कठोर इंतजाम, जगह जगह हुए नाकाम

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अमरनाथ

औरंगाबाद में मुखिया प्रत्याशी को गोलियों से भून डाला। इस वारदात में संदेह नक्सलियों पर है जिन्होंने चुनाव बहिष्कार की धमकी दी थी। पर पंचायत चुनाव में गैरनक्सल इलाकों में भी बडे पैमाने पर हिंसा हुई है। राज्य निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार पहले चार चरणों के मतदान के दौरान 54 प्रत्याशियों की मौत हो चुकी है। इससे उनके क्षेत्रों में मतदान की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया को स्थगित कर दिया गया है। मृतकों में सबसे अधिक ग्राम पंचायत सदस्य और मुखिया पद के प्रत्याशी हैं।

pppp50आयोग को विभिन्न जिलों के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से मिले प्रतिवेदन के अनुसार जिला परिषद के चार, पंचायत समिति सदस्य के पांच, मुखिया के आठ, सरपंच के छह, ग्राम पंचायत सदस्य के चौबीस और ग्राम कचहरी पंच के सात उम्मीदवारों की मृत्यु चोथे चरण के मतदान के पहले तक हो गई है। चुनाव दस चरणों में हो रहे हैं। अभी आठवें चरण का मतदान चल रहा है। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव दुर्गेष नंदन के अनुसार, जिन निर्वाचन क्षेत्रों में किसी उम्मीदवार की मौत हो गई हैं, वहां मतदान की वर्तमान प्रक्रिया के समाप्त होने के बाद नए सिरे से तिथि घोषित कर मतदान कराया जाएगा। इसकी तैयारी के लिए सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को आवष्यक निर्देष दे दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि बिहार में पंचायती राज्य संस्थाओं के 2लाख 58 हजार पदों के लिए 7 लाख 50 हजार उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।

पंचायत चुनावों में हिंसा के लिहाज से औरंगाबाद जिला अव्वल ठहरता है। देव थाने के सिंघवा गांव में मुखिया प्रत्याशी मनोज सिंह को नक्सलियों ने गोलियों से भून डाला। पर ओबरा थाना के एक गांव में मतदान केन्द्र पर कब्जा कर फर्जी मतदान करने के आरोप में पीठासीन पदाधिकारी और पुलिस सब इंस्पेक्टर समेत 29 लोग गिरफतार किए जा चुके हैं। बथानी प्रखंड के सरेन पंचायत में मुखिया के दो प्रत्याशियों में जमकर गोलीबारी हुई। गोलीबारी, मारपीट और गिरफतारी की घटनाएं विभिन्न जिलों में हुई हैं। सहरसा में तो मनोयनपत्र दाखिल करने के दौरान लोगों ने पुलिसबल पर ही हमला कर दिया। वहां एक हत्या का आरोपी अपनी पत्नी का मनोयन पत्र दाखिल कराने कलेक्ट्रेट पहुंच गया था। पुलिस ने उसे गिरफतार किया तो उसके समर्थकों ने पुलिस बल पर हमला कर दिया और जमकर तोडफोड की। हालत को काबू करने में एसपी अष्विनी कुमार को खुद कमान संभालनी पडी। लाठीचार्ज हुआ और पंद्रह लोगों की गिरफतारी व घंटे भर की मस्सकत के बाद हालत काबू में आई।

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मुजफफरपुर, पूर्वी चंपारण, छपरा, सीवान, अरवल, रोहतास, समस्तीपुर , सुपौल हर जगह से पंचायत चुनाव के सिलसिले में हिंसक वारदातें हुई। पटना जिले के मसौढी में कोरियावा गांव के बूथ पर बोगस मतदान के सवाल पर पुलिस प्रशासन और उग्र ग्रामीणों के बीच हिंसक झडप हुई। इस मामले में मुखिया प्रत्याशी ओमप्रकाश भारती समेत 800 से अधिक लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उनपर मतदान केन्द्र में घूसकर मतपत्र और मतपेटी लूटने का प्रयास करने के अलावा प्रषासनिक और पुलिस टीम पर जानलेवा हमला करने जैसे आरोप हैं। आरोप है कि मतदान का समय समाप्त हो जाने के बाद जब मतपेटी सील किया जा रहा था, तब सौ डेढ सौ लोग मतदान केन्द्र में घूस गए और हंगामा करने लगे। खबर मिलने पर सेक्टर मजिस्ट्रेट और पुलिस बल पहुंची तो रास्ते को अवरुद्ध कर भीड रोडेबाजी करने लगी। गोलीबारी भी हुई जिसमें कई पुलिसकर्मी भी घायल हो गए।

चुनावों के दौरान गडबडी और हंगामों को टालने के लिए इसबार राज्य निर्वाचन आयोग ने दोहरा इंतजाम किया था। एकतरफ मतदान केन्द्रों पर सशस्त्र पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया था, तो दूसरी ओर हंगामा होने पर संबंधित प्रत्याशी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का निर्देष भी दिया गया था। ऐसे मुकदमों में 15 दिनों के अंदर चार्जशीट दाखिल कर स्पीडी ट्रायल के माध्यम से मामले का निपटारा करने का प्रावधान किया गया है। शातिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिष्चित करने के लिए राज्य में 60 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसमें जिला पुलिस बल के अलावा बीएमपी, होमगार्ड और सैप के जवान लगाए गए हैं। पुलिस कर्मियों को मतदान की तारीख के एक दिन पहले मतदान केन्द्र पर पहुंचना और सुरक्षा के लिहाज से जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा इंतजामों के लिहाज से ही चरणवार मतदान में हर चरण में हर जिले के दो या तीन प्रखंडों में मतदान का कार्यक्रम रखा गया ताकि सुरक्षाबलों की तैनाती आसानी से हो सके। जिला पुलिस के जवानों को दूसरे जिले में जाने की आवष्यकता न हो, इसका ध्यान भी रखा गया। नक्सल बहुल इलाके में कुछ दूसरे इंतजाम हुए हैं।

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