करें दाल का भरपूर इ्स्तेमाल,जीवन होगा खुशहाल

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manish 2_nमनीष अग्रहरि
देश में दाल की बढ़ती कीमतों के बीच सरकार की तरफ से दलहनी फसलों के पैदावार बढ़ाने का प्रयास अलग—अलग स्तर पर किया जा रहा है। यह भी महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) ने वर्ष 2016 को अन्तरराष्ट्रीय दलहन वर्ष घोषित किया है। इसके पीछे यूएन का मुख्य मकसद विश्व में दाल की पैदावार को बढ़ाना, दाल की उपयोगिता,और इसकी खपत को बढ़ावा देना है। इसे जन—जन की थाली तक पहुंचाना है। दाल परंपरागत रूप से भी हमारे खान—पान का अभिन्न अंग रहा है। चाहे देश का कोई भी क्षेत्र हो,प्रत्येक जगह पर लोग इसे खूब पसंद करते है। न सिर्फ शाकाहारी अपितु मांसाहारियों में भी दाल के इस्तेमाल का चलन है। सवाल सिर्फ चलन का भी नहीं है हमें यह पता होना चाहिए कि रोजाना इस्तेमाल होने वाली दाल स्वाद के साथ साथ हमारे सेहत को सही रखने की भी अचूक दवा  भी है। तो आइए जानते है दालो के प्रमुख औषधीय खूबियों के बारे में।
प्रोटीन की भरपूर मात्रा : प्रोटीन माॅंसपेशियो के निर्माण, शरीर में टूट फूट की मरम्मत, जरूरत पड़ने पर शरीर को उर्जा देने का काम(यह काम कार्बोहाईड्रेट,ग्लूकोज का होता है), आनुवंशिक लक्षणो के विकास में सहायता करने के आलावा और भी अनेक महत्वपूर्ण काम करती है। जहां तक खाद्यान्न से प्रोटीन ग्रहण करने का सवाल है तो आसानी से पचने योग्य प्रोटीन दालों से ही मिल पाती है क्यो कि मांसाहार से मिलने वाली प्रोटीन कई बार आसानी से पच नही पाती है। जानकारों के मुताबिक 19- 30 वर्ष के सामान्य व्यक्ति को रोज 55-60 ग्राम प्रोटीन की जरूरत होती है। अब ऐसे में यह भी जानना जरूरी है कि किस दलहनी फसलों से हमें कितनी मात्रा में प्रोटिन प्राप्त होता है। जी हां,सोयाबीन में सर्वाधिक 45 फीसदी, लोबिया में 23.4 फीसदी,मंसूर में 25 फीसदी , मटर में 22.5 फीसदी  , चना मे 21 फीसदी, उरद दाल में 24 फीसदी , मॅूग में 25 फीसदी , अरहर में 20-21 फीसदी प्रोटीन पाई जाती है। इस तरह से आप समझ सकते हैं कि प्रोटिन ग्रहण करने के लिए दालों का सेवन कितना जरूरी है।

pulsesहृदय रोग में काफी उपयोगी: दरअसल यदि कोई व्यक्ति सौ ग्राम दाल का सेवन करता है तो उसमें मात्र 0.4 फीसदी ही फैट पाया जाता है और कोलेस्ट्राल बिल्कुल नही होता है। इससे खून की नालियाॅं साफ रहती है और रक्त के बहाव में कोई रूकावट नही हो पाती है। कुछ दालों में फोलेट और मैग्नीशियम भी सूक्ष्म मात्रा में होते है। फोलेट एक ओर जहाॅ दिल के लिए खतरनाक होमोसिस्टीन को नियंत्रित करता है वही मैग्नीशियम पूरे शरीर में आक्सीजन तथा दूसरे पोषक तत्वो की सप्लाई बेहतर तरीके से करता है।
कब्ज और कोलेस्ट्राल की परेशानी से निजात: दालों में घुलनशील व अघुलनशील दोनो प्रकार के फाइबर पाये जाते है। घुलनशील फाइबर एक ओर जहाॅं तेल-घी जैसे चिकनाई वाले पदार्थो से मिलने वाले कोलेस्ट्राल का स्तर नीचे रखता है, वही दूसरी ओर अघुलनशील फाइबर कब्ज जैसी कठिन बीमारी को दूर रखने में मदद करती है।

pppppk_oरोग प्रतिरोधक शक्ति की वृद्विः दालो में अनेक प्रकार के एैसे बायोएक्टिव होते है जो गजब के रोगप्रतिरोधक शक्ति से भरपूर होते है। जिससे कैंसर, डायबिटीज, हृदय जैसे गंभीर रोगो से भी लड़ने की अचूक क्षमता शरीर में विकसित हो सकती है।
ग्लूकोज के संतुलन में मददगार: बीमारी के हालात में अक्सर आपने ग्लूकोज के बारे में सुना होगा क्यो कि यह शरीर को तुरन्त उर्जा देने की कूवत रखता है। विभिन्न दालों में मौजूद भरपूर मात्रा में फाइबर कार्बोहाईड्रेट को पकड़कर रखते है। इससे पाचन धीमा होता है और ग्लूकोज का टिकाउपन बढ़ता है।
दालो के महत्व के बावत रायबरेली (उ0प्र0) के रिटायर्ड होम्योपैथ चिकित्साधिकारी डाॅं0 आर0 पी0 मौर्य कहते है “ एक औसत व्यक्ति को प्रतिदिन भोजन में 55-60 ग्राम प्रोटीन मिलनी चाहिए। केवल दालों से शरीर को प्रोटीन मिलनी हो तो दिन भर में 4 कटोरी दाल से इसकी पूर्ति हो सकती है। हलाॅंकि रोजाना जरूरत केे लिए भोजन से 2200 कैलोरी उर्जा की भी जरूरत पड़ती है।

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