बहेगी दूध की नदियां तो बहुरेंगे किसानों के दिन

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संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: भारत में डेयरी प्रक्षेत्र में लगातार प्रगति हो रहा है यानि दुग्ध उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। पशुपालन और कृषि पर आधारित हमारे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए काफी सुखद है। दो्नो एक दूसरे के पूरक है। एक की खुशहाली का दूसरे पर असर होना स्वाभाविक है। इस लिहाज से सरकार इस क्षेत्र को खास तवज्जो दे रही है। जैसा कि ज्ञात है सरकार किसानों के आमदनी को दुगुना करने का लक्ष्य रखे हुए है, और यदि इस लक्ष्य की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना है तो हमें खेती के साथ पशुपालन प्रक्षेत्र में भी तेजी से प्रगति करनी होगी।
केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड में डेयरी उद्योग के हितधारक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि डेयरी में लगे लोगों की मेहनत और केन्द्र सरकार के प्रयासों की वजह से भारत ने दूध – उत्पादन में 4.2 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर हासिल कर विश्व के 2.2 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर को पीछे छोड़ दिया है। 2015-16 में भारत में दूध – उत्पादन की वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही।

pesticide_nasc-1राधामोहन सिंह ने कहा कि भारत 15 वर्षों से दूध उत्पादन में विश्व में नंबर वन बना हुआ है और इसका श्रेय छोटे दूध उत्पादकों को जाता है। उन्होंने कहा कि दूध एवं दूध उत्पादों की मांग में वृद्धि हो रही है और 2025 तक दूध की मांग बढकर 24 करोड टन हो जाने की संभावना है।
दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के महत्व और इसके इस्तेमाल पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विकास के लिए दूध उत्पादन में 6 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होनी चाहिए। इसके लिए उन्नत प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण, मार्केटिंग, वैज्ञानिक पशु प्रबंधन, दूध उत्पादन से संबंधित जानकारी और बेहतर ऋण सुविधा से संचालित डेयरी जरूरी हैं।

gaiराधामोहन सिंह मंत्रालय द्वारा इस दिशा में किये जा रहे प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं जिसमें गोकुल मिशन प्रमुख है। इसके अंतर्गत वर्ष 2014-15 से 2016-17 के लिए 500 करोड की धनराशि का प्रावधान किया गया है । विश्व बैंक और केन्द्र सरकार के सहयोग से एन.डी.डी.बी. ने केन्द्रीय क्षेत्र योजना “राष्ट्रीय डेयरी योजना चरण -1 (एनडीपी-1) के तहत कई कदम उठाए हैं। इसमें गोजातीय आबादी में अनुवाशिंक सुधार, गांवों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना और दूध उत्पादकों को अतिरिक्त दूध बेचने के अवसर मुहैया कराना शामिल है। एनडीपी -1 की शुरुआत 14 राज्यों से हुई थी और अभी इसे झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और तेलंगाना सहित 18 राज्यों में चलाया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि दूध उत्पादन में वृद्धि से देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता प्रतिदिन 337 ग्राम के मौजूदा स्तर से 2021 -22 तक प्रतिदिन 500 ग्राम हो जाने की संभावना है। इस योजना में 2242 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि पशु स्वास्थ्य की दिशा में लगातार जागरुकता फैलाना और पशु स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि डेयरी में महिलाओं और युवाओं को अच्छा रोजगार मिल रहा है। वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करनी है और इस लक्ष्य को हासिल करने मे डेयरी की अहम भूमिका है।

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