इंसान हो या मवेशी…सर्दी सबको करती है प्रभावित, बचाव के लिए लगवायें टीके

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वर्षा वर्मा

नई दिल्ली:

बरसात का मौसम अब समाप्ती की ओर है, सर्दी दस्तक देने ही वाली है। लेकिन मौसम में अचानक बदलाव आने से इसका असर इंसान के साथ-साथ मवेशियों पर भी पड़ता है। खास कर भीषण सर्दी पड़ने पर बकरियों का स्वास्थ्य सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। बकरियों के बीमार होने के कारण मेमने भी बीमार हो जाते है। ऐसे में जरूरी है कि सभी बकरी पालक किसान सर्दी का मौसम शुरू होने से पहले ही बकरियों को बचाने के लिए उसे टीके लगवा दें। इससे बकरियों में फैलने वाली अन्य बीमारियों को रोका जा सकता है।

 

सर्दी में जरूर लगाएं ये टीके
विशेषज्ञों की राय है कि सर्दी के मौसम में बकरियों के लिए पीपीआर बहुत ही खतरनाक बीमारी है। इस रोग से संक्रमित बकरियों की मौत तक हो जाती है। क्योंकि पीपीआर एक तरह की विषाणु जनित बीमारी है। इसे आम बोलचाल की भाषा में बकरियों का प्लेग भी कहा जाता है। सर्दी शुरू होते ही बकरियों को पीपीआर टीका लगवा दें। बड़ी बात यह है कि यह संक्रमण एक बकरी से दूसरी बकरियों में तेजी से फैलता है। अगर आप पशुपालक हैं और अपनी बकरियों को पीपीआर का टीका नहीं लगवाया है तो सर्दी शुरू होते ही लगवा लें।

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चेचक भी है जानलेवा रोग
पीपीआर के अलावा चेचक भी बकरियों के लिए जानलेवा रोग है। यह भी सर्दी के मौसम में ही बकरियों के बीच फैलता है। चेचक होने पर बकरियों के शरीर पर चकते से बन जाते हैं। इसलिए भीषण सर्दी शुरू होने से पहले ही चेचक का टीका भी बकरियों को लगवा दें। ऐसे पशु चिकित्सकों का कहना है कि बकरियों के बीमार पड़ने पर उनके लक्षण से रोग के पहचान कर सकते हैं। अगर बकरी को दस्त हो रहे हैं। तो वे प्लेग से ग्रसित हैं। वहीं निमोनिया होने पर उनकी नाक बहने लगती है। साथ ही तेज बुखार भी आता है। इससे उनकी मौत भी हो सकती है। खास बात यह है कि बकरियों से ये बीमारी उनके बच्चों में फैल जाती हैं।

सरकारी केन्द्रों पर मिलेंगे मुफ्त टीके
इसी तरह चेचक होने पर भी निमोनिया हो जाता है। जिसके बाद तेज बुखार आता है। ऐसे में बकरी चारा खाना छोड़ देती है। वहीं बकरी के बच्चे भी दूध पीना कम कर देते हैं। इसलिए आप बकरियों को प्लेग और चेचक के टीके लगवाते रहें। क्योंकि बकरियों के टीके बहुत ही सस्ते आते हैं। यहां तक सरकारी केन्द्रों पर ये कीटे पशुपालकों को मुफ्त में दिए जाते हैं। अगर समय रहते टीके लगवा देते हैं। तो जाहिर है कि आप बकरियों के बीमार पड़ने पर होने वाले खर्च से बच जाएंगे।

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