सदाबहार मटर के सदाबहार स्वाद…

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पंचायत खबर पर मनाये जाने वाले दलहन पखवाड़े में  पी जी कॉलेज गाजीपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ एस एन सिंह से दलहनी फसलों विशेष रूप से सदाबहार मटर के उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलूओं पर बातचीत की पंचायत खबर के रोविंग एडिटर अमितेश सिंह (अवैतनिक) ने।  पेश है बातचीत के प्रमुख अंश..

डॉ साहब मटर की विशेषता के रूप में एक वैज्ञानिक के नाते क्या कहेंगे?

जहां तक  मटर की विशेषता का सवाल है, मटर एक ऐसी सब्जी है जो अपनी प्रचुर प्रोटीन मात्रा एवं स्वादिष्ट गुणवत्ता के कारण देश—विदेश छोटे—बड़े सभी को समान रूप से प्रिय है। इतना ही नहीं मटर ऐसी दलहनी फसल है जिसकी मांग साल भर लगातार बनी रहती है। इस फसल को सभी प्रकार की भूमि में उगाया जा सकता है। लेकिन यदि भूमि अम्लीय हो तो यह मटर के लिए उपयुक्त नहीं है। बड़ी बात है यह है कि मटर न सिर्फ दलहन के रूप में काम आता है बल्कि इसका बड़ा पैमाने पर प्रयोग हरी सब्जी के रूप में किया जाता है। इसलिए किसान इसे नकदी फसल के रूप में भी देखते हैं। साथ ही मटर के हरे डंठल खासकर देशी मटर के हरे डंठल पशुओं के चारा में भी विशेष रूप से दुधारू पशुओं के चारा में भी उपयोग किया जाता है।

sn-singh_nअन्य दलहनी फसलों के बरक्श मटर का दलहन की जरूरतों को पूरा करने में कितना योगदान है? और कौन—कौन सी प्रमुख प्रजातियां हैं?

मटर रबी की एक प्रमुख दलहनी फसल है, विश्व में इसकी खेती भारत में सर्वाधिक होती है, मुख्य रूप से दाल एवं सब्जी में प्रयोग की जाती है, इसमे प्रोटीन और विटामिन प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। मटर की खेती के लिए अनुकूलतम तापमान 25 से 30 डिग्री सेन्टीग्रेड उपुक्त माना जाता है, मटर की बुवाई के लिए संतुत प्रजातियाँ . जैसे की रचनाए शिखाए मालवीय मटर.15, पन्त मटर.5, प्रकाश, जय, सपना, आदर्श, पन्त पी.42, तथा अमन प्रजातियाँ जिनमे किसी एक प्रजाति का चुनाव करके खेती सफलता पूर्वक की जा सकती है। मटर की खेत की तैयारी प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से तथा दो तीन जुताईयां देशी हल या कल्टीवेटर से करके खेत में पाटा लगा कर समतल कर लेना चाहिए।

 मटर की खेती के लिए बीज की प्रति हेक्टेयर कितनी मात्रा प्रयोग किया जाना चाहिए। बुआई का सही समय क्या हो?

 मटर की बुवाई के लिए बीज की मात्रा लम्बे पौधों की प्रजातियाँ के लिए 80 से 100 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा बौनी प्रजातियाँ के लिए 125 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टर की दर से बुवाई करनी चाहिए। मटर की फसल में औसतन उपज 25 से 30 कुन्तल प्रति हैक्टर प्राप्त हो जाती है मटर की बुवाई का समय अक्टूबर के मध्य से नवम्बर के मध्य तक हल के पीछे बौनी प्रजातियाँ को 20 सेन्टी मीटर तथा लम्बी प्रजातियों को 30 सेन्टी मीटर की दूरी पर बुवाई करनी चाहिए। फसल को बीज जनित रोगों के बचाव के लिए थिरम 2 ग्राम या मैन्कोजेब 3 ग्राम या 4 ग्राम ट्राईकोडरमा से प्रति किलोग्राम बीज को बुवाई से पहले शोधित करना अति आवश्यक है, बीज शोधन के बाद बीज को 200 ग्राम राईजोवियम कल्चर से 10 किलोग्राम बीज को उपचारित करके बोना चाहिए।

matar-82354मटर की खेती में उर्वरको का प्रयोग कितनी मात्रा में करें, मटर की फसल में सिचाई को लेकर आपकी क्या राय है?

मटर की फसल में नाइट्रोजन 20 किलोग्राम, फास्फोरस 60 किलोग्राम, पोटाश 40 किलोग्राम तथा गंधक 20 किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से तत्व के रूप में प्रयोग करना चाहिए तथा मटर की बौनी प्रजातियों के लिए बुवाई के समय 20 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टर की दर से अतिरिक्त देना चाहिए। मटर की फसल में सिचाई आवश्यकतानुसार केवल करनी चाहिए यदि जाड़े में वर्षा न हो तो फूल आने के समय 1 सिचाई करना अति आवश्यक है।

लेकिन आम तौर पर देखा गया है मटर उत्पादक किसान खर पतवार नियंत्रण को लेकर परेशान होता है? इस समस्या से कैसे निपटा जाए?

 मटर की बेहतर पैदावार लेने के लिए किसानों को खरपतवार नियंत्रण,विशेष रूप से कीट एवं रोगों के नियंत्रण में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके लिए किसान भाई आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करें जो कि काफी लाभप्रद है। मटर की फसल में खरपतवार नियंत्रण के लिए वासालिन नामक रसायन की 1.65 से 2.2 लीटर मात्रा 1000 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टर की दर से बुवाई से पहले छिडकाव करें अथवा पेंडामेथालिन रसायन की 3.33 लीटर मात्रा को 1000 लीटर पानी में प्रति हेक्टर की दर से मिलाकर बुवाई के बाद छिडकाव करने सेफसल में खरपतवार पर नियंत्रण किया जा सकता है।

क्या किसान खरपतवार नियंत्रण के जरिए बेहतर फसल प्राप्त कर सकता है या उसे कीटों के नियंत्रण को लेकर भी सजग रहना होगा?

