हल्दी की बुआई में देरी की वजह से बढ़ते दामों में सुधर रही किसानों की आर्थिक सेहत

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मौसम खराब होने की वजह से हल्दी का उत्पादन कम हो गया है। ऐसी स्थिति में किसान दामों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। महाराष्ट्र के सांगली जिले की एक मंडी में अच्छी गुणवत्ता वाली हल्दी 9000 से 10000 प्रति क्विंटल के रेट पर बिक रही है। इस साल बेमौसम हो रही वर्षा और जलवायु परिवर्तन से तेजी से हो रहे मानसूनी अनियमितता की वजह से बहुत सारी फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ है।
इससे हल्दी की खेती भी प्रभावित हुई है। हल्दी के अच्छे दाम मिलने से किसानों की आर्थिक सेहत में सुधार हो रहा है । पूरे प्रदेश में इनके उत्पादन में कमी देखी जा रही है। फिलहाल वर्तमान में हल्दी का सीजन शुरू हो गया है। सांगली जिला जो महाराष्ट्र में हल्दी का मुख्य बाजार है वहां ज्यादातर किसान परपेठ हो राजापुरी, हल्दी की दो किस्म लेकर आ रहे हैं। जिसमें राजापुरी हल्दी की कीमत ज्यादा मिल रही है। राजापुरी हल्दी का अधिकांश उत्पादन सांगली जिले में ही होता है। आवक शुरू होते ही किसानों को रिकॉर्ड दाम मिलने शुरू हो गए हैं। अच्छी गुणवत्ता वाली हल्दी 9000 से ₹10000 प्रति क्विंटल में बिक रही है
कोरोना महामारी के दौर से ही लोग हल्दी के लाभकारी गुणों से परिचित हुए जिसके बाद काढ़े के सामान में हल्दी मुख्य रूप से प्रयोग में लाई जाने लगी जिससे हल्दी की डिमांड बढ़ गई। इंटरनेशनल मार्केट में भी हल्दी की मांग में वृद्धि हुई है। कारोबारियों का कहना है कि इस बार उत्पादन घटने से सीजन की शुरुआत से ही कीमतों में तेजी आ रही है।
यह आगे भी जारी रहेगी सांगली मंडी में राजापुरी हल्दी और परपेठी हल्दी की 8000 से 9000 बोरी की आवक शुरू हो गई है।

बाजार में राजापुरी हल्दी की रिकॉर्ड आवक

महाराष्ट्र के सांगली और हिंगोली जिलों में सबसे ज्यादा हल्दी का उत्पादन होता है। हल्दी का मुख्य बाजार हिंगोली जिले के वासमत में भी है। सांगली बाजार समिति में हल्दी की आवक बढ़ रही है। यहां दोनों किस्मों की आवक है हालांकि इन दोनों हल्दी के भाव में अंतर है। राजापुरी हल्दी की औसत कीमत ₹8000 है जबकि परपेठ की कीमत ₹7000 तक है और यही सामान्य हल्दी की कीमत है। अगर बहुत अच्छी गुणवत्ता वाली हल्दी है तो उसका दाम 10000 प्रति क्विंटल तक है।

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