विशेषज्ञों ने किया आगाह..तंबाकू उत्पादों के विज्ञापनों से प्रभावित हो रहे हैं युवा, हो रहे हैं तंबाकू के लत के शिकार

संतोष कुमार सिंह

  •  विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर विशेषज्ञों और मशहूर हस्तियोंने तंबाकू से होने वाले नुकसान पर दिया जोर
  •  अंतरराष्ट्रीय पहलवान संग्राम सिंह ने कहा कि युवाओं और बच्चों को रोजाना तंबाकू के विज्ञापनों और प्रचारों से अवगत कराया जा रहा है। तंबाकू कंपनियां अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए इनके संवेदनशील दिमागोंको निशाना बनाती हैं
  •  तंबाकू नियंत्रण कानून COTPA 2003 में संशोधन के माध्यम से प्वाइंट ऑफ सेल्स विज्ञापनों को कम करने के लिए सरकार कमर कस रही है
    नई दिल्ली: विज्ञापनों और मनोरंजन के माध्यम से तंबाकू कंपनियां युवाओं और बच्चों को अपने उत्पादों के इस्तेमाल के लिए लुभा रही हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों और मशहूर हस्तियों ने सरकार से स्वास्थ्य के खतरे वाले कैंसर जनित इन उत्पादों के विज्ञापन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

इस मौके पर विश्व प्रसिद्ध पहलवान और अभिनेता संग्राम सिंह ने कहा है कि तंबाकू उत्पादों का व्यापक स्तर पर हो रहा सीधा और परोक्ष विज्ञापन एक खतरे का सबूत है। इससे बच्चे धूम्रपान के लिए प्रेरित होते हैं और जीवन भर के लिए उनमें इसकी लत लगने की संभावना विकसित होती है। तंबाकू सेवनउनकी मौत का कारण बन सकती है।विश्व तंबाकू निषेध दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार 30 मई को यहां टोबैको फ्री इंडिया की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि तंबाकू के विज्ञापनों पर प्रतिबंध के बावजूद,तंबाकू कंपनियां विभिन्न मार्केटिंग रणनीति के जरियेअपने उत्पादों के प्रचार पर भारी मात्रा में खर्च कर रही हैं। उन्होंने कहा, “तंबाकू कंपनियां युवाओं को अपने संभावित ग्राहक के रूप में देखती हैं।उन्हें अच्छी तरह से पता है कि तंबाकू के लती युवाउनके आजीवन ग्राहक होंगे। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि इस तरह के विज्ञापनों को तुरंत प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।”

तंबाकू इस्तेमाल से होने वाली मौतों के आंकड़े बड़े भयावह हैं। दुनियाभर में सालाना 60 लाख लोगों की मौत तंबाकू के इस्तेमाल की वजह से हो जाती है। भारत के मामले में यह आंकड़ा करीब 13 लाख सालाना है। भारत के 37.9 फीसदी बच्चे 10 वर्ष की उम्र में तंबाकू का इस्तेमाल करने लगते हैं।

विभिन्न अध्ययनों में यह बात सामने आ चुकी है कि कोटपा 2003 के लागू होने के बावजूद शिक्षण संस्थानों के आसपास तंबाकू उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं। इस कानून में तंबाकू से संबंधित विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन तंबाकू कंपनियां कानून की खामियों और इसके तहत मिली छूट का दुरुपयोग करती हैं।

तंबाकू कंपनियां पॉइंट ऑफ सेल यानी तंबाकू उत्पाद बेचने वाले दुकानों पर विज्ञापनों और उत्पाद प्रदर्शन के प्रावधानों का दुरुपयोग करके कानून की खामियों का फायदा उठाती हैं दुकानों पर विज्ञापन लगाते हैं।भारत में हर दिन लगभग 5,500 युवा तंबाकू के जाल का शिकार होते हैं।

प्रख्यात लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चंद्रकांत लहरिया इस बात की ओर ध्यान दिलाते हैंकि तंबाकू इस्तेमाल नहीं करने वाले लोग और बच्चे इन दुकानों पर जाते हैं और उन्हें इसकी लत लगने का खतरा होता है। प्वाइंट ऑफ सेल पर तंबाकू उत्पादों के प्रदर्शन की छूट तंबाकू महामारी को आमंत्रित करने जैसा है।

उन्होंने कोविड-19 के मद्देनजर लोगों के स्वास्थ्य पर तंबाकू के खतरे के बारे में सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने विभिन्न अध्ययनों का हवाला देते हुए बताया कि कैसे तंबाकू का इस्तेमाल करने वाले लोग महामारी के दौरान घातक संक्रमण की चपेट में आ गए।

उन्होंने इस बात की मांग की कि हवाई अड्डों, होटलों और रेस्त्राओं में बने स्मोकिंग जोन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया जाए। इसकी वजह से धूम्रपान नहीं करने वालों की सेहत पर भी खतरा होता है।
एम्स नई दिल्ली के रुमेटोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. उमा कुमार ने कहा, “सिगरेट और गुटखा जैसे उत्पाद बनाने वाली तंबाकू कंपनियां किशोरों और बच्चों को विशेष रूप से निशाना बना रही हैं। वे अपने विज्ञापनों को स्कूल और कॉलेजों के पास प्रमुखता से प्रदर्शित करती हैं ताकि इन संवेदनशील दिमागों को प्रभावित किया जा सके। इन्हें पूरी तरह से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।”उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को नशे की लत वाले इन उत्पादों से बचाना बहुत जरूरी है।

डॉ. कुमार ने पेसिव स्मोकिंग के खतरों से भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि इसका सबसे ज्यादा खतरा महिलाओं और बच्चों को होता है। उन्होंने कहा, “डीएसए (डेजिगनेटेड स्मोकिंग एरिया यानी धूम्रपान वाले इलाके) को खत्म करनास्वास्थ्य की दिशा में एक गेम चेंजर सबित हो सकता है। साथ ही भारत के सार्वजनिक स्थलों को 100 प्रतिशत धूम्रपान मुक्त बना सकता।

तंबाकू उत्पाद कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के कारण बनते हैं। इससे देश में लगभग 13 लाख लोगों की जान जाती है। स्वस्थ भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि तंबाकू नियंत्रण कानून और नीतियों को मजबूत बनाया जाए और प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।”

ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीईओ अखिलेश मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तंबाकू के सेवन से उत्पन्न खतरे के प्रति गंभीरता दिखाई है। उन्होंने कहा, “उनकी पहल के कारण सरकार ने ई-सिगरेट पर समय पर प्रतिबंध लगाकर अपने युवाओं को बचाया है।यह भी समान रूप से नशे की लत है।”उन्होंने बताया कि अब सरकार ने तंबाकू के खतरे को रोकने के लिए कोटपा को मजबूत करने की पहल करते हुए इसमें पर्याप्त संशोधन करने का एक और सराहनीय कदम उठाया है।

इस कार्यक्रम में संचार विशेषज्ञ नीलकंठ बख्शी ने केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न तंबाकू निरोधी उपायों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों, खासकर युवाओं के स्वास्थ्य के बारे में बहुत कुछ कर रहे हैं।उन्होंने कहा, “उन्होंने ही योग को दुनिया भर में एक जन आंदोलन बनाया। मुझे यकीन है कि वे लोगों पर तंबाकू के बुरे प्रभाव के बारे में भी जानते हैं। सरकार निश्चित रूप से जल्द या बाद में इन कैंसर जनित उत्पादों से होने वाले खतरे को रोकने के लिए कानून लाएगी।”

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