पंचायत खबर टोली
मुंबई: किसानों के कर्ज माफी के सवाल पर देश के अलग—अलग हिस्सों में किसानों के आंदोलन की खबरें आती रहती है। पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र के किसान आंदोलन कर रहे थे। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस के साथ बैठक के बाद किसानों के आंदोलन समाप्त हो गया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसानों के कर्ज माफी पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इसके लिए जल्द ही एक कमिटी बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री निवास पर देर रात घंटो चली बैठक में सरकार और किसान नेताओं के बीच सहमती बनी। सरकार ने किसानों को 31 अक्टूबर तक कर्ज माफी के मुद्दे पर फैसला लेने का भरोसा राज्य में जल्द ही कृषि मूल्य आयोग बनाया जाएगा। साथ ही, किसानों के बिजली के बिलों को भी माफ किया जाएगा। सरकार की ओर से कहा गया है कि राज्य में कुल 31 लाख किसान हैं और इतनी जल्दी सबके कर्ज को माफ करना आसान नहीं है। उन्हें फिर से कर्ज देने के लिए जल्द ही एक कमेटी बनाई जाएगी जिसमें किसानों के प्रतिनिधी भी शामिल होंगे। इस कमिटी की सिफारिशों के आधार पर कर्ज माफी पर फैसला होगा।
- राज्य में जिन परिवारों में किसानों ने आत्महत्या की है उनको सरकार आर्थिक मदद देगी।
- जून के अंत तक राज्य में कृषि मूल्य आयोग बनाया जाएगा।
- खेती में इस्तेमाल बिजली का बिल भी माफ किया जाएगा। साथ ही फल मंडियों में भंडारण केंद्र और शीतलन केंद्र बनाया जाएगा।
- व्यापारियों द्वारा किसानों को उचित मूल्य न देने पर कार्रवाई संबंधी बिल मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
- दूध का दाम तय करने के लिए राज्य में विनियामक नियुक्त किया जाएगा। साथ ही किसानेो को दूध बाजार में अधिकतम हिस्सेदारी की कोशिश होगी।
- आंदोलनरत किसानों पर दर्ज केस वापस होंगे। लेकिन असमाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
अन्ना हजारे ने किया था आंदोलन को सर्मथन
इस बीच दो दिनों से चल रहे किसान आंदोलन में जगह—जगह हिंसक घटनाएं हुईं। आंदोलन के दौरान 4.5 लाख लीटर दूध, फल और सब्जियों का नुकसान हुआ। इनके दाम आसमान पर पहुंच गए थे और लोगों को दिक्कतों का सामना करना पर रहा था। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने किसानों का सर्मथन लेकिन अन्ना ने अपील किया था कि “किसान हड़ताल के दौरान शांति बनाए रखें, जनता और निजी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं।” अन्ना ने एक लिखित बयान जारी कर कहा था कि किसानों की सहनशक्ति खत्म होने के बाद किसानों को मजबूर होकर सड़क पर उतरना पड़ा है। सरकार किसानों की मांगों ओर समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है, इसलिए किसानों को कानून अपने हाथ में लेना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को किसानों की समस्याओं और उनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए। अन्ना ने कहा था कि किसानों के मुद्दे पर उनकी दो बार मुख्यमंत्री से फोन पर चर्चा हो चुकी है। मुख्यमंत्री चर्चा के लिए तैयार हैं। अगर किसानों का प्रतिनिधि मंडल चर्चा के लिए तैयार हो, तो वे एक बार फिर मुख्यमंत्री से बात करने को तैयार हैं।


