औषधीय पौधों की खेती से बहुरेंगे जनजातिय किसानों के दिन..सरकार देगी विशेष सुविधायें

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संगीता राना
भोपाल: औषधीय पौधों कि खेती को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार काम कर रही है। औषधीय पौधों की खेती से जुड़े किसानों के लिए बहुत सारी योजनायें चलाई जा रही हैं। कई महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं। इतना ही नहीं अब शिवराज सिंह की सरकार ने यह निर्णय भी लिया है कि औषधीय कृषि से जुड़े किसानों को मनरेगा योजना के तहत भी मदद दी जाएगी। इस योजना का मकसद योजना वैसे किसानों की आमदनी बढ़ाना है जो ऐसे वनोत्पादों की खेती कर रहे हैं विशेष रूप से जनजातिय क्षेत्र के किसानों की आमदनी बढ़ाना है। विशेष रूप से ऐसे किसानों की तादाद मध्यप्रदेश में ज्यादा है। यही कारण है कि सरकार इन किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत लाभ पहुंचा रही है और उनके आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

क्या कहती है सरकार

सरकार का मानना है कि वैसे तो मैदानी इलाको की तुलना में पहाड़ी जिलों में कृषि भूमि कम है बावजूद इसके जो भी भूमि उपलब्ध है उसमें वहां के किसान औषधिय कृषि करते हैं और अपना जीविको पार्जन करते है। उनके द्वारा ​उगाये गये उत्पादों का देश विदेश में बहुत मांग है। बावजूद इसके इन किसानों को उनकी उपज का लाभ नहीं मिल पाता है और इस इलाके में भीषण गरीबी है। वे अपना इलाज अस्पतालों में नहीं करवा पाते। यही कारण है वे अपने स्वास्थ्य की देखभाल इन्हीं औषधिय उत्पादों के जरिए करते हैं और खुद को स्वस्थ रखने का प्रयास करते हैं।
वैसे भी हमारे यहां औषधिय कृषि और वनोपज से प्राप्त उत्पादों से औषधी तैयार करने की परंपरा रही है। इन इलाकों के लोगों के स्वास्थ्य देखभाल का एक मात्र जरिया वैद्य और हकीम ही हुआ करते थे जो इन्हीं वनों से प्राप्त औषधी से लोगों का इलाज किया करते थे। धीरे—धीरे आधुनिक चिकित्सा प्रणाली को भी इनका महत्व स्वीकार करना पड़ा है और सरकार भी औषधीय कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है।
इसका लाभ कुछ हद तक किसानों को भी मिलने लगा है। किसान औषधीय पौधों की खेती करते है साथ ही इसका इस्तेमाल रोजमर्रा के जीवन में तो होता ही है साथ ही इसका व्यवसायिक उत्पादन भी होता है।
जनजाति बहुल गांवो के किसानों को इन इलाको में पाये जाने वाली दुर्लभ जड़ी बूटियों का ज्ञान होता है और इसका लाभ भी मिलने लगा है। ये उत्पाद अक्सर पहाड़ी इलाको में ही पाई जाते है। आप कह सकते हैं कि जंगलों में औषधीयों का खजाना है और उसमें रहने वाली जन जात‍ियां इनका महत्व और उपयोग अच्छे से जानती हैं।
आज के समय में भी देखा जाये तो कई पहाड़ी इलाके ऐसे है जो आज भी पौधों का ही उपयोग औषधी बनाने मे कर रहे है, औषधीय पौधो का प्रयोग भोजन,जड़ी-बुटी औषधी आदि में प्रयोग किया जाता है। जैसे ही पहाड़ी इलाके में रहने वाले लोगों ने एलोपैथिक दवाईयों का इस्तेमाल करना शुरू किया वे इसके आदि होते चले गये। हालांकि आज भी इन इलाकों में लोग तुलसी,नीम,अदरक,एलोवेरा,सौंफ आदि का प्रयोग औषधी के रूप में करते हैं। जबकि एलोवेरा को औषधी का राजा भी कहा जाता है।

इन बीमारियों के इलाज में औषधीय पौधे हैं काफी कारगर

औषधी पौधे इन बीमारियों की चिकित्सा के लिए एक प्रमुख साधन है। औषधीय पौधौ का उपयोग बहुत सारे रोगो को ठीक करने के काम आता है, जैसे मिर्गी, मलेरिया, त्वचा से जुड़ी बीमारियों के निदान में कारगर हैं।

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