संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: दालों के उत्पादन और खपत के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है। इसके बावजूद दालों का उत्पादन 170-180 लाख टन पर अटक गया है। मांग को पूरा करने के लिए 40-50 लाख टन दालें आयात करनी पड़ती हैं। इसके कारण दाल की कीमतों में समय-समय पर उछाल आते रहता है। इस वर्ष अरहर दाल की कीमत 200 रूपये तक पहुंच गयी। चना दाल ने भी जम कर रंग दिखाया। 
जिस दाल के विषय में यह कहा जाता था कि गरीब से गरीब आदमी दाल रोटी खाकर प्रभु का गुण गाते हुए खुशहाल तरीके से अपना जीवन बसर करता रहा है और दाल जो कि आम भारतीयों के प्रोटीन प्राप्ति का बेहतरीन जरिया है उसके थाली से गायब हुआ जाता है। ऐसे में हमें ठहरकर यह भी देखना होगा कि कृषि एवं किसान मंत्रालय जो कि किसानों की बेहतरी के लिए उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है और जिसपर देश के सवा सौ करोड़ आबादी के खाद्य सुरक्षा की जवाब देही है दलहन उत्पादन की दिशा में क्या प्रयास कर रहा है..हमारे किसान भाई अधिक से अधिक दलहन उगायें इसके लिए किस तरह से प्रयास किये गए हैं तो आईए नजर डालते हैं केंद्र सरकार दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिए जाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर। 
जी हां, भारत सरकार एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दलहन के उत्पादन को बढ़ाने और नई किस्मों की दालों को विकसित करने के लिए एकीकृत फसल प्रबंधन तकनीकों का उपयोग करने पर जोर दे रही है, ताकि उत्पाद स्वास्थ्यप्रद एवं पोषक तत्वों से भरपूर हो। किसान नये किस्म की फसलें अपनाकर अपनी आय और उत्पादकता दोनो बढ़ा सकते हैं। भारत सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन एस.एफ.एस.एम के अधीन 1700 करोड़ रूपये के कुल आवंटन में से दलहन के लिए 1100 करोड़ रूपए आवंटित किए जो कुल आवंटन का 60 प्रतिशत से भी अधिक है। कुल आवंटन का 15 प्रतिशत नए किस्म के बीजों के उत्पादन हेतु आरक्षित है।दालों की बढ़ रही मांग को पूरा करने और इसके लिए दलहन उत्पादन के रकबे को बढ़ाने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान मंत्रालय ने प्रमुख दालों पर 475 कृषि विज्ञान केंद्रो को शामिल करते हुए बड़ी संख्या में इन जगहों पर अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन का काम शुरू किया है। वर्ष 2015-16 में 22,000 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर 60,000 से भी अधिक प्रदर्शन का आयोजन किया। इसके साथ ही दलहन बीज हब बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाया गया है। केंद्र सरकार ने 150 दलहन केंद्रो की स्थापना की दिशा में कदम बढ़ाया है, जिसमें वर्ष 2016-17 में 100 दलहन केंद्रो की स्थापना की जाएगी,जिसे बढ़ाकर 2017-18 में 150 की जाएगी। इनकी स्थापना आई सी ए आर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि विज्ञान केंद्रों के आपकी भागीदारी के जरिए किया जाना है। ये सारे दलहन केंद्र गुणवत्ता परक बीज मुहैया करायेंगे साथ ही साथ ये बीज आसपास के किसानों के बीच वितरित भी किया जा रहा है।
यदि सरकार द्वारा उठाए गए नये कदमों की बात करें तो केंद्र सरकार पूर्वी भारत में हरित क्रांति योजना के तहत चावल परती क्षेत्रों में दलहन की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। इसके साथ ही चावल की खेतों की मेड़ों पर अरहर की खेती करने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही साथ कृषि मंत्रालय ने ग्रीष्म कालीन मूंग की खेती को बढ़ावा दिया है। सरकार की कोशिश है कि स्थानीय कृषि विकास केंद्रों के साथ मिलकर किसान दलहन के बीज का अधिक से अधिक उत्पादन करें। सरकार ने दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में पर्याप्त वृद्धि की है। दालों का उत्पादन बढ़ाने हेतू दालों के न्यूनतम मूल्य में जबरदस्त वृद्धि की गयी है।
दालो के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढोतरी
अरहर दाल: 4265 रूपये प्रति क्विंटल से 5050
उड़द दाल: 4625 रूपये प्रति क्विंटल से 5000
मूंग दाल: 4850 रूपये प्रति क्विंटल से 5250
