देश की कृषि शिक्षा वैश्विक मानकों के अनुरूप होने चाहिए : राष्‍ट्रपति

0
611
The President, Shri Pranab Mukherjee releasing the publication at the 54th Convocation of Indian Agricultural Research Institute (IARI), in New Delhi on February 05, 2016. The Union Minister for Agriculture and Farmers Welfare, Shri Radha Mohan Singh and other dignitaries are also seen.

राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्‍थान (आईएआरआई) के 54वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत के पास विश्‍व के भूमि संसाधन का केवल तीन प्रतिशत एवं जल संसाधनों का पांच प्रतिशत है। फिर भी, भारतीय कृषि प्रणाली विश्‍व की आबादी के 18 प्रतिशत की सहायता करती है। खाने के लिए आयातित अनाज पर निर्भर रहने वाले देश से खाद्यान्‍न के अग्रणी निर्यातक देश के रूप में रूपांतरण मुख्‍य रूप से आईएआरआई जैसे प्रमुख संस्‍थानों में वैज्ञानिक विकासों के कारण संभव हो पाया है। इस संस्‍थान ने हरित क्रांति का उदभव करने एवं हमारे देश में जीवंत कृषि क्षेत्र का निर्माण करने में उल्‍लेखनीय योगदान दिया है। उन्‍होंने राष्‍ट्र के प्रति इसकी समर्पित सेवा के लिए आईएआरआई की सराहना की।

The President, Shri Pranab Mukherjee presented the medals to the students at the 54th Convocation of Indian Agricultural Research Institute (IARI), in New Delhi on February 05, 2016. The Union Minister for Agriculture and Farmers Welfare, Shri Radha Mohan Singh is also seen.
The President, Shri Pranab Mukherjee presented the medals to the students at the 54th Convocation of Indian Agricultural Research Institute (IARI),

राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारे देश की कृषि शिक्षा को अनिवार्य रूप से वैश्विक मानकों के अनुरूप होने चाहिए। इसके लिए हमें अत्‍याधुनिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे के साथ अधिकार संपन्‍न सक्षम संकाय के एक बडे समूह का सृजन करना चाहिए। शिक्षकों, छात्रों एवं व्‍यवसायियों का एक मजबूत नेटवर्क अच्‍छे कृषि प्रचलनों को प्रयोगशालाओं से खेतों तक विकेंद्रित करने में सहायक होगा। यह हमारे संस्‍थानों में अनुसंधान एवं प्रौद्वोगिकी विकास को प्रोत्‍साहित करने के लिए किसानों की समस्‍याओं के बारे में सुझाव भी मुहैया कराएगा। राष्‍ट्रपति ने कहा कि कृषि संस्‍थान वे केंद्र बिंदु हैं जिन पर हमारे कृषि क्षेत्र की सफलता एवं लोगों का कल्‍याण निर्भर करता है। उनके प्रदर्शन का बैरोमीटर उनके उत्‍पादों की गुणवत्‍ता है।

केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा अध्यक्ष, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) राधा मोहन सिंह ने कृषि में आधुनिक तकनीकों के विकास और उनके निरंतर बढ़ते प्रयोग के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सराहना की है। उन्होंने कृषि वैज्ञानिक समुदाय की कृषि से संबंधित बाधाओं को दूर करने प्रतिबद्धता के लिए भी तारीफ की है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने कृषकों की आय बढ़ाने में जैविक कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी जोर दिया। इस क्रम में उन्होंने मृदा स्वास्थ्य की तुलना मानव स्वास्थ्य से करते हुए अन्य राज्यों में भी सिक्किम की जैविक खेती के मॉडल को अपनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

The President, Shri Pranab Mukherjee presented the medals at the 54th Convocation of Indian Agricultural Research Institute (IARI), in New Delhi on February 05, 2016. The Union Minister for Agriculture and Farmers Welfare, Shri Radha Mohan Singh is also seen.
The President, Shri Pranab Mukherjee

हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री ने सिक्किम को जैविक प्रदेश घोषित किया था। मंत्री महोदय ने इस चुनौती भरे क्षेत्र में नई तकनीकियों के विकास के लिए गंगटोक, सिक्किम में राष्ट्रीय जैविक कृषि अनुसंधान केन्द्र की शुरूआत किए जाने की संस्तुति की थी। माननीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री आईसीएआर की 87वीं वार्षिक आम बैठक को एनएएससी, संबोधित कर रहे थे। राधा मोहन सिंह ने अपने अभिभाषण में कृषकों के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड के विकास से संबंधित उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्व मृदा दिवस (5 दिसम्बर, 2015) के आयोजन के अवसर पर 607 कृषि विज्ञान केन्द्रों और आईसीएआर के 80 संस्थानों/ कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा लगभग 2,50,000 मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या में काफी वृद्धि की गई है तथा कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित करने हेतु संबंधित सुविधाओं को भी सुदृढ़ बनाया जा रहा है। कृषि मंत्री ने इस क्रम में किसान कल्याण के लिए शुरू की गई विभिन्न योजनाओं और पहलों के बारे में भी विस्तारपूर्वक चर्चा की। इनमें फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन तथा दलहन एवं तिलहन फसलों पर प्रौद्योगिकी मिशन का खास तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने आईसीएआर तथा इसके शैक्षणिक और अनुसंधान संस्‍थानों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि क्‍लेरियस सेराटोब्राशियम स्‍पे.नॉव. नामक मछली की एक नई प्रजाति की खोज भारत म्‍यामांर सीमा के दलदली स्‍थानों से की गई है। उन्‍नत किस्‍मों एवं संकर प्रजातियों का विकास एवं उनकी गुणवत्‍तापूर्ण बीजों की उपलब्‍धता फसलों की उत्‍पादकता को बढ़ाने के लिए सबसे अहम एवं महत्‍वपूर्ण इनपुट है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्‍यमंत्री मोहनभाई कल्याणजी भाई कुंडारिया, ने कहा कि कृषकों तक संबंधित जानकारियों एवं सूचनाओं खासतौर पर नई योजनाओं से संबंधित का प्रसार त्वरित रूप से सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसान कल्याण हमारा प्रमुख ध्येय होना चाहिए क्योंकि देश की खाद्य सुरक्षा कृषकों पर निर्भर है। इस अवसर पर गणमान्य व्‍यक्तियों द्वारा गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयम्बटूर द्वारा विकसित मृदा नमी संकेतक तथा आईसीएआर, नई दिल्ली द्वारा विकसित लगभग शून्य इरुसिक अम्ल वाली सरसों की किस्म ‘पूसा मस्टर्ड-30’ के बीज और तेल को भी जारी किया। इस समारोह में नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चन्द भी उपस्थित थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here