बिहार पंचायत चुनाव: नियुक्त होंगे प्रशाषक या बढ़ेगा मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल..असमंजस में सरकार

मंगरूआ

पटना: बिहार पंचायत चुनाव को लेकर उहापोह की स्थिती है। कोरोना के पहली लहर में पंचायत चुनाव को लेकर विभागीय तैयारी समय पर नहीं हो पाई। तो आगे चलकर ईवीएम के कारण और चुनाव आयोग से विभागीय रस्साकस्सी की वजह से चुनाव समय पर संपन्न नहीं हो सके। इन सब से निपट कर जब ऐसा लगा कि पंचायत चुनाव भले ही थोड़े विलंब से हों लेकिन चुनी गई पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने के पहले इसे संपन्न करा लिया जाएगा। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के प्रभाव में ऐसा करना संभव नहीं जान पड़ रहा है और इसका टलना तय है। ऐसे में यह कब तक टाला जायेगा, और यदि चुनाव टला तो पंचायतों से संबंधित दायित्वों के निर्वहन की जिम्मेवारी किसके पास होगी इसको लेकर माथापच्ची जारी है और अलग—अलग कयास लगाए जा रहे हैं। इस बीच पंचायती राज के करीब ढाई लाख प्रतिनिधियों का कार्यकाल 15 जून को खत्म हो जायेगा।                                                          बिहार पंचायत चुनाव
सहयोगी दल कार्यकाल विस्तार के पक्ष में
बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगातार पेच फंसता जा रहा हैै राज्य में करीब ढाई लाख जनप्रतिनिधियों के लिए निर्धारित पंचायत आम चुनाव नहीं हुआ। ऐसे में सियासी दलों यहां तक की सरकार के सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वर्तमान हालात में मौजूदा पंचायत प्रति​निधियों के कार्यकाल को आगामी चुनाव संपन्न होने तक बढ़ा दिया जाए। इस मामले को लेकर विकासशील इंसान पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुकेश सहनी ने हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने सरकार से गुजारिश की है। उनका कहना है कि राज्य इन दिनों कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में है। जिस वजह से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। चुनाव होंगे या नहीं इसे लेकर फिलहाल अनिर्णय की स्थिति है। अनिश्चितता की इसी स्थिति के बीच मुकेश सहनी ने कहा कि डिजिटल सिग्नेचर के वजह से पंचायत में कार्य प्रभावित हो रहा है। ऐसे में यदि पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल को नहीं बढ़ाया गया तो विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। सरकार को पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल जब तक चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं होती तब तक के लिए बढ़ाना चाहिए।

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सहयोगी दल भाजपा भी कार्यकाल विस्तार के पक्ष में
भाजपा की तरफ से भी ऐसी मांग रखी गई है। भाजपा सांसद रामकृपाल यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने सीएम से कहा कि 15 जून को पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों को पद पर बने रहने दें। कोरोना महामारी के कारण बिहार पंचायत चुनाव 2021 फिलहाल टलने की स्थिति में पहुंच गया है। चुनाव नहीं होने की स्थिति में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के सामने संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा। ऐसे में पंचायत प्रतिनिधियों के खत्म हो रहे कार्यकाल के बाद जब तक चुनाव नहीं हो जाता और नए जनप्रतिनिधि नहीं आ जाते, पुराने जन प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग उन्होंने की है।                                                                                    ………….बिहार पंचायत चुनाव
रामकृपाल का कहना है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की अधिकतर योजनाएं जो पंचायतों के विकास से संबंधित हैं, उनके कार्यान्वयन में भी प्रशासनिक संकट पैदा होने की स्थिति है। वैसी अपरिहार्य स्थिति में बिहार सरकार को किसी विधि सम्मत फैसला लेना होगा, जिससे त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था प्रभावी ढंग से गांव के विकास में पहले की तरह कार्य करती रहे। उन्होंने यह सुझाव दिया है कि पंचायती राज व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधियों को प्राप्त अधिकार, शक्ति और कर्तव्य को बिहार पंचयात चुनाव 2021 के होने तक विस्तारित किया जाए। भाजपा के एमएलसी रजनीश कुमार ने सरकार से आग्रह किया है कि चुनाव संपन्‍न होने तक मौजूदा जनप्रतिनिधियों को ही काम करने का मौका दिया जाए।                                                                                      ………….बिहार पंचायत चुनाव
आगे की राह
राज्य में त्रिस्तरीय पंचायतों का कार्यकाल 10 से 30 जून तक समाप्त हो जायेगा. पंचायत प्रतिनिधियों का जून 2016 में विभिन्न तिथियों को शपथ ग्रहण किया गया था. ऐसे में जिन प्रतिनिधियों का कार्यकाल 10 जून से 30 जून के बीच पूरा हो जायेगा, वहां की पंचायतें स्वत: भंग हो जायेंगी।

