सड़क पर कुचला जा रहा टमाटर..संसद में किसान खुशहाली के गीत गाते जेटली

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: देश के संसद में वित्तमंत्री अरूण जेटली जब मंगलवार को ​किसानों के खुशहाली का अनुमान लगा रहे थे..उनकी समृद्धि के कसीदे पढ़ रहे थे..आर्थिक सर्वेक्षण पेश कर रहे थे..उसके ठीक एक दिन पहले यानी सोमवार को आदीवासी बहुल राज्य झारखंड के बुंडू  एनएच-33 पर अजीब नजारा देखने को मिला। करीब सैकड़ों क्विंटल टमाटर सड़क पर गिरे मिले। गाडिंयां गुजरती रहीं टमाटर कुचले जाते रहे मानो किसानों की आमदनी दुगुनी किये जाने के वादों के कृषि प्रधान भारत के बासिंदो के अरमान कुचले जा रहे हों। उन्हें नहीं पता था कि एक दिन बाद उनके खुशहाली के आंकड़े पेश किए जाएंगे।

क्या है मामला…
दरअसल, टमाटर की सही कीमत और खरीदार नहीं मिल पाने की स्थिति में नाराज किसानों ने सैकड़ों क्विंटल टमाटर एनएच-33 पर फेंक दिया। इलाके के किसानों का कहना है कि खून पसीने से सीच कर उगाये उनके टमाटर का न तो खरीदार है और न ही सही भाव लगाने वाला व्यापारी। खरीदार खरीदने को तैयार नहीं यदि तैयार भी है तो 50 पैसे से 1 रुपए किलो तक टमाटर की कीमत हो गई है। ऐसे में किसान करे तो क्या? विरोध का सही रास्ता यही दिखा कि सड़कों पर ही टमाटर फेंक दिया जाए..ताकि किसानों के हित का दावा करने वाली सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जा सके।
किसान जयपाल सिंह मुंडा और मनोज कुमार कहते हैं कि टमाटर के जहां दाम ठीक नहीं मिल रहे वहीं व्यवसायी इसे खरीद भी नहीं रहे। ऐसे में अपनी फसल को न तो बेच पा रहे हैं और न ही वापस अपने घर ले जाने की स्थिति में हैं। मजबूरन टमाटर को सड़कों पर फेंकना पड़ रहा है।

नहीं चालू हुआ कोल्ड स्टोरेज
टमाटर की कम कीमतें ही किसानों को परेशान नहीं कर रही है, बल्कि सेम की फली, आलू समेत अन्य सब्जियों की कीमतों को लेकर भी किसान बेहद परेशान हैं. किसान शनिचर महतो कहते हैं कि यहां की सब्जियां जमशेदपुर,  बिहार समेत बंगाल तक जाती हैं। लेकिन कम कीमतों के कारण अभी कोई भी खरीददार यहां नहीं है। किसान रामबरण महतो कहते हैं कि दस साल से कोल्ड स्टोरेज बनकर तैयार है। ऐसे हालात में कोल्ड स्टोरेज हमारा मददगार हो सकता था, पर यह अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

आर्थिक सर्वेक्षण में खेती किसानी
अब जरा बात आर्थिक सर्वेक्षण की करते हैं। अरूण जेटली ने संसद में पेश ​आर्थिक सर्वेक्षण में कहा कि कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर वर्ष 2016-17 में 4.1 प्रतिशत रहने का अुनमान लगाया गया है, जबकि वित्‍त वर्ष 2015-16 में यह दर 1.2 प्रतिशत रही थी। यानि चालू वित्त वर्ष में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.1 प्रतिशत रहेगी। पिछले साल यह 1.2 प्रतिशत रही थी। कृषि क्षेत्र के शानदार प्रदर्शन को आश्‍चर्यजनक नहीं कहा जा सकता है, क्‍योंकि पिछले दो वर्षों के मुकाबले चालू वर्ष में मानसून काफी बढि़या रहा।  वर्ष 2016-17 के दौरान 13 जनवरी 2017 को रबी फसलों का कुल बुवाई रकबा 616.2 लाख हेक्‍टेयर आंका गया, जो पिछले वर्ष के समान सप्‍ताह में दर्ज किये गये रकबे के मुकाबले 5.9 प्रतिशत अधिक है।
वर्ष 2016-17 के दौरान 13 जनवरी 2017 को गेहूं का बुवाई रकबा पिछले वर्ष के समान सप्‍ताह में दर्ज किये गये रकबे की तुलना में 7.1 प्रतिशत अधिक रहा। इसी तरह वर्ष 2016-17 के दौरान 13 जनवरी 2017 को चने का बुवाई रकबा पिछले वर्ष के समान सप्‍ताह में आंके गए रकबे के मुकाबले 10.6 प्रतिशत ज्‍यादा रहा।

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