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Cotton: किसानों के लिए 2024-25 में वैश्विक कपास बाजार के लिए स्थिति कुछ हद तक निराशाजनक हो सकती है। इसके अलावा भयानक प्रकोप की वजह से इस साल उत्तर भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में खासकर राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में कपास की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इसके बावजूद खपत में कमी की आशंका बनी हुई है, जो कपास की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
कीमत कम, लेकिन उत्पादन में बढ़त
फ़िच सॉल्यूशंस की शोध एजेंसी बीएमआई ने एक शोधों में कहा कि आने वाला सीज़न कपास उत्पादन के लिए अच्छा है, लेकिन खपत में कमी की वजह से कीमतों पर दबाव बने रहने की संभावना है। उनका मानना है कि वैश्विक कपास बाजार में कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर रह सकती हैं, क्योंकि उत्पादन में बढ़त और खपत मांग में कमी का असर एक साथ बाजार पर पड़ेगा।
2024-25 में वैश्विक कपास उत्पादन में 6.3% की बढ़त का अनुमान है। कुल उत्पादन 120.3 मिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। चीन, ब्राजील और अमेरिका जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में फसल बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे उत्पादन में बढ़त हो सकती है। बीएमआई ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और मिस्र जैसे देशों में अधिक खपत के कारण वैश्विक खपत में भी बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, वैश्विक व्यापार में मामूली बढ़ोतरी के बावजूद बाजार में कीमतों पर असर पड़ेगा।
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कपास आयात में गिरावट
इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी काउंसिल (ICAC) ने 2024 के लिए एक बयान में कहा कि पिछले कुछ सालों से अमेरिका के कॉटन उत्पादों के आयात में आधे से ज्यादा की गिरावट आई है। दरअसल, चीन से अमेरिका का कॉटन आयात 2010 में अपने उच्च स्तर पर था। लेकिन अब इसमें भी लगभग आधे की गिरावट आई है। हालांकि, मानव निर्मित फाइबर (MMF) का निर्यात बढ़ा है, जो कॉटन के साथ मुक़ाबला करता है और अमेरिकी आयात में गिरावट का एक कारण है।
गिरावट का अनुमान कीमतों में
सीजन 2024 से 2025 के लिए कॉटन की कीमतों में पहले से ही गिरावट आ चुकी है। बीएमआई ने 2025 के लिए अपने कॉटन मूल्य पूर्वानुमान को 80 सेंट प्रति इकाई से घटाकर 72.2 सेंट प्रति इकाई कर दिया है। यूएसडीए ने अमेरिकी कॉटन के औसत कृषि मूल्य को भी घटाकर 63 सेंट प्रति इकाई कर दिया है। इसके बावजूद, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि कीमतों में सुधार हो सकता है, खासकर अमेरिकी कॉटन निर्यात में बढ़ोतरी का कारण है।


