
Cauliflower: भारतीय कृषि में हमेशा नए प्रयोग होते रहे हैं। और समय-समय पर नए कृषि उत्पाद किसानों की मेहनत और लगन से उभरते हैं। ऐसे ही कृषि में नई तकनीकी के माध्यम से खेती का तरीका और फसलों का प्रकार बदलता जा रहा है। आप ने फूलगोभी के खेती तो देखी होगी। पर क्या रंगीन फूलगोभी की खेती देखी देखी है। जो आजकल बिहार के खेतों में प्रायोगिक तौर में रही है। पारंपरिक सफेद और पीली गोभी के अलावा, अब बैगनी और गुलाबी रंग की गोभी भी उगाई जा रही है। जिससे न केवल कृषि में विविधता आ रही है। बल्कि यह एक स्वस्थ के लिए भी लाभदायक है। वहीं, किसानो को इस किस्म की फूलगोभी का दाम भी अधिक मिलता है।
केंद्र अनुसंधान में पारंपरिक सफेद फूलगोभी की तुलना में अधिक पोषण देने वाली पीले और बैंगनी फूलगोभी की नई किस्मों पेश की हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. ललित भट्ट के अनुसार, ये रंगीन फूलगोभी न केवल देखने में आकर्षक हैं। बल्कि पोषक तत्वों से भरपूर हैं। पीली फूलगोभी कैरोटीनॉयड से भरपूर होती है। जो विटामिन ए का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। जबकि बैंगनी किस्म में एंथोसायनिन प्रचुर मात्रा में होता है। जो एक एंटीऑक्सीडेंट है। ये गुण सफेद फूलगोभी की तुलना में अधिक पौष्टिक बनाते हैं।
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भारत में स्वस्थ की बढ़ती जागरूकता ने अधिक पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों की मांग में बढ़ोतरी का काम किया है। रंगीन फूलगोभी अपने स्वास्थ्य लाभों के लिए लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। इसे किसानों को अच्छा मुनाफा भी हो रहा है। बिहार जैसे राज्य में इस प्रकार की खेती ने एक नया मोड़ लिया है। बल्कि किसान पहले से ही परंपरागत तरीके से गोभी की खेती करते आ रहे हैं। लेकिन रंगीन फूलगोभी का उगाना एक नई चुनौती और अवसर बन कर सामने आया है।
रंगीन फूलगोभी की खेती
रगीन फूलगोभी की खेती के लिए ठंडी और नम जलवायु बेहतर मानी जाती है। इसकी बुवाई के लिए मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.6 के बीच होना चाहिए। साथ ही खेत में अच्छी जल निकासी व्यवस्था होनी चाहिए। फूलगोभी की बुवाई के लिए उचित किस्म के बीज लेना चाहिए। हालाँकि, सही किस्म का चयन करना और सही समय पर रोपण करना जरूरी है। विशेषज्ञों किसानों को रंग बिरंगी फूलगोभी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 300 से 400 ग्राम बीज इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। और रोपाई के लिए कतार से कतार और पौधे से पौधे की दूरी 45-45 सेंटीमीटर रखें।

