…ओ बेबी कूल कूल कूल,टीका लगवाले… नहीं तो होगी बड़ी भूल..प्यारे बन जावेगा फूल

 

मंगरूआ
नयी दिल्ली: …ओ बेबी कूल कूल कूल, लेकिन जिंदगी कूल होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरह का कोलाहल है। टीकाकरण को लेकर आपाधापी मची है। तरह-तरह के शोर सुनाई दे रहे हैं। फिर भी हकीकत यही है कि टीका लगवाले प्यारे, नहीं तो बन जावेगा फूल। बावजूद इसके कोरोना ने जिस तरह से​ जिंदगी की रफ्तार थाम​ ली है या यूं कहें हमें जिंदगी जीने का सलीका सिखाया है और जीवन जीने की आपाधापी में अब तक हम जो भूलते जा रहे थे उस पर बारीकी से गौर करना सिखाया है। हर तरफ से कोरोना से लड़ने और जिंदगी बचाने के लिए जद्दोजहद करने की खबरें आ रही हैं। और इस जद्दोजहद से निकलने के जो रास्ते दिखाई देते हैं वो हैं दो गज दूरी यानी सोशल डिस्टेसिंग, मास्क और कोरोना टीकाकरण। लेकिन लक्ष्य इतना बड़ा है, देश की आबादी इतनी ज्यादा है कि इस काम में मुश्किल भी आयेंगी और वक्त भी लगेगा। लेकिन देश जंग जीतेगा इसको लेकर शायद ही किसी के मन में संशय हो।                                                                                          .. बेबी कूल कूल कूल
देश में टीकाकरण अभियान तेजी से चल रहा है। लोग बढ़ चढ़कर टीकाकरण पर्व में भाग ले रहे हैं। जिनकी बारी अभी नहीं आई है वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, जो टीका लगा चुके हैं वो दूसरों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हालाकि इस बीच कहीं—कहीं से कोरोना टीकाकरण का विरोध और टीकाकरण के खिलाफ अफवाह की खबरें भी आ रही हैं। लेकिन कहा गया है न कि जब बुराई पर अच्छाई हावी हो जाये, बरगलाने वाले से ज्यादा समझाने वाले लोग हो, मारने वाले से ज्यादा शक्तिशाली बचाने वाला हो तो लड़ाई आसान हो जाती है। देश भर में चलाए जा रहे कोरोना टीकाकरण अभियान की भी कमोबेस ऐसी ही तस्वीर उभर कर सामने आ रही है। देश के सर्वोच्च नेता से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक चुने हुए प्रतिनिधी टीकाकरण अभियान में बढ़ चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। चाहे फिल्म जगत के लोग हों या धर्म गुरू, साहित्यकार हों या कवि सब अपने—अपने तरीके से टीकाकरण अभियान के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं, राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। लेकिन इस बीच हमारे परिवहन के साधनों मसलन ट्रक,टेंपू, बस,ट्राली आदि पर जिस तरह की शायरियां लिखी दिख रही हैं वो भले ही पहली नजर में फूहर लगें लेकिन इसमें छुपे निहितार्थ और आसानी से आम बोलचाल की भाषा में जो संदेश लिखा दिख रहा है वो  अपनी ओर लोगों का ध्यान खींच रहा है और लोग टीकाकरण अभियान से जुड़ रहे हैं। …बेबी कूल कूल कूल


कल्पना कीजिए आप हाईवे पर खड़े हैं अचानक से एक ट्रक गुजरती है और उसके पीछे कोई ऐसा सामाजिक संदेश अंकित हो जिससे आपको प्रेरणा मिले। ऐसे संदेश अक्सर व्यक्ति के मनोमस्तिष्क पर न सिर्फ अमिट छाप छोड़ जाते हैं और व्यक्ति उससे प्रेरित भी होता है। कोरोना काल में भी पूर्व की ही भांति ट्रक, टैम्पो, या अन्य किसी गाड़ी के पीछे लिखी शायरी जिन पर लिखे संदेशों पर हमारी नजर अचानक चली जो कोरोना के खिलाफ लड़ाई में व टीकाकरण के पक्ष में संदेश दे रही हों निश्चित रूप से इसका प्रभाव होता है। ऐसे ही कुछ संदेश आजकल पब्लिक ट्रांसपोर्ट से लेकर ट्रकों तक पर लिखे दिख रहे हैं जिसके जरिए कोरोना के खिलाफ लड़ाई में टीकाकरणके महत्व को दर्शाते हुए लोगों को जागरूक किया जा रहा है।                                                                           … बेबी कूल कूल कूल
इसलिए इन दिनों एक संस्था ने यह बेड़ा ही उठा रखा है कि वह वाहनों के पीछे प्रेरणा देने वाले शब्दों का लेखन कराती रहेगी। यहां हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश की राजधानी में काम कर रही ”सर्च एंड रिसर्च डवलपेंट सोसायटी” की जो इन दिनों आम जन को जागरूक करने ट्रकों के पीछे ’कोरोना शायरी’ लिखने का अभियान चला रही है। वाहन चालक लिखवा रहे खुशी-खुशी कोरोना जागरुकता की शायरियां सर्च एंड रिसर्च डवलपमेंट सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. मोनिका जैन बताती हैं कि संस्था ने जिला प्रशासन भोपाल के सहयोग से हर रोज कोरोना जागरुकता का क्रम बनाया है। आज ही भोपाल के भौंरी-बकानिया बायपास पर 40 से अधिक ट्रक, टैम्पो, बस, टैक्टर-ट्रॉली सहित अन्य वाहनों पर कोरोना जागरुकता संदेश और शायरियां लिखी गईं। साथ ही स्टीकर, पोस्टर और बैनर लगाए गए। अपने तरीके के इस अनूठे प्रयोग को लोगों से खूब सराहना मिल रही है। वाहनों के चालक खुशी-खुशी कोरोना शायरियां अपने वाहनों पर लिखवा रहे हैं। इनका कहना है कि ट्रक, बस, ट्रैक्टर- ट्रॉली जैसे वाहन गांव-शहरों से होते हुए पूरे देश में जाते हैं। इस तरह से लोगों को जागरूक करने के लिए एक बेहतर माध्यम है। वैक्सीन लगवाने को लेकर अब भी मौजूद हैं।                                                   …  बेबी कूल कूल कूल
डॉ मोनिका कहती हैं दुर्भाग्य से भारत में अब भी कोरोना की वैक्सीन को लेकर अनेक तरह की भ्रांतियां, डर और संशय है। वैक्सीन को लेकर अनेक तरह की अफवाहें फैल रही हैं। वैक्सीन से मौत होती हैं, नपुसकता आती है, बांझपन आता है और इस तरह की अनेक भ्रम लोगों के मन में है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में यह स्थिति बनी हुई है। लोग टीका नहीं लगवा रहे हैं या फिर इसको लेकर आनाकानी कर रहे हैं। कहीं—कहीं तो दूर दराज के गांवों और कस्बों में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों के साथ बुरा बर्ताव भी किया जा रहा है। ये स्थिती तब है जब सरकार और विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन ही कोरोना से बचाती है।                                    …बेबी कूल कूल कूल

