दिघवारा बाजार में जिला परिषद दुकान निर्माण में देरी लोगों के लिये बन रहा परेशानी का सबब

अनुज प्रतीक

दिघवारा: एक तरफ देश कोरोना महामारी की मार झेल रहा है। समय—समय पर लॉक डाउन के कारण रोजी रोटी के लाले वैसे ही पड़े हुए हैं हालाकि इस लॉक डाउन को महज कुछ महीने ही हुए हैं वहीं दूसरी तरफ देश में एक ऐसा बाजार भी है ​जिसे लॉक डाउन हुए लगभग 6 साल पूरा हो गए। जी हां, बात हो रही है दिघवारा प्रखंड के दिघवारा बाजार की।
क्या है मामला
स्थानीय प्रखंड के दिघवारा बाजार में सारण जिला परिषद की जमीन में जिला परिषद द्वारा दुकान निर्माण की देरी अब स्थानीय लोगों के लिये परेशानी का सबब बनता जा रहा है वही निर्माणाधीन दुकानों में कब्जे को लेकर स्थानीय दुकानदार बार—बार आपस में उलझते नजर आ रहे हैं।
असमंजस में दुकानदार
ज्ञात हो की विगत वर्ष 2015 के जुलाई माह में उच्च न्यायलय के आदेश के आलोक में जिला प्रशासन ने बाजार में बसे सैकड़ो दुकानदारों को हटाते हुए उनकी दुकानों को तोड़ दिया था। वही उक्त जगह पर पुनः निविदा निकाल कर दुकान निर्माण की बात जिला परिषद ने शुरू किया।उच्च न्यायालय के फैसला में शामिल 86 दुकानदारों को जिला परिषद ने प्रथमिकता दिया और साथ ही बाकि बचे दुकानों के लिये भी लोगो से फॉर्म भरवाए गये। दुकान टूटने और रोजगार छिनने के कारण प्रभावित दुकानदारों ने आनन फानन में दुकानों के लिये जिला परिषद में बजाप्ता पगड़ी की रकम तक जमा करवाकर जल्द दुकान मिलने की उम्मीद पाल लिये ।
वही स्तर पर दुकान निर्माण में आई छोटी मोटी अड़चनों को जिला परिषद दूर करते हुए जब दुकान निर्माण का कार्य शुरू करवाया । उसी वक्त कुछ स्थानीय लोगो ने बिहार में लागु बिल्डिंग बाइलॉज का हवाला देते हुए और जिला परिषद पर बिना नक्शा दुकान निर्माण की बात लगभग रोक दिया ।

पहले थी दुकान अब फुटपाथ ही सहारा
दुकान टूटने पहले कई जगह लोगो की पक्की एवं स्थाई दुकान था जिसमें लोग अपना व्यवसाय किया करते थे। दुकान टूटने के लगभग डेढ़ साल में भी कोई दुकान पूर्ण नही बन पाया। जो दुकानदार लाखों रुपये के व्यवसाय करते थे आज सड़को पर घूम रहे है। या फिर रोजी रोटी बरकरार रखने और घर चलाने के लिए फुट पाथ पर अपनी दुकान चलकर जीविका चलाने में मजबूर हो रहे है।
दुकान निर्माण पर रोक के बावजूद आपस में कई बार दुकानदार उलझ जा रहे है। वजह सिर्फ अपनी पिछली दुकानों के आगे फुटपाथ पर दुकान लगाने को लेकर सभी अपनी अपनी पुरानी दुकानों को लेकर चिंतित हो गये है। साथ एक दूसरे के पुराने दुकानों के सामने दुकान लगाने पर उलझते है।
तारीख पे तारीख..फिर भी न निकला रास्ता
पिछले कई वर्षों से दिघवारा बाजार में स्थानीय दुकानदार और जिला परिषद में दुकान निर्माण को लेकर मुकद्दमा का लंबा दौर चला। और अंत में उच्च न्यायालय ने पुराने दुकानदारों को अतिक्रमणकारी घोषित करते हुए दुकानों को तोड़ने का आदेश दे दिया था। उसी आदेश के आलोक में दुकानें बाजार में तोड़ी गई थी।
नये अद्र्ध निर्मित दुकानों पर भी मारे ताले
दिघवारा बाजार में जिला परिषद द्वारा निर्माणाधीन दुकानों में पूर्व में रह रहे दुकानदारों ने अपने—अपने कब्जे दिखाने शुरू कर दिए है। बांस की चचरी से लेकर अस्थाई छत डालकर दुकानदार अपनी दुकानों को चला रहे है।

