आलोक रंजन, युवा पत्रकार
गोण्डा: अरी ओ मुनिया की अम्मा,मुनिया को डॉक्टर के पास ले जाने की तैयारी कर। क्यों दीदी मुनिया को का हुआ है, वह तो स्वस्थ है, स्वस्थ दिखे है। अब खुले में शौच करेगी तो बीमार तो पड़ेगी ही। स्वच्छता मिशन से जुडी अभिनेत्री विद्या बालन का यह विज्ञापन मुनिया की अम्मा को भले ही यह बात समझाने में सफल हुआ हो कि खुले में शौच से मुनिया बीमार हो सकती है। लेकिन गोड्डा, उत्तर प्रदेश के सरकारी बाबू लोगों और उपर से नीचे तक सभी सरकारी कर्मचारियों को यह बात समझाने की ठानी जिलाधिकारी अजय कुमार उपाध्याय ने। जिलाधिकारी ने बाकायदा यह आदेश जारी किया है की गोण्डा जिले में अपने घर में शौचालय ना बनवाने वाले सरकारी कर्मचारियों को अगले महीने से तनख्वाह नहीं मिलेगी। विश्व बैंक के सहयोग से आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा की उन्होंने सभी सरकारी कर्मचारियों से घर में शौचालय होने का प्रमाण पत्र मांगा है, अगर इनके घर में शौचालय नहीं होगा तो इनको जनवरी माह का वेतन नही मिलेगा। जिलाधिकारी के इस आदेश का असर जिले के पचास हजार कर्मियों पर होगा। इन सभी को वेतन तभी मिलेगा जब यह लोग अपने घरों में शौचालय बने होने के साथ ही नियमित उपयोग का प्रमाण पत्र देंगे। जिलाधिकारी उपाध्याय ने गोंडा जिले को वर्ष 2018 तक खुले में शौचमुक्त करने का फैसला किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर शौचालय विहीन परिवार को इसका निर्माण कराने को 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। गांवों में लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें गांव स्तर से लेकर जिले स्तर तक के कर्मचारी शामिल है।
गौरतलब है कि जिलाधिकारी न सिर्फ सरकारी कर्मचारियों को बल्कि पूरे जिले में स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में शिद्दत से लगे हुए हैं। अजय कुमार उपाध्याय का कहना है कि स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम के संचालन में फिरोजाबाद और कन्नौज के बाद तीसरी पायदान पर है। वे इसे पहले स्थान पर लाना चाहते हैं। इसके लिए जिला प्रशासन ने 50 ग्राम पंचायतों को 31मार्च तक खुले में शौच मुक्त गांव बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रधानों को अहम जिम्मेवारी दी गयी है। उन्होंने कहा कि घरों में शौचालय बनवाने के लिए लोगों में बढ़ती जागरूकता के कारण तरबगंज तहसील के खानपुर जैसे अति पिछड़े गांव को खुले में शौच से मुक्त बनाया जा सका है।जिले का खानपुर एक ऐसा गांव है जो पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त गांव बनकर सूबे में जिले को पहचान दिलाने में सफलता पायी है। सबसे बड़ी बात है कि खानपुर ने यह सफलता मात्र ढ़ाई माह में प्राप्त किया है। इसमें ग्राम प्रधान शेषदत्त तिवारी की भूमिका अहम है।
