
Uttar Pradesh: किसान भाइयों की खेती भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह देश की बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त भोजन का उत्पादन करने में मदद करता है। बल्कि किसानों की खेती ग्रामीण विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है। वहीं हरदोई जिले में किसानों को खेती के लिए प्रोत्साहित और उन्नतशील किसान बनाने को लेकर उद्यान विभाग और कृषि विभाग दोनो मिलकर कदम उठा रहा है। ऐसे में किसानों की चौपाल लगाकर उन्हें कई सब्जियों के विषय में जानकारी दी जाती है। जिसे उन्हें मुनाफा हो सकें। देश के ज्यादातर इलाकों में कद्दू एक पसंदीदा सब्जी है। और गर्मियों के दिनों में इसकी आगे की खेती ज्यादा मुनाफा दे सकती है। हालांकि यह खेती कम लागत में और अधिक मुनाफा देकर किसान को धनी बना देगी।
हरदोई जिला के उद्यान अधिकारी सुभाष चंद्र ने बताया कि किसान भाई गर्मियों की सब्जी की खेती को लेकर काफी उत्साहित हैं। इसकी वजह किसानों को उन्हें सब्जियों का अच्छा बाजार भाव समय से मिल रहा है। इन दिनों किसानों को चौपाल के माध्यम से सब्जियों की दुर्गति फसल के बारे में जानकारी दी जाती है। वहीं इन सब्जियों में सबसे कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली कद्दू की खेती सिद्ध हो रही है। इसमें सर्दियों के जाते ही खेतों में बीजों की रोपाई कर दी जाती है। एक एकड़ खेत में पांच हजार का खर्चा आता है। और एक एकड़ में करीब 100 कुंतल कद्दू पैदावार होती है। दअरसल सावधानी और देख-रेख से कद्दू का द्विबीजपत्री पौधा खेतों की हरियाली और फलों से भर देता है।
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कद्दू की खेती से लाखों की कमाई
जिले में उद्यान विभाग और कृषि विभाग से जुड़े उन्नतशील किसान चंद्र भूषण ने कहा कि कद्दू की खेती के लिए अनुकूल मौसम, भूमि उपजाऊ, जल सिंचाई की व्यवस्था वाले खेतों का चुनाव करना आवश्यक होता है। इसके लिए दोमट मिट्टी में गहरी जुताई करने के बाद खरपतवार और कीट नियंत्रित कर लिए जाते हैं। खेत की मिट्टी बनाने के लिए गाय के गोबर और गोमूत्र फसल के लिए सबसे गुणकारी और लाभदायक होता है।
हालांकि काशी हरित और पूसा विश्वास समेत कई किस्में अच्छा फल देने वाली प्रजाति हैं। 2 से 3 सेंटीमीटर गहराई में बोए गए बीज में 5 से 10 दिन के बीच में अंकुरण होने लगता है। दिसंबर जनवरी फरवरी में बोए गए बीज अनुकूल मौसम के कारण अच्छे से उगते हैं। कद्दू का पौधें उचित फासले पर लगाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी दूरी 2 फीट उचित मानी गई है। पानी देने की सबसे अच्छी व्यवस्था ड्रिप इरीगेशन विधि है। जिससे पानी और खाद भी समय पर सही अनुपात में पौध तक पहुंचाई जा सकती है। कद्दू का फल कभी ना खराब होने वाली सब्जियों में गिना जाता है। हरे कद्दू के अलावा पका हुआ कद्दू भी अच्छी कीमत देता है। इसकी सब्जी सुपाच्य और गुणकारी होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस सब्जी को सीताफल भी कहते है।

