पंचायत खबर डेस्क
बजट को लेकर देश में अलग तरह का उत्साह होता है। कुछ आशंका भी होती है और कुछ कौतूहल भी। बजट से न सिर्फ सरकार के रीति नीति का पता चलता है बल्कि देश के अलग—अलग लाभ समूह के भविष्य का निर्धारण भी होता है। ऐसे में स्वाभाविक है भारत का गांव और किसान कौतूहल के साथ देश के वित्त मंत्री की ओर देख रहा है।
मनरेगा में बजट आवंटन बढ़ने की संभावना
यूपीए के शासन काल में शुरू हुए मनरेगा को गाजे—बाजे के साथ जारी रखने संबंधी प्रधानमंत्री के बयान और आगे चलकर मनरेगा दिवस पर मनरेगा को एतिहासिक योजना बताने के बाद अब भाजपा एनडीए सरकार इस वर्ष के बजट में मनरेगा योजना को विस्तार दे सकती है। सरकार आगामी बजट में खेती को प्राथमिकता देने और लघु सिंचाई परियोजनाओं को मजबूत बनाने का मन बनाती हुई दिख रही है। ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि सरकार के बजट में मनरेगा पर फोकस होगा।
इसके साथ ही मनरेगा के तहत पांच लाख तालाब तैयार कर और दूसरे जल स्रोतों को सुधाकर सिंचाई सुविधाओं को बढ़ाया जाएगा और इसके… लिए मनरेगा का आठ हजार करोड़ रुपये का उपयोग हो सकता है। वहीं दो लाख सोलर पंप से एमएनआरई से सब्सिडी और सस्ता कर्ज देने के बारे में सोचा जा सकता है। सरकार मनरेगा को ग्रामीण क्षेत्र में आम जन के रोजगार का बेहतर जरिया मानती है। कहा गया है चालू वित्त वर्ष में मनरेगा के तहत 57 प्रतिशत रोजगार महिलाओं को दी गई। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 3.63 करोड़ परिवार को 134.96 करोड़ व्य क्ति दिवस रोजगार उपलब्धा कराया गया। इसमें 76.81 व्यक्ति दिवस यानि 57 प्रतिशत रोजगार महिलाओं को उपलब्ध हुआ। सरकार आगामी बजट में मनरेगा के आवंटन को बढ़ा सकती है ताकि अधिक रोजगार सृजन हो।
कृषि पर हो सकता है खासा जोड़
वित्त मंत्री अरूण जेटली सोमवार को संसद में जब एनडीए सरकार का तीसरा बजट (2016-17) पेश करेंगे तो उसमें सबसे अधिक जोर कृषि और ग्रामीण विकास पर देखने को मिल सकती है। ..इसकी वजह है बजट के पहले कृषि क्षेत्र को पटरी पर लाने की एक बड़ी एक्सरसाइज जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर की गयी है। कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए पर बजट को लेकर भारत सरकार के 12 सेक्रेटरी जिसमे एग्रीकल्चर सेक्रेटरी सहित 12 सचिव शामिल रहे के जरिये बड़े बदलाव की तैयारी दिख रही है। इसके संकेत चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यन द्वारा तैयार और वित्त मंत्री द्वारा शुक्रवार को संसद में पेश किये गए आर्थिक सर्वे में दिखा ।
संकेत साफ है की सरकार के बजट में सिंचाई के लिए फंड, छोटे किसानों को कर्ज, मनरेगा का कृषि विकास में उपयोग, लैंड रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन, बत्तिदार किसनो को कर्ज की सुविधा और मार्केटिंग रिफार्म्स के साथ ही टेक्नोलॉजी के उपयोग पर जोर साफ दिखेगा।
जीएम टेक्नोलॉजी को सपोर्ट ग्रुप ने साफ किया है कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए बेहतर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के साथ ही उत्पादकता बढ़ाने के लिए जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम).टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की जरूरत है।
सिचाई पर खासा जोर
बजट में सबसे अधिक जोर पर ‘ड्रॉप मोर क्रॉप’ पर रह सकता है। खास बात यह है कि इस ग्रुप से अधिकांश साल्यूशन ऐसे हैं जिन पर सरकार को अधिक खर्च नहीं करना है क्योंकि प्रधानमंत्री ने साफ किया था कि ऐसे उपाय सुझाएं जिनका बजट पर ज्यादा दबाव न पड़े। इसलिए सिंचाई के लिए इसका सबसे बड़ा सुझाव एक्सीलरेटेड इरीगेशन बेनेफिट प्रोग्राम (एआईबीपी) पर है। इसके तहत 29 हजार करोड़ के निवेश की जरूरत वाले 46 प्रोजेक्ट पर फोकस किया गया है जो पहले साल में 11 लाख हेक्टेयर और उसके बाद तीन साल में 34 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचित कर सकेंगे। इसका हल ग्रुप ने नाबार्ड में ढूढ़ लिया है। इसलिए बजट में नाबार्ड द्वारा सिंचाई परियोजनाओँ के लिए बांड जारी करने की घोषणा की पूरी संभावना है। यह पैसा राज्य सरकारों को 10 से 15 साल के लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत मिल जाएगा।
ऐसी दक्षतापूर्ण सिंचाई प्रौद्योगिकियों के उपयोग से जो ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई की तरह आर्थिक एवं तकनीकी दोनों दृष्टियों से दक्ष हों, पानी की दक्षतापूर्ण उपयोग में सुधार किया जा सकता है, श्रम लागतों और बिजली की खपत को कम करके उत्पादन की लागत घटाई जा सकती है। अखिल भारतीय स्तर पर पानी की उत्पादकता बहुत कम है, इसे टैपिंग, कटाई और रिसाइक्लिंग पानी के उपयोग, खेती में दक्षतापूर्ण जल प्रबंधन पद्धतियों को अपनाकर, लघु सिंचाई और अपशिष्ट जल एवं संसाधन संरक्षण प्रौद्योगिकियों के उपयोग के जरिये बढ़ाया जाना चाहिए। भारत में प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की समग्र सिंचाई दक्षता 38 फीसदी के आसपास रहने का अनुमान है। सतह सिंचाई प्रणाली की दक्षता को 35-40 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 60 प्रतिशत तक तथा भूमिगत जल की दक्षता को 65-70 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 75 प्रतिशत तक सुधारा जा सकता है।

