साथ एक दशक से जुड़ी हुई हैं। मां-बाप को चाहिए कि वे खास तौर पर किशोरियों को पोषक खुराक उपलब्ध करवाने पर ध्यान दें। इसके बावजूद अगर रक्त की कमी रह जाती है तो वह इस गोली से दूर हो सकेगी। भारत में 15 से 19 वर्ष की उम्र के 56 फीसदी लड़कियां और 30 फीसदी बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। इस अवसर पर एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें प्रियंका एनीमिया के प्रति जागरूकता फैलाती नजर आई। उन्होंने कहा, “मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि पिछले एक दशक से यूनिसेफ से जुड़ी हुई हूं और इसके जरिए अद्भुत अभियानों से जुड़ी हूं।”
यूनिसेफ इंडिया प्रमुख लुईस जार्ज आर्सेनाल्ट ने एनीमिया के आंकड़ो पर चर्चा करते हुए कहा कि ‘इस देश में 56 फीसदी किशोरियां और 22 फीसदी किशोर खून की कमी से ग्रस्त हैं जिसकी वजह से उन्हें अपने रोजाना के कार्य में परेशानी होती है। हालांकि आर्सेनाल्ट ने जागरूकता एवं रोकथाम को महत्वपूर्ण बताया जिसके तहत पोषक आहार देकर इस समस्या से निपटा जा सकता है। हालांकि साथ ही उन्होनें इस दिशा में विभिन्न मंत्रालयों द्वारा समेकित स्तर पर किये जा रहे प्रयासों पर संतोष जताया और कहा कि साप्ताहिक आयरन एंड फोलिक एसिड सप्लीमेंट (डब्ल्यूआईएसएफ)दिये जाने से काफी फायदा हुआ है।’
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रमुख सीके मिश्रा ने कहा कि देश में हर साल दस से 24 साल की उम्र के 26 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इनमें से अधिकांश मामले ऐसे होते हैं, जिनमें बचाव मुमकिन है। एनीमिया की वजह से ना सिर्फ उनकी उत्पादकता कम हो जाती है, बल्कि कई बार बहुत गंभीर संकट में पड़ जाते हैं। ऐसी लड़कियां मां बनने पर स्वस्थ बच्चे को जन्म नहीं दे पातीं।