राज्य में फिलहाल 8000 ग्राम पंचायतें हैं, जहां पर आठ हजार मुखिया व सरपंच का कार्यकाल समाप्त हो जायेगा। इसी प्रकार से राज्य में एक लाख 10 हजार वार्डों में निर्वाचित वार्ड सदस्य और ग्राम कचहरी के पंचों का कार्यकाल भी समाप्त हो जायेगा. इसके साथ ही पंचायत समिति के 11490 और जिला परिषद सदस्य के 1161 पदों का कार्यकाल भी 30 जून तक समाप्त हो जायेगा।


क्या अध्यादेश लाएगी सरकार या नियुक्त किये जाएंगे प्रशासक
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार इस मसले पर अध्यायदेश ला सकती है। सरकार इस विषय पर विधि विशेषज्ञों की राय लेकर आगे का रास्ता तय करन चाहती है। क्योंकि ऐसी परिस्थिति से निबटने के लिए पंचायती राज कानून में कोई ठोस प्रावधान का उल्लेख नहीं है। कोरोना की वजह से विधानसभा सत्र भी बुलाना संभव नहीं होगा, जहां से पंचायतों के कार्यकाल को बढ़ाने से संबंधित कोई कानून पास कराया जा सके। इस पर सरकार द्वारा 10 से 15 दिनों में ठोस निर्णय ले लिया जायेगा। अध्यायदेश लाने के पहले इसे कैबिनेट से पारित किया जायेगा। इसके बाद इस पर राज्यपाल के अंतिम हस्ताक्षर होंगे और यह अध्यायदेश लागू हो जायेगा। …..बिहार पंचायत चुनाव
बंटी हुई है राय
इस बात की ज्यादा संभावना व्यक्त की जा रही है कि पंचायतों के मौजूदा जन प्रतिनिधियों को कार्यकाल को चुनाव तक के लिए बढ़ा दिया जाये। हालांकि, कुछ विभागीय लोग यह भी संभावना व्यक्त कर रहे हैं कि जन प्रतिनिधियों के कार्यकाल समाप्त होने पर इसे भंग करके उनके अधिकार संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया जाये। जिस तरह विधानसभा के कार्यकाल की समाप्ति पर रास्ट्रपति शासन लागू हो जाता है। वैसे ही पंचायती राज के भी कार्यकाल को विस्तार देने का नियम नही है। इसलिए ऐसा लगता है कि 15 जून के बाद के कार्यो का जिम्मा डीडीसी , बीडीओ और पंचायत सचिव देखेंगे। जिला परिषद का संचालन जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक ही करेंगे।

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क्या कहते हैं मंत्री
पंचायती राज विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण मसले पर राज्य सरकार गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है। इससे जुड़े सभी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया जा रहा है. जल्द ही उचित निर्णय ले लिया जायेगा. कोरोना के हालात को देखते हुए फिलहाल चुनाव कराना संभव नहीं लग रहा है।
कब तक हो सकते हैं पंचायत चुनाव
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि आगामी माह में यदि कोरोना का कहर कम होता है और बाढ़ बरसात का महीना बीतता है उसके बाद जिंदगी पटरी पर लौट जाएगी। ऐसे में राज्य सरकार उसके बाद पंचायत का चुनाव हो सकता है। पंचायत चुनाव के अक्टूबर नवम्बर तक हो सकते है।                                                                                                                                              ………….बिहार पंचायत चुनाव

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