जहां तक मटर के कीटों का सवाल है मटर में कीटों के द्वारा काफी नुकसान पहुंचाया जाता है। यदि मटर के फल को नुकसान करने वाले कीटों की बात करें तो ये पौधे में प्रारंभिक अवस्था से दिखाई देने लगता है। इससे न सिर्फ पत्तियों की बाढ़ प्रभावित होती है बल्कि फूलों की संख्या में भी कमी आती है।  इसके साथ ही मटर में फली बेधक कीट, बुकनी रोग, रतुआ रोग, उकठा रोग, तुलासिता रोग, सफेद विगलन रोग, बीज विगलन रोग आदि बीमारियां पाई जाती हैं। ऐसी बीमारियों से बचाने के किसान भाईयों को समय से इसकी पहचान कर इसका निदान करना चाहिए तभी मटर की पैदावार बेहतर होगी और किसान सुखी सम्पन्न होंगे।

matru-1मटर की फसल के प्रमुख रोग कौन कौन से है और उसका नियंत्रण किस तरह से करें?

मटर की फसल में प्रमुख रोग हैं जैसे बुकनी रोग या पाऊडरी मिल्डयू इस रोग से पत्तियां फलियाँ तथा तने पर सफ़ेद चूर्ण सा फैलता है और बाद में पत्तियाँ ब्राउन या काली होकर सुख जाती हैए रोग उपचार के लिए कार्बेन्डाजीम रसायन की 500 ग्राम या ट्राईकोमार्क 80 ई सी 500 मिली लीटर दवा को 600 से 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हैक्टर की दर से छिडकाव 10.15 दिन के अन्तराल पर करना चाहिएए इसके अलावा दूसरा लगता है उकठा रोग, इस रोग में पौधों की पत्तियों नीचे से ऊपर की ओर पीली पड़ने लगती है और पूरा पौधा सुख जाता है, इसके उपचार के लिए बीज को 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजीम अथवा वैनोमिल प्रति किलो ग्राम बीज में मिलकर बीज की बुवाई करनी चाहिए, तीसरा रोग लगता है, सफ़ेद गलन रोगए इस रोग से पूरा पौधा सफ़ेद रंग का होकर मर जाता है, पौधे के ग्रसित भागो पर सफ़ेद रंग की फफूदी उग जाती है, इसके उपचार के लिए कार्बेन्डाजीम 0.05 दवा का 15 दिन के अन्तराल पर छिडकाव करना चाहिए, इसमे झुलसा रोग बहुत ज्यादा लगता है, इस रोग में पौधों के नीचे पत्तियों पर किनारे से भूरे रंग के धब्बे बनते है, इसके उपचार के लिए 2.5 ग्राम थीरम नामक दवा से प्रति किलो ग्राम बीजोपचार करना चाहिएए बाद में फसल पर मैन्कोजेब 0.2 घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए, इसके अलावा बीज गलन रोग लगता है, इस रोग में बीज अंकुरण से पहले या अंकुरण के समय सड़ना प्रारम्भ हो जाता है, इस रोग की रोकथाम के लिए 2.5 थीरम अथवा कैप्टान 2 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज उपचार करना लाभदायक होता है।

प्रमुख कीट कौन कौन से है, जिससे मटर फसल में नुकसान हो सकता है उसका नियंत्रण कैसे करें?

इसमें दो तरह के कीट लगते है, पहला तने की मक्खीए यह काले रंग की घरेलु मक्खी तरह होती हैए इसका प्रकोप फसल उगने के साथ शुरू हो जाता है, इसकी नवजात गिडारे पत्तियों से होते हुए तने में घुस जाते है। जिससे फसल को अत्यधिक नुकसान होता है दूसरा है, फली वेधक कीट यह गहरे भूरे रंग का पतंगा होता है। सुडी गुलाबी रंग की होती है, इस कीट की गिडारे फलियों में बन रहे दानो को खाकर नुकसान पहुचती है। मटर की फसल को कीटो से बचाने के लिए फसल के कूडो में कार्बेफ्युरान 15 किलो ग्राम अथवा फोरेट 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेअर की दर से प्रयोग करे या फसल जमते ही सप्ताह के अन्तराल पर 5ः प्रकोपित पौधे दिखते है, डाईमेंथोट 30 ई सी 1 लीटर मात्रा को 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करेंए फसल में फली वेधक का प्रकोप होने पर फेन्बेलरेट 750 मिलीलीटर मात्रा या मोनोक्रोटोफास 1 लीटर मात्रा को 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिडकाव करना चाहिए, जिससे की इन कीटो का प्रकोप न हो सके।

panuuuuu_nमटर की फसल की कटाई का सही समय  क्या है और उसका भण्डारण हम किस तरह से करें?

मटर की फसल को पूर्ण पकाने पर ही कटाई करनी चाहिए कटाई के पश्चात फसल की मड़ाई करके दाना निकाल लेना चाहिए, मटर को भण्डारण में कीटो से बचाने के लिए एल्युमिनियम फास्फाइड 3 गोलिया प्रति मीट्रिक टन की दर से प्रयोग करेंए जिससे भण्डारण में कीटो से होने वाली हानि से बचाया जा सके ।

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