पूजा
रायपुर: पारंपरिक फसलों से हटकर किसान अब ऐसी फसलों की खेती कर रहें हैं। जिनमें उन्हें तगड़ा मुनाफा हो। ऐसे में छत्तीसगढ़ के किसान लाख की खेती को काफी बढ़ावा दे रहे है। जिसकी खेती से किसान लाखों कमा सकता है। दरअसल, लाख का उत्पादन कीटों द्वारा होता है, और इसे कुदरती राल भी कहा जाता है। इसमें मादा कीट अपने शरीर से एक लिक्विड निकालती है। और यही लिक्विड हवा के संपर्क में आकर सख्त हो जाता है। लाख की खेती कम लागत में अधिक उत्पादन और लाभ देती है। इसके अलावा यह प्राकृतिक खेती पद्धति किसानों को पर्यावरण के साथ सामंजस्य बनाए रखते हुए आर्थिक समृद्धि की ओर ले जाती है।
जाने कहा होती है लाख की खेती
भारत में लाख की खेती मुख्य रूप से झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में की जाती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में लाख की खेती को काफी बढ़ावा दिया जा रहा है। यहां के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में लाख की खेती जीवनयापन का अहम हिस्सा है। वहीं अब इसकी खेती के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को सही ट्रेनिंग और सस्ती दरों पर लोन उपलब्ध करवाने का भी फैसला किया है। आपको बता दें यहां लाख की क्रय दर 550 रुपये प्रति किलो है, जबकि पलाश के पेड़ से निकाली गई लाख की क्रय दर 275 रुपये प्रति किलोग्राम है। इसके अलावा बेर के पेड़ से प्राप्त लाख के लिए किसानों को देय विक्रय दर 640 रुपये प्रति किलोग्राम रखी गई है।
लाख की खेती कब होती है
लाख की खेती दो बार होती है। इसमे एक कतकी अगहनी और दूसरी बैसाखी जेठवी कहलाती है। कार्तिक, बैशाख, अगहन और जेठ मास में कच्ची लाख को इकट्ठा किया जाता है। ये काम जून और जुलाई के महीने में होता है। जबकि अक्टूबर और नवंबर में लाख के बीजो को बैसाखी जेठानी फसल के लिए तैयार किया जाता है। वहीं इसके पौधों की रोपई की बात करें तो लाख के पौधों की रोपाई के लिए 5.5 पीएच मान वाली मिट्टी की जरूरत होती है। वहीं पौधों की रोपाई करते वक्त एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर के बीच होती है।
लाख की खेती भारत में सदियों पुरानी है और ब्रिटिश शासनकाल में भी इसे प्रोत्साहन मिला था। ब्रिटिश सरकार ने लाख की खेती के महत्व को समझते हुए 1913-1917 के दौरान भारतीय लाख अनुसंधान संस्थान की स्थापना की थी। उस समय से ही लाख की खेती ने भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाई है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लाख उत्पादक देश है। और यहां का 80 प्रतिशत लाख उत्पादन वैश्विक बाजारों में निर्यात किया जाता है।
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लागत और उच्च आय
लाख एक प्राकृतिक राल है, जिसे कैरिया नामक कीट की मादा उत्पन्न करती है। इस राल का उपयोग कई उद्योगों जैसे दवा, कॉस्मेटिक, और चमड़ा उद्योग में किया जाता है। लाख की खेती का प्रमुख लाभ यह है कि इसमें लागत बेहद कम होती है और किसानों को सात से आठ गुना अधिक आय प्राप्त होती है। इसे जीरो बजट फार्मिंग की श्रेणी में रखा जा सकता है क्योंकि इसमें न तो महंगे रासायनिक उर्वरकों की जरूरत होती है और न ही पानी की अधिक आवश्यकता होती है।