कटीले तार से की गई अर्धनिर्मित दुकानों की सीलिंग
पूर्व में निकले निविदा के अनुसार प्राप्त दुकानदार जब दुकानों के आवंटन में वर्षो का विलंब होता देखा तब उन्होंने पुनः उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। वहीं उच्च न्यायालय ने अर्ध निर्मित दुकानों को भी खाली करवाने का आदेश दे दी। जिसके बाद अधिकारियों के भारी भरकम भीड़ ने दिघवारा बाजार के अर्धनिर्मित दुकानों में से दुकानदारों को हटाते हुए कटीले तार की घेराबंदी करा दिया।
आदेश पर आदेश..मगर नही मिली दुकान
दिघवारा बाजार में जिला परिषद द्वारा निर्माणाधीन दुकानों की स्थिति उन आवंटियों के लिये परेशानी का सबब बन गया है जिन्होंने जिला परिषद द्वारा निकाली गई निविदा में आवेदन देकर दुकान की मांग की थी। उन आवंटियों ने बार—बार उच्च न्यायालय की शरण मे जाकर जिला परिषद से जल्द दुकान दिलावने की मांग करते रहे। उनकी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने दो तीन बार आदेश पारित कर आवंटियों को पहले तो पूर्ण फिर जैसे है वैसे हालात तक मे दुकान आवंटन का आदेश दिया लेकिन लंबी चली कानूनी लड़ाई एवं लगभग 5 वर्ष की जद्दोजहद के बावजूद अब तक दुकान न तो पूरी तरह से निर्मित हुए और न ही दुकानों का आवंटन हो पाया।
क्या है पेंच
दिघवारा बाजार में जिला परिषद द्वारा बनाये जा रहे दुकान पर उस वक्त ग्रहण लग गए जब बिहार में लागू भवन उप विधि नियम 2014 को पूर्णतः लागू करवाने की मांग को लेकर कुछ लोग न्यायालय की शरण मे जा पहुंचे। नतीजा जैसे—तैसे हालात में निर्माण कार्य रोक दिए गए। वही इसके कारण लगभग 5 वर्षो से स्थानीय दुकानदार किसी तरह अपनी रोजी रोटी जुटाने में लगे है।


आवंटी फंसे सरकारी पचड़े में निजी निर्माण पर नहीं है रोक
ऐसा नहीं है कि उक्त अवधि में सरकारी एवं गैर सरकारी निर्माण कार्य पर स्थानीय निकाय ने किसी तरह का रोक लगाए हो। बिहार भवन उप विधि नियम को ताक पर रखकर इस दो वर्षों के अवधि में दिघवारा बाजार में कई व्यवसायिक कम्प्लेक्स का निर्माण हुआ है। मगर इस ओर ना ही सरकारी अमले और नही और पीड़ित दुकानदारों के पक्ष से कोई ठोस बयान दे रहे है।।
इलाके में निर्माण में बिहार भवन उपविधी नियमों का पालन सुचारू रूप से नही हो पा रहा है। सरकार के विभाग द्वारा इस नियम को निजी भवनों पर लागू करवाने में लगभग शिथिल हो गई है जिसका नजायज फायदा निर्माण में जुटे निजी निर्माणकर्ताओं को मिल रहा है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *