जीरे की बुवाई में 20-25 दिन की देरी, अधिक सर्दी से जीरे को होगा फायदा

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cumin farming: भारतीय रसोई की कल्पना मसालों के बिना नहीं की जा सकती है। इसमें जीरा भी ऐसा ही एक प्रमुख मसाला है। बात करें जीरे के प्रमुख उत्पादक राज्य की तो इसमें गुजरात और राजस्थान शामिल हैं। लेकिन इन दोनों राज्यों में मौसम संबंधी समस्याओं के कारण बुवाई में देरी हो गई है। पिछले कुछ हफ्तों में दिन के तापमान में वृद्धि ने जीरे की बुआई को प्रभावित किया है और कई जगहों पर नई फसल भी खराब हो गई है। हालांकि सूत्रों ने कहा कि बुआई की अवधि 20 दिसंबर तक बढ़ने की संभावना है। इसलिए किसान देर से भी जीरे की बुवाई कर सकते हैं। सबसे बड़े उत्पादक राज्य गुजरात में रबी 2024-25 फसल सीजन के दौरान 25 नवंबर तक केवल 57,915 हेक्टेयर में जीरे की बुआई हुई है। जबकि पिछले साल इसी अवधि में 2.44 लाख हेक्टेयर में जीरे की बुआई हुई थी।

बुवाई में 20-25 दिन की देरी
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार गुजरात में जीरे के लिए 3.81 लाख हेक्टेयर से अधिक के सामान्य फसल क्षेत्र में से अब तक केवल 15 प्रतिशत क्षेत्र को कवर किया गया है। वहीं दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य राजस्थान में भी स्थिति बहुत अलग नहीं है। हाल के दिनों में बढ़े हुए तापमान के कारण जीरे की बुआई में 20-25 दिन की देरी हुई है। साथ ​ही इस साल रकबा अच्छा रहने की उम्मीद है राजस्थान में रकबे में बढ़ोतरी हो सकती है। जबकि गुजरात में रकबा पिछले साल के स्तर का 80-90 प्रतिशत रहने की संभावना है। हालांकि सौंफ उगाने वाले किसानों का एक वर्ग इस साल जीरे की खेती कर सकता है।

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20 दिसंबर तक कर सकते हैं बुवाई
दरअसल राजस्थान में दिन के बढ़े हुए तापमान ने जीरे और कुछ क्षेत्रों में सरसों की नई फसल को प्रभावित किया है। और जिन किसानों को रबी में बोई गई नई फसलों को समस्या का सामना करना पड़ा हो वे जीरे की फिर से बुवाई कर सकते हैं क्योंकि बुवाई का समय 20 दिसंबर तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही इसबगोल उत्पादकों का एक वर्ग जीरे की ओर रुख कर सकता है। जीरे की बुवाई के लिए सही समय अक्टूबर के अंत से नवंबर के मध्य तक का होता है। वहीं इस साल मौसम बुवाई के लिए अनुकूल नहीं रहा है और राजस्थान के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों जैसे जैसलमेर, फलोदी और नागौर सहित अन्य जिलों में अंकुरण की समस्याएं आई हैं। हालांकि अब तापमान में गिरावट आ रही है और बुवाई में तेजी देखी जा रही है।

अधिक सर्दी से जीरे को होगा फायदा
बुवाई में 20-25 दिन की देरी हो रही है। इसलिए लंबी सर्दी से फसल को फायदा होगा।एनसीडीईएक्स पर जीरा मार्च 2025 अनुबंध 2 फीसदी की गिरावट के साथ 24720 रुपये पर था जबकि हाजिर कीमतें 24,881 रुपये के आसपास थीं। मसाला बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 2023-24 के दौरान भारत का जीरा उत्पादन 11.87 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र से बढ़कर 8.6 लाख टन हो गया है। पिछले वर्ष जीरा उत्पादन 9.37 लाख हेक्टेयर में 5.77 लाख टन था।

 

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