भोंडसी के कुटिया के वासी चंद्रशेखर

आज ग्रामविकास की बातें बहुत हो रही हैं। ग्राम उदय से लेकर भारत उदय अभियान चल रहा है। ऐसे में ठहरकर चंद्रशेखर के भारत यात्रा कार्यक्रम और भारत यात्रा केंद्र पर नजर डालने की जरूरत है। चंद्रशेखर ने देश की नब्ज टटोलने के लिए भारत भ्रमण किया और प्रचार व शोहरत से दूर किसान और मजदूरों की समस्या पर हमेशा अग्रणी भूमिका निभाते रहे। गावों की स्वायत्तता और उनका रोजगार और विकास का एक-दूसरे के सहयोग और समन्वय पर टिका परंपरागत ढांचा , जिसे महात्मा गांधी भी रेखांकित करते थे, चंद्रशेखर जी के कहे में भी बार-बार ध्वनित होता था।
चंद्रशेखर की स्पस्ट धारणा थी कि आने वाले वर्षों में पानी, कुपोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समरसता की समस्या विकराल रूप लेने वाली है। चंद्रशेखर ने ये अनुभव भारत यात्रा के दौरान किए थे।

ccccccccccभारत यात्रा का दौर

भारत का एक जन नेता सचमुच भारत को  बहुत नज़दीक से जानने और समझने; उससे एकाकार होने निकला था। कई-कई इलाकों में औरतों का सारा दिन केवल पीने का पानी ढोने में लग जाता है, परंपरागत उद्योग-उद्यम पूरे देश में ढह गए हैं , सार्वजनिक संस्थाएं पूरे देश में मृतप्राय हैं, किसानी सूख गयी है , जंगल उजड़ गए हैं , ग्रामीण जीवन सर्वत्र रीत गया है ; जैसी चीज़ें उन्होंने बहुत नज़दीक से जानी- समझीं।  यह चंद्रशेखर की अपनी यात्रा भर नहीं थी।  जैसे पूरा देश ही उनके साथ-साथ इन सारी बातों को जानता चल  रहा था। राष्ट्र का यह एक गहरा अवगाहन था।  इस यात्रा ने उन्हें लगभग अर्ध देवता की भी छवि दे दी थी।  कई-कई इलाकों में लोग अपने बच्चों को उनसे आशीर्वाद दिलाने लाते।  कई बार तो नवजात शिशु नामकरण के लिए गोद में डाल दिए जाते।

परंदवाडी पुणे भारत यात्रा केंद्र
परंदवाडी पुणे के पास का चंद्रशेखर जी का भारत यात्रा केंद्र है।    लगभग ३५ एकड़ में फैले इस केंद्र को कभी समाजसेवा और ग्रामीण विकास का बहुत महत्त्वपूर्ण केंद्र बनाने की कोशिशें हुई थीं।  जल संरक्षण , सिंचाई, वृक्षारोपण, रेशम बनाने, मत्स्यपालन, शीप फार्मिंग , ग्रामीण स्वास्थय आदि के कई कार्यक्रम यहां से शुरू किये गए थे।  १९८३ में जब केंद्र के लिए जमीन खरीदी गयी तब यह पूरा इलाका इतना अविकसित था कि खाना भी कहीं पास में नहीं मिलता था। पानी तो कई किलोमीटर दूर से लाना पड़ता था।  कई बार तो यहां चंद्रशेखर जी को भी भूखे ही रहना पड़ा था।  सारी जमीन उन्होंने खुद समतल  कराई।  खुद खड़े हो कर तालाब खुदवाया। पास की पहाड़ियों पर खुद से १० लाख पेड़ लगवाये । कभी प्लांटेशन के लिए लगभग आधे महाराष्ट्र में यहां से पौधे ले जाए जाते थे।

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भोंडसी भारत यात्रा केंद्र
गुडग़ांव जिला मुख्यालय से 12 किलोमीटर की दूरी पर अरावली पहाड़ी की गोद में स्थित है भारत यात्रा केन्द्र का आश्रम। यह आश्रम भोंडसी गांव में है।  भोंडसी गांव पंचायत के निमंत्रण पर चंद्रशेखर ने भोंडसी में भारत यात्रा केंद्र बनाने का फैसला 2 अप्रैल 1984 को किया। तब वह स्थान काफी उजाड़ था। वहां झाड़झंखाड़ ही था। भुवनेश्वरी में भारत यात्रा केंद्र ग्रामीण विकास का एक उदाहरण पेश करने के लिए बना। सालों की मेहनत से चंद्रशेखर ने इसे विकसित करवाया। चंद्रशेखर लिखते हैं शुरूआती दिनों में यहां झिंगुर की आवाज भी सुनाई नहीं देती थी। अब तो पूरे पंख फैलाए दर्जनो मोर दिखाई देते हैं। सैंकड़ो फलदार पेड हैं। कुल 6817 पेड़। सैकड़ों आवले के पेड़ है। आम के पेड़ हैं। एक बड़ गोशाला भी है।

स्वराज की मूल परिकल्पना भी उनकी इस ग्राम दृष्टि में सहज समाहित थी।  वे बागवानी पसंद करते थे। भोंडसी आश्रम के एक-एक पेड़ उनके लगाये और सींचे हैं। लेकिन आज यह वीरान है।  लेकिन ग्राम ऋषि के न रहने से चहुंओर वीरानी है। ऐसा लगता है चंद्रशेखर के साथ यहां की परिकल्पना भी चली गयी।

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