पत्तल, दौना तथा पंगत वाली संस्कृति, प्लास्टिक मुक्त भारत

रणविजय निषाद, पर्यावरणविद वर्त्तमान में वैश्विक स्तर पर अपने स्वास्थ्य को लेकर लोकमानस चिन्तित हैं। प्राचीन संस्कृति में आमजनमानस और बुद्धजीवी प्रकृतिप्रेमी हुआ करते थे। शादी-विवाह या अन्य कार्यक्रमों में हम इन्ही पेड़-पौधों के पत्तियों, लकड़ी, छाल आदि का प्रयोग करते थे। नीम की दातून का प्रयोग दाँतों की सफाई के लिए किया करते थे। …

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