वर्षा वर्मा
नई दिल्ली: जब से दिल्लीवासी विकास कि तरफ बड़ा रहे है। तब से दिल्ली के लोगों मे सांस की समस्या ज्यादा देखने को मिला रही है। दरअसल दिल्ली भारत की राजधानी तो है ही इसके साथ-साथ भारत के सबसे प्रदूषित शहरों में पहले स्थान पर आता है। राजधानी को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। यही कारण है कि अधिकांश समृद्ध लोगों की कोशिश होती है कि वह राजधानी में ना रहे। ताकि वह स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से बच सकें। प्रदूषित हवा वाले शहरों की गिनती में दिल्ली का नाम दुनियाभर में प्रसिद्ध है। ऐसे में आपके मन में भी सवाल जरूर होगा कि आखिर दिल्ली की प्रदूषित हवा लोगों को कितना प्रभावित कर सकती है।प्रदूषित वातावरण लोगों के लिए कितना नुकसानदायक है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार
दिल्ली में रहने वाले लोगों की आयु 8 साल कम हो गई है। यह तो आपने भी जरूर सुना होगा कि दिल्ली में एक दिन सांस लेने से हम उतनी जहरीली हवा अंदर लेते हैं। जितना एक दिल्ली से बाहर रहने वाला इंसान 4 सिगरेट पीकर लेता है। इसका असर सीधे तौर पर स्वास्थ्य पर देखता हैं।
यही कारण है कि दिल्ली में रहने वाले लोग सामान्य उम्र से 8 साल कम जिंदा रहेंगे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगर दिल्ली का वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के हिसाब से साफ हो जाए यानी कि अगर वायु गुणवत्ता 5 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो जाए। तो दिल्ली में रहने वाले 1.87 करोड़ लोगों की आयु 7-8 साल तक बढ़ भी सकती है।
वायु गुणवत्ता स्तर
अपको बताते चलें कि शिकागो यूनिवर्सिटी की यह रिपोर्ट एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स पर आधारित है। रिपोर्ट में 2022 को बेस ईयर मानते हुए खुलासा किया है कि अगर राजधानी की हवा भारत के राष्ट्रीय मानक 40 µg/m3 भी हो जाए। तो यहां के लोगों की उम्र 3-4 साल तक बढ़ सकती है।
दिल्ली ही वह शहर जो भारत का सबसे प्रदूषित शहर है। रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में भारत का सबसे प्रदूषित शहर दिल्ली ही थी। यहां प्रदूषण का औसत PM2.5 का स्तर 84.3 µg/m3 था। इसके बाद दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश है जहां औसत PM2.5 का स्तर 65.5 µg/m3 दर्ज किया गया।
किस चीज से कितनी कम होती है उम्र
प्रदूषण के कारण भारतीय लोगों की जिंदगी 3.6 साल कम हो जाती है। कुपोषण के कारण 1.6 साल कम हो जाती है। तंबाकू के कारण 1.5 साल कम और दूषित पानी और गंदगी के कारण भारत में इंसान 8.4 महीने जीवित रहता है। रिसर्च में यह भी दावा किया जा रहा है कि दिल्ली की वायु गुणवत्ता साल 2021 में जितनी थी।
अगर उतनी ही रहती। तो लोगों की उम्र करीब 12 साल कम हो जाएंगी। बताते चलें कि साल 2021 में दिल्ली में प्रदूषण का औसत PM2.5 का स्तर 126.5 µg/m3 था, वहीं 2020 में यह 111.6 µg/m3 था। जबकि 2019 में 124.4 µg/m3 था।
स्वच्छ हवा का मतलब बेहतर हेल्थ
यह रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि स्वच्छ हवा का मतलब बेहतर स्वास्थ्य है। यह एक और वजह है कि सरकारों को जहरीली हवा के खिलाफ मिशन मोड पर काम करना चाहिए। दिल्ली सरकार सर्दियों में बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सचिवालय में एक गोलमेज बैठक का आयोजन किया है।
इस बैठक में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और सरकारी विभागों के अधिकारीयों ने हिस्सा लिया । दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर एक ‘विंटर एक्शन प्लान’ तैयार किया जाए।
प्रदूषण से बचाने के उपाय
वाहनों के इंजन एवं तेल को पुरानी प्रदूषित स्थिति से बीएस-6 में बदलना।
कोयले से बनने वाली बिजली को काम करना
कोयला निर्धारित ऊर्जा संयंत्रों के प्रदूषण को कम करना
कारखानों के प्रदूषण को कम करना
पराली जलाना कम कर
इसके बाद दिल्ली को प्रदूषण मुक्त किया जा सकता है।
