वर्षा वर्मा
शिमला: छोटे किसानों को मौसम, फसल उत्पादन मानव संसाधन,अनुबंध बाजार पहुंच और मुल्य में उतार-चढ़ाव से संबंधित जोखिमों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने आलू के बेकार हिस्सों से इथेनॉल बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है।
यह पहल किसानों की आय को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी बेहतर साबित हो सकती है। इस नई तकनीक से न केवल बेकार आलू का उपयोग किया जाएगा। बल्कि बेकार आलू से इथेनॉल बनाने की यह तकनीक किसानों की कमाई भी बढ़ाएगी।
आलू के अधिक उत्पादन और सड़ने की समस्या का सामना करने वाले किसानों के लिए अब एक नई उम्मीद जगी है। अक्सर खबरें आती हैं कि आलू की फसल अधिक होने पर किसानों को उचित दाम नहीं मिलते जिससे वे निराश हो जाते हैं। कई बार आलू की फसल सड़ने से भी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। लेकिन अब इन समस्याओं का समाधान जल्द ही मिल सकता है।
आलू का उपयोग इथेनॉल उत्पादन में एक नया आयाम जोड़ जाएगा। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने सीपीआरआई के 76वें स्थापना दिवस पर कहा कि बदलती जलवायु परिस्थितियों के मद्देनजर किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
उन्होंने राज्य में आलू आधारित उद्योग स्थापित करने पर भी जोर दिया। इस पर शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान ने जानकारी दी कि आलू से इथेनॉल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। अभी तक देश में इथेनॉल का उत्पादन मुख्यतः गन्ने, मक्का और चावल से किया जा रहा है। लेकिन अब इस दिशा में आलू का भी उपयोग किया जाएगा।
सीपीआरआई के निदेशक ब्रजेश सिंह के नेतृत्व में इस संस्थान के वैज्ञानिकों ने आलू से इथेनॉल बनाने के सफल प्रयोग किए हैं। उन्होंने बताया कि इथेनॉल उत्पादन में माइक्रोब्स का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसके परिणामस्वरूप आलू से 80 परसेंट तक इथेनॉल उत्पादन संभव है।
आलू की चिप्स बनाने वाली कंपनियों से निकलने वाले छिलकों से भी इथेनॉल उत्पादन किया जा सकता है। इस तकनीक से न केवल पर्यावरण प्रदूषण कम होगा। बल्कि विदेशी ईंधन पर निर्भरता भी घटेगी।
संस्थान की अगली योजना ऐसी नई आलू किस्में विकसित करने की है जो इथेनॉल उत्पादन में सहायक होंगी। मानव उपभोग के दृष्टिकोण से आलू, गेहूं और चावल के बाद दुनिया की तीसरी सबसे अहम खाद्य फसल है। आलू उत्पादन के मामले में भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है।
आलू की फसल जो भारत की प्रमुख सब्जी है। कुल सब्जी उत्पादन में लगभग 28 फीसदी का योगदान देती है। भारत में आलू उत्पादन 530 लाख टन होता है और लगभग 23 लाख हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। भारत में आलू उत्पादन के मामले में उत्तर प्रदेश। पश्चिम बंगाल और बिहार प्रमुख स्थान है। इस प्रकार आलू से इथेनॉल बनाने की दिशा में सीपीआरआई का यह कदम किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा और देश की इथेनॉल उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी।
