कोरोना की तीसरी लहर…सबकुछ राम भरोसे या तैयार है सरकार

संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: कोरोना की तीसरी लहर की आशंका है। स्कूल खोलने की भी तैयारी है। उम्मीद ये भी जताई जा रही है कि तीसरी लहर में प्रभाव बच्चों पर ज्यादा होगा। कई राज्यों में बाढ़ के बावजूद टीकाकरण का काम तेजी से चल रहा है, क्योंकि सरकार से लेकर आम जनमानस तक यह बात समझ आ गई है तो टीकाकरण ही बचाव है,हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग के सवाल पर भले सरकार,पंचायत और गैर सरकारी संगठनों के स्तर पर लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया गया हो लेकिन रोजी रोटी के झंझावतों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न के बराबर है। हालांकि मास्क की आदतें लोगों में पड़ गई है भले ही उसके सही इस्तेमाल को लेकर सजगता नहीं है।


प्रधानमंत्री ने बुलाई बैठक
कुल मिला के कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार दोपहर 3.30 बजे अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में कोरोना की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ तीसरी लहर से निपटने को लेकर चर्चा होगी। ये बैठक इस लिहाज से भी जरूरी है ​क्योंकि गृह मंत्रालय के एक पैनल ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को चेतावनी जारी की है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट (NIDM) के तहत बनाई गई कमेटी ने अक्टूबर में संक्रमण पीक पर पहुंचने की चेतावनी दी है। कमेटी ने इसका बच्चों पर सबसे बुरा असर पड़ने की बात कही है और अभी से तैयार रहने का अलर्ट दिया है।

पैनल ने अस्पतालों में पूरी तैयारी रखने की हिदायत दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में बच्चों के लिए मेडिकल सुविधाएं, वेंटीलेटर, डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, एंबुलेंस, ऑक्सीजन की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए। माना जा रहा है कि तीसरी लहर का ज्यादातर असर बच्चों के साथ युवाओं पर पड़ेगा। ऐसे में इन्हें अभी से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
क्या है तैयारी
स्वाभाविक है अगस्त गुजरने को है। हम सितंबर के मुहाने पर खड़े हैं और अक्टूबर आने में वक्त नहीं लगेगा। यदि जरूरत और तैयारियों के बीच के गैप की बात करें तो अंतर साफ दिखाई देता है। सूरते हाल ये है कि अभी बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी है, ऐसे में इनके संक्रमण के खतरे को लेकर विचार विमर्श किया गया है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि बच्चों में गंभीर संक्रमण का खतरा भले ही ना हो लेकिन वे संक्रमण को अन्य लोगों तक फैला सकते हैं।
बड़ी संख्या में बच्चों का टीकाकरण करने की जरूरत
बच्चों के लिए वैक्सीनेशन शुरू करने की तैयारी चल रही है। कमेटी ने भी बड़ी संख्या में बच्चों का टीकाकरण करने की जरूरत बताई है। साथ ही कोविड वार्ड को फिर से इस आधार पर तैयार करने की सलाह दी है, जिससे बच्चों के गार्जियन को भी साथ रहने की इजाजत हो।

 

सितंबर के अंत तक शुरू होगा तीसरी लहर का असर 
रिपेार्ट के मुताबिक, सितंबर के अंत तक तीसरी लहर अपना असर दिखाना शुरू कर देगी। वहीं, अक्टूबर में देश में हर दिन 5 लाख से ज्यादा मामले सामने आ सकते हैं। करीब दो महीने तक देश को फिर से परेशानी झेलनी पड़ सकती है। कई राज्यों में लॉकडाउन की जरूरत भी पड़ेगी।


डिमांड और आपूर्ती में काफी गैप
साफ है डिमांड और आपूर्ती में काफी गैप है। इस बीच कई राज्यों में बाढ़ के हालात भी बावजूद इसके टीकाकरण की गतिविधियां चलाये रखने के लिए स्वास्थ्य महकमा हर संभव प्रयास कर रहा है। इतना ही नहीं कई राज्यों में अब धीरे-धीरे भारत के अलग-अलग राज्यों में स्कूल खुल रहे हैं। राजधानी दिल्ली में जहाँ 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए आंशिक रूप से स्कूल खोले गए हैं, वहीं उससे सटे सबसे ज़्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में 50 फ़ीसदी उपस्थिति के आधार पर 16 अगस्त से कक्षा नौ से 12वीं के लिए स्कूल खोले गए हैं। कक्षा 6 से 8 तक के स्कूलों के आज खुल जाने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कोरोना संक्रमण में आई कमी को देखते हुए कक्षा 1 से 5 तक के स्‍कूलों को फिर से खोलने का फैसला किया है। प्रदेश में कक्षा 6 से 8 तक की ऑफलाइन क्‍लासेज 24 अगस्‍त से खुलेंगी जबकि कक्षा 1 से 5 तक के लिए स्‍कूल 1 सितंबर से खोले जाएंगे।

अन्य राज्यों जैसे हरियाणा, पंजाब, बिहार और महाराष्ट्र में जुलाई महीने से स्कूल खोलने के आदेश दिए गए थे, लेकिन कई एहतियाती क़दमों के साथ, जैसे इलाक़े में कोरोना के मामले नहीं होने चाहिए, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होना चाहिए और बच्चों की उपस्थिति सिर्फ 50 फीसदी रख सकते हैं।
साफ है तीसरी लहर की आशंका भी है, कुछ हद तक सजगता भी हालांकि प्रधानमंत्री की बैठक के बाद क्या दिशा निर्देश मिलता है उसके आधार पर ही यह तय होगा कि कोरोना के तीसरी लहर की आशंका और तैयारियों के बीच के गैप को किस तरह पाटने में कितनी कामयाबी मिलेगी और नौनिहालों का जान बचाया जा सकेगा। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय, कैबिनेट सचिव और नीति आयोग भी शामिल होगा।

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