
नई दिल्ली: भारत में आज भी लोगों को दूषित पानी पीना पड़ रहा हैं आज़ादी के इतने वर्ष के बाद भी स्वच्छ पानी की समस्या की खबरें दिन प्रतिदिन सुनाई पड़ती है। इस क्रम में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में दरभा ब्लॉक के एक गांव के 15 से अधिक लोग दूषित पानी पीने से गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं। कई ग्रामीणों को तोकापाल स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है, जबकि अन्य का गांव में ही इलाज चल रहा है। घटना चिरपाल गांव के जूनापानी पारा की है, जहां स्थानीय लोग पिछले कई दिनों से कुएं का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। इसके तुरंत बाद एक-एक करके ग्रामीण बीमार पड़ने लगे। स्थिति बिगड़ने पर स्वास्थ्य विभाग ने गांव में चिकित्सा शिविर लगाया और 10 से अधिक प्रभावित व्यक्तियों का मौके पर ही इलाज शुरू कर दिया। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार प्रदूषित पानी पीने के कारण ग्रामीण उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं।
पानी के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं और प्रारंभिक रिपोर्ट में हानिकारक बैक्टीरिया उपस्थिति का पता चला है। ग्रामीणों ने बताया कि हालांकि क्षेत्र में दो हैंडपंप और दो कुएं हैं, लेकिन हैंडपंप काम नहीं कर रहे हैं। कोई विकल्प न होने के कारण उन्हें कुएं के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। हाल ही में हुई बारिश के कारण आस-पास की बजरी खदानों से निकलने वाले पानी ने कुएँ को प्रदूषित कर दिया है, जिससे यह बीमारी फैल गई है।उनका कहना है कि उनके पास दूषित पानी पीने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था।
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जनता दूषित पानी पीने को मजबूर
इस घटना ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग की कार्यप्रणाली को गंभीर जांच के दायरे में ला दिया है। सरकारी रिपोर्टों के अनुसार चिरपाल गांव में जल जीवन मिशन का काम 100% पूरा हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। जबकि बुनियादी ढांचे, पानी की टंकियों और पाइपलाइनों को स्थापित किया गया है और कनेक्शन लगाए गए हैं, पानी की आपूर्ति के लिए कोई बोरवेल नहीं खोदा गया है। इस योजना से लक्षित लाभार्थियों की तुलना में ठेकेदारों और अधिकारियों को अधिक लाभ हुआ है, जिससे ग्रामीण अभी भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है; बस्तर के लगभग सभी ब्लॉकों के कई गांवों में जल जीवन मिशन के तहत काम अधूरा है और इस कारण से लोगों को हैंडपंप से फ्लोराइड युक्त पानी या कुओं से प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
