
जयराम विप्लव,युवा नेता भाजपा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने गांधीजी , दीनदयालजी और जयप्रकाशजी के स्वप्न को साकार करने की दिशा में पहल शुरू कर दी है । ” ग्रामोदय से भारत उदय ” की सोच के साथ पंचायती राज व्यवस्था को विकास के लिए छप्पर फाड़ कर आर्थिक मदद देने की योजना है । ऐसे में पंचायत के प्रतिनिधियों की भूमिका अहम हो जाती है । विशेष रूप से मुखिया / प्रधान की जो सीधे विकास कार्य को संचालित करते हैं । जनता को प्रतिनिधि चुनते समय ईमानदार , स्वच्छ और जिम्मेदार व्यक्ति को ही चुनना चाहिए । केवल वोट देकर
अपने कर्तव्यों की इतिश्री नहीं समझनी चाहिए बल्कि 5 वर्ष निरन्तर प्रतिनिधि से संवाद और दबाव बनाये रखना चाहिए । ग्राम सभा या आम सभा में जनता स्वयं की भागीदारी सुनिश्चित कर ले तो पंचायतों की योजनाओं में हो रही अधिकांश गड़बड़ियां सुधर सकती हैं । अपने अधिकार के साथ-साथ जागरूक नागरिक का कर्तव्य भी हमें निभाना होगा तभी प्रधानमंत्री की पहल भी जमीन पर उतरेगी । अन्यथा पैसा केंद्र के ख़ज़ाने से निकलेगा लेकिन जमीन पर आते-आते एक बड़ा हिस्सा गायब हो जायेगा । आप इन पैसों को भी अपने खून पसीने की कमाई जिस दिन समझने लगेंगे आपका कर्तव्य स्वतः जग उठेगा ।
बिहार में पंचायत चुनाव चल रहा है । गली-गली में नेता पैदा हो रहे हैं । वार्ड से लेकर मुखिया और जिला परिषद सदस्य तक जनप्रतिनिधि बनने की होड़ है । वोट के लिए नोट, वादे , नारे ,पर्चे सब तैयार है लेकिन उम्मीदवारी की अर्जी लगाये जनअदालत में घूमने वाले 99% लोग प्रतिनिधि के कर्तव्यों या अधिकारों के प्रति उदासीन हैं ।
उदाहरण देखिये , पूरे राज्य में महज 77 पंचायतें ही खुले में शौच से मुक्त बन पाया । जबकि बाकि पंचायतों को भी उतना ही संसाधन है लेकिन जिन प्रतिनिधियों ने जनता से मिलकर इच्छाशक्ति दिखाई वो सफल रहे ।
दरअसल , पंचायतों का निर्माण सत्ता के विकेंद्रीकरण और विकास को तेजी से जमीनी स्तर पर ले जाने के उद्देश्य से हुआ था लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहा है । ऐसे में सभी 77 पंचायत के प्रतिनिधियों विशेष कर मुखिया और जनता को मेरा साधुवाद । उनको उदाहरण मानकर बचे हुए क्षेत्र के लोग भी खुद की खुदी को बुलन्द करें । अनुकरण हो अच्छे काम का । हमारे गृह क्षेत्र से सटे 2 पंचायत छात्रहार और असरगंज भी इस सूची में है जो गर्व का विषय है ।