डॉ मोनिका कहती हैं ऐसी स्थिति में जरूरी है कि इस भ्रम को दूर कर लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक करने सभी तरह के प्रयास किए जाएं, ताकि संपूर्ण टीकाकरण से हमारा देश कोरोना महामारी से मुक्त हो सके। डॉ. मोनिका साथ में यह भी बताती हैं कि हमारे इन प्रयासों को आज जो पंख देने का काम कर रहे हैं। रोचक है कोरोना शायरी टीकाकरण को लेकर व्यापक स्तर पर जन-जागरुकता के लिए सर्च एंड रिसर्च डवलपमेंट सोसायटी ने ’ट्रकों पर कोरोना शायरी’’ की अनूठी पहल की है। सोसायटी ने कोरोना शायरी उसी रोचक और मौजी अंदाज में लिखी हैं जैसी आप ट्रकों के पीछे पढ़ते हैं। इसमें अनेक भावों के साथ वैक्सीन लगवाने और मास्क का निरंतर उपयोग करने के संदेश हैं।                                                                                                                             … बेबी कूल कूल कूल
शेरो—शायरी और संदेश देने वाली कविताएं
— देखो मगर प्यार से…. कोरोना डरता है वैक्सीन की मार से
— मैं खूबसूरत हूं मुझे नजर न लगाना जिंदगी भर साथ दूंगी, वैक्सीन जरूर लगवाना
— हंस मत पगली, प्यार हो जाएगा टीका लगवा ले, कोरोना हार जाएगा
— टीका लगवाओगे तो बार-बार मिलेंगे लापरवाही करोगे तो हरिद्वार में मिलेंगे
— यदि करते रहना है सौंदर्य दर्शन रोज-रोज तो पहले लगवा लो वैक्सीन के दोनों डोज
— टीका नहीं लगवाने से यमराज बहुत खुश होता है।
— चलती है गाड़ी, उड़ती है धूल वैक्सीन लगवा लो वरना होगी बड़ी भूल
— बुरी नजर वाले तेरा मुंह काला अच्छा होता है वैक्सीन लगवाने वाला
— कोरोना से सावधानी हटी, तो समझो सब्जी-पूड़ी बंटी
— मालिक तो महान है, चमचो से परेशान है।
—कोरोना से बचने का, टीका ही समाधान है।

लोक संचार के माध्यमों का उपयोग
इसके अलावा लोक संचार के माध्यमों जैसे कठपुतली, नुक्कड़ नाटक, लोक गीत और संगीत के माध्यम से भी निरंतर जागरुकता गतिविधियां की जा रही हैं। कई जगह लोक गायक बोल चाल की शैली में कविता कर भी कोरोना टीकाकरण और महामारी के भयावहता व बचाव के उपाय को लेकर या फिर सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं यानी आप कह सकते हैं लोग अपनी तरफ से गिलहरी योगदान दे रहे हैं..                                                                                                  … बेबी कूल कूल कूल
…ओ बेबी कूल कूल कूल,टीका लगवाले… नहीं तो होगी बड़ी भूल..प्यारे बन जावेगा फूल
मुझे मायके है जाना,सजन जरा टीका लगवाना
खुद को भी बचाना, संग साथ निभाना तेरे पास फिर है आना
सजन जरा टीका लगवाना,आलस न दिखाना
चलेगा न कोई बहाना,जिंदगी साथ है बिताना।
…….ओ बेबी कूल कूल कूल,टीका लगवाले… नहीं तो होगी बड़ी भूल..प्यारे बन जावेगा फूल
…बुरी नजर वाला तेरा मुंह काला, जल्दी ​लगवाले टीका नहीं निकल जायेगा दिवाला
दुल्हन ही दहेज है कोरोना टीका है मंगल सूत्र
सिंदूर रहेगी सलामत, टीका लगवाना न जाना भूल।।
आनलाईन अप्लाई कर,टीका करा ले बूक।
समय पर लगवाले राजा,नहीं तो मौका जावेगा चूक।

इस तरह की पंक्तियां निश्चित रूप से लोगों का ध्यान कोरोना की महामारी की भयावहