बाढ़.. बारिश और पंचायत चुनाव..अब खुला-खुला बिहार, कोरोना से बचाव के लिए थोड़ी सावधानी की है दरकार

मंगरूआ

पटना: बिहार के कई जिले बाढ़…बारिश कहर ढ़ा रहा है। आम जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित है। इन जिलों में मुजफ्फरपुर, दरभंगा, खगडिय़ा, सहरसा, पटना, वैशाली, भोजपुर, लखीसराय, भागलपुर, सारण, बक्सर, बेगूसराय, कटिहार, मुंगेर एवं समस्तीपुर शामिल हैं। यानी कुल 82 प्रखंडों के 484 पंचायत आंशिक अथवा पूर्ण रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं। इस बीच बिहार में पंचायत चुनाव की घोषणा हो गयी है। बिहार में 11 चरणों में 24 सितंबर से 12 दिसंबर तक पंचायत आम चुनाव होंगे। राज्य के 533 प्रखंडों में 8072 पंचायतों के 2,55,022 पदों के लिए चुनाव होगा। यानी 533 में से 82 प्रखंड बाढ़ प्रभावित हैं और प्रशासन के सामने चुनाव कार्य को सफलता पूर्वक संचालन करने की चुनौती है। इस बीच बिहार सरकार ने कोरोना के मामले में कमी आते ही पाबंदियों में ढ़ील देने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना वायरस (Bihar Coronavirus Update) को लेकर लगाए प्रतिबंधों को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कोविड की स्थिति की समीक्षा की गई है कोरोना संक्रमण की स्थिति में सुधार को देखते हुए सभी दुकानें, प्रतिष्ठान, शापिंग माल, पार्क, उद्यान एवं धार्मिक स्थल सामान्य रूप से खुल सकेगें। ये बातें मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट के जरिए कही है। उनका कहना है कि प्रशासन की अनुमति से सभी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक, मनोरंजन, खेल-कूद, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन अपेक्षित सावधानियों के साथ आयोजित किए जा सकेगें। वहीं सभी विश्वविद्यालय, कॉलेज, तकनीकि शिक्षण संस्थान और विद्यालय (पहली से बारहवीं कक्षा तक) के साथ साथ कोंचिग संस्थान भी सामान्य रूप से खुलेगें. राज्य के विश्वविद्यालयों, कॉलेजों, विद्यालयों द्वारा परीक्षा आयोजित की जा सकेंगी।                                                                                      बाढ़…बारिश


लेकिन प्रशासन की चुनौती यहीं खत्म नहीं होती। सरकार के समक्ष इन बाढ़ व बारिश प्रभावित इलाकों सहित बिहार के सभी ईलाकों में कोरोना के रोकथाम के लिए टीकाकरण अभियान सुचारू रूप से चलाने व तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर कोरोना के प्रसार के रोकथाम की भी चुनौती है। वैसे तो बिहार में टीकाकरण अभियान कमोबेश ठीक ठाक ही चला है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं है कि बाढ़ प्रभावित ईलाकों में लगातार हो रहे बारिश और बाढ़ के फैलाव ने टीकाकरण अभियान पर असर डाला है। इसके साथ ही इनमें से कई ईलाकों में टीके की कमी और सही समय पर बूथ पर पहुंचाना भी अपने आपमें चुनौती है और इसका असर टीकाकरण अभियान पर हुआ है।
जैसे ही अभियान रफ्तार पकड़ता है, वैक्सीन कम हो जाने से न चाहते हुए भी प्रशासन को इसकी रफ्तार धीमी करनी पड़ती है।                                                                                                                    बाढ़…बारिश

यह बात सही है कि लोग कोरोना के रोकथाम के लिहाज से टीके की महत्ता को समझ रहे हैं यानी टीकाकरण को लेकर लोगों में जागरूकता है। लेकिन बाढ़ व बारिश के कारण अन्य तरह की चुनौतियां भी है जिसकी वजह से टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। कई केंद्रों पर वैक्सीन की किल्लत की वजह से लोगों को केंद्रों से वापस लौटना पड़ रहा है। पूर्व में कई जगहों पर तो वैक्सीन लेने के लिए हो हल्ला और हंगामा की भी सूचना आ चुकी है। कोरोना से बचने के लिए शहर से लेकर ग्रामीण इलाके के लोग वैक्सीन लेने के लिए व्यग्र दिख रहे हैं।
सोशल डिस्टेंसिंग के प्रति लापरवाही

कोरोना से बचाव के लिए लोग मास्क का प्रयोग करते तो नजर आते हैं ​लेकिन मास्क को सही तरीके से पहनने और बाजार में भीड़ भाड़ से बचने के मामले में लापरवाही साफ देखी जा सकती है। यानी कोरोना से बचाव के लिए जो दिशा​ निर्देश जारी किये गये हैं उसको लेकर लापरवाही है। संक्रमण दर में कमी की वजह भी आम जन के लापरवाही का कारण बन रही है।

दुकानों में भीड़ लग रही है। शारीरिक दूरी के नियम के बजाए में धज्जियां उड़ रही है। जबकि, एक्सपर्टो का कहना है कि कोरोना वैक्सीन लेने के बाद भी इससे बचाव के लिए मास्क पहनना, शारीरिक दूरी के नियम का पालन करना, बार-बार हाथों की सफाई और सतर्कता काफी जरूरी है। बावजूद लोग लापरवाह बने हुए हैं। जानकारों का कहना है कि भले ही दूसरी लहर का दर काफी कम हो गया है। लेकिन अभी तीसरी लहर का खतरा बना हुआ है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता काफी जरूरी है।
बाढ़…बारिश में पंचायत चुनाव की घोषणा से गांव—गांव में चुनावी प्रचार प्रसार के कारण ग्रामीण ईलाकों में कोरोना का खतरा निश्चित रूप से बढ़ेगा। लोग सशंकित हैं लेकिन कैसे इससे बचा जाए इसको लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है। और पहले से तीसरी लहर की आशंका से जूझ रहे देश—प्रदेश में कोरोना के फैलने का खतरा मुंह बाये खड़ा है। होना यह चाहिए कि हर हाल में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो और टीकाकरण अभियान में तेजी लाई जाये।

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