संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: नोट बंदी से खेती किसानी से जुड़े लोगों को हो रही परेशानियों से इतर उनके लिए एक राहत की खबर आई है। केंद्र सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 100 रूपये और चने के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 500 रूपये प्रति क्विंटल बढ़ोतरी का फैसला लिया है। इसके अलावा मसूर पर 550 रूपये तिलहन सरसो पर 350 से 400 रूपये बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है। इतना ही नहीं,इसके अतिरिक्त, देश में दलहनों और तिलहनों की खेती को प्रोत्सामहित करने के लिए सरकार ने इन फसलों पर बोनस की घोषणा की है, जो अनुमोदित न्यूनतम समर्थन मूल्यं के ऊपर और उसके अतिरिक्त किसानों को दिया जाएगा।
इन सारे फैसलों पर निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में किया गया।
सरकार ने ये रबी फसलों की एमएसपी बढ़ाने का फैसला कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किया है। सरकार की कोशिश है कि खुले बाजार के अनुरूप और बाजार के अनुरूप किसानों को खाद्य तेल का मूल्य मिले ताकि वे किसान दलहन और तिलहन फसलो की खेती अधिक उत्साह के साथ करे।
इसके अतिरिक्त बोनस भी
कैबिनेट की बैठक में रबी फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने के साथ ही दलहनों और तिलहनों की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सीएसीपी द्वारा की गयी सिफारिशों के चना पर 200 रूपए प्रति क्विंटल, मसूर/लैंटिल पर 150 रूपए प्रति क्विंटल और रबी तिलहन अर्थात् रेपसीड/सरसो तथा कुसुम्भक हेतु प्रत्येक के लिए 100 रूपए प्रति क्विंटल का बोनस देने का निर्णय लिया है।
इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने सभी सरकारी एजेंसियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसान की जो भी उपज हो उसकी खरीदी की जाए। केंद्र सरकार द्वारा लिए गये इन किसान हितैषी फैसलों से दलहन और तिलहन उत्पादक किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और उम्मीद की जा सकती है जैसे—जैसे उत्पादन बढ़ेगा तिलहन और दलहन फसलों के आयात के प्रति हमारी निर्भरता कम होगी। इसके साथ ही फलीदार दलहनों और तिलहनों की खेती बढ़ने से अतिरिक्त पर्यावरणीय लाभ भी होंगे क्योंकि इन फसलों के लिए कम पानी की आवश्यकता होती है और ये मिट्टी में नाईट्रोजन की मात्रा ठी करने में सहायक हैं।

