नीरज प्रताप सिंह
भागलपुर: आज लगभग पूरा भागलपुर जिला भयंकर बढ़ के चपेट में है। जिले का अधिकांश हिस्सा जिला मुख्यालय से कटा हुआ है । कहीं आने जाने का एक ही साधन बचा है वो है नाव जिसके सहारे आप कहीं आ जा सकते हैं। लेकिन अधिकांश जगहों पे नाव सेवा भी उपलब्ध नहीं है ,लोग काम चलाऊ नाव बना के अपना काम चला रहे हैं ,जो कि कभी भी जानलेवा भी साबित हो सकता है। चूँकि इस इलाके में केले की खेती काफी मात्रा में होती है ,लोग उसके पेड़ को काट के कामचलाऊ नाव बना के अपना काम चला रहे हैं। केले का फसल तो इस बार पूरी तरह से बर्बाद हो गया है ,काफी फसल डूब गयीं जो बचीं थी उसे आंधी तूफान ने बर्बाद कर दिया।
आज स्थिति ये है कि भागलपुर से पीरपैंती कहलगांव को जोड़ने वाला NH80 कई जगहों पे कट गया है ,पानी सड़क के ऊपर से बह रही है, आप इधर सड़क मार्ग से नहीं जा सकते । भागलपुर से दूसरी ओर सुलतानगंज का रास्ता जाता है ,इसका भी वही हाल है ।तीसरा रास्ता भागलपुर को नौगछिया से जोड़ता है वो भी कल जगतपुर के पास इसका काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त हो ने के कारण इसपे भी आवागमन बंद कर दिया गया है।यानि आप कह सकते हैं कि भागलपुर शहर आज टापू में परिवर्तित हो गया है ।
ऐसा नहीं है कि इन सडकों को बचाया नहीं जा सकता था ,अगर सरकारी अमला और हमारे माननीय सही समय पे जाग जाते तो हो सकता है इन सडकों को बचाया जा सकता था ।उदाहरण के लिये बिहपुर इलाके के नन्हकार जमींदारी बांध पे खतरे को देखते हुए पूर्व विधायक इंजीनियर शैलेन्द्र जी अपने लाव लश्कर के साथ वहीं दिन रात जम गये और बांध को बचा इस तरह एक बड़ा हिस्सा डूबने से बच गया, लेकिन दूसरे जगह पे सरकार बहादुर की नींद तब टूटी जब मामला हाथ से निकल गया ,खाना पूर्ति हुई ,लेकिन एक एक कर जिले का अधिकांश हिस्सा आज जलमग्न है ।
लोग अपना जान माल बचा के जहाँ जगह मिला शरण लिये हुए हैं ,कोई रेलवे लाइन पे तो कोई अन्य ऊँची जगहों पे ,कुछ तो अपने घरों के छत पे शरण लिये हुए हैं। इंसान और जानवरों दोनों का बुरा है, लेकिन बधाई के पात्र हैं जिले के कुछ दानवीर और स्वयं सेवी संस्थाएं ,जिन्होंने युद्ध स्टार पे इनके इनके खाने पीने रहने की व्यवस्था की है । लेकिन इनका ये कार्य सरकार को पसंद नहीं आया ,और प्रशासन की ओर से उन्हें बंद करने का आदेश जारी हुआ ,सबौर में बने खाने फेंक दिये गये, खाना बना रहे लोगों पे लाठी चार्ज हुआ ,लेकिन फिर भी ये लोग डटे रहे और उनका ये सेवा का कार्य जारी है। नौगछिया और पीरपैंती में कुछ संस्थाएं इनकी सेवा के खातिर भिक्षाटन कर रहीं है । सोच के रूह कांप जाती है कि अगर ये लोग नहीं होते तो क्या हाल होता इन पीड़ितों का ,दो तीन दिन पहले लक्ष्मीपुर का जमींदारी बांध उचित रख रखाव के आभाव में टूट गया ,परिणाम नौगछिया अनुमंडल मुख्यालय सहित पूरा रंगरा गोपालपुर और इस्माईल पुर ब्लाक आज जलमग्न है । करोड़ों की केले और अन्य फसलें डूब गयीं । इसने इस इलाके के किसानों की कमर ही तोड़ दी । नौगछिया जेल में पानी भरने के कारण कैदी को दूसरी जगह शिफ्ट किया जा रहा है ।इस बांध को कभी पूर्व विधायक स्व मनीराम सिंह गुरूजी ने जन सहयोग से बनाया था ।अगर सरकार या स्थानीय माननीय चाहतेतो ये बांध को टूटने से बचाया जा सकता था।
लेकिन अब राहत की बात ये है कि धीरे धीरे ही सही अब पानी उतरने लगा है ,लेकिन जो तबाही हुई है उसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा ,एक लंबा वक्त लगेगा ,और ईमानदारी से कार्य करने होंगे ,लेकिन कुछ स्थानीय लोग शायद सही ही कह रहे थे कि अधिकारी और कुछ लोग तो चाहते हैं कि बाढ़ आये और फिर कमाई का जरिया खुले।आज जब पूरा क्षेत्र डूबा हुआ है तो स्थानीय सांसद और विधायक लापता हैं ,और जिला प्रशासन के लोग और कुछ माननीय चंदन दास नाइट में कल गजल का आनंद ले रहे थे ,
आज नौगछिया में दो ही नेता दिखते हैं, जनता के बीच एक पूर्व सांसद अनिल यादव जी तो दूसरे शैलेन्द्र जी ,बाकी कहाँ गये पता नहींअब तो नौगछिया पॉवर हॉउस में भी पानी घुस गया है,हो सकता है इस इलाके में अब बिजली संकट भी झेलना पड़े।



