मनीष अग्रहरि
अब उत्तर प्रदेश में बुंदेलखण्ड की तर्ज पर सभी डार्क जोन जिलों में खेत तालाब योजना लागू कर दी गई है। इससे गावों में सिंचाई के साथ ही पेयजल की समस्या भी हल हो जाने की उम्मीद है। बुंदेलखंड में खेत तालाब योजना के अच्छे परिणाम देखने में आए है। खेतो पर तालाब खुदवाने को शासन स्तर पर अनुदान भी मिलेगा। इसकी विस्तृत कार्ययोजना 12 जून तक शासन फाइनल कर देगा।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं पौद्योगिकी विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हुए इलाहाबाद एवं कानपुर मंडल की खरीफ गोष्ठी से शिरकत कर लौटे इलाहाबाद के उपसंभागीय कृषि प्रसार अधिकारी सतेन्द्र नाथ तिवारी ने पंचायत खबर को बताया कि ‘ खेत-तालाब‘ योजना लागू कर जल संरक्षण किया जाएगा ताकि भविष्य में भूगर्भ जलस्तर को बेहतर किया जा सके।
योजना को गंभीरता से लेते हुए सूबे के कृषि उत्पादन आयुक्त प्रवीर कुमार ने सभी जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओं)से कही कोई दिक्कत आने पर तत्काल समस्या को निस्तारित करने का फरमान भी जारी कर दिया है। अब देखना यह है कि यह योजना कागज से दूर धरातल पर कितने सही तरीके से उतरेगी।
क्या है खेत-तालाब‘ योजना:
यह योजना वर्तमान में बुंदेलखण्ड में चल रही है। इसमें किसान अपने खेतो में नालीनुमा क्यारी बनाते है जिसमें जलभंडारण होता है ताकि वह जल भूगर्भ में चला जाए और भूगर्भ जलस्तर एक बार फिर से बढ़ जाए। योजना के तहत अधिकतम एक लाख पाच हजार तक के लागत वाले ‘खेत-तालाब‘ वाले प्रोजेक्ट के लिए 50 फीसदी अनुदान का प्राविधान रखा गया है।
क्या है डार्क जोनः
जहा भूगर्भ जल का अतिदोहन हो और भूगर्भ जलस्तर खतरे के स्तर तक गिर जाए। उन क्षेत्रो को डार्क जोन कहा जाता है। वहां भूगर्भ जल निकालने की सारी योजनाओं को रोक दिया जाता है ताकि भूगर्भ जल स्तर को और गिरने से रोका जा सके।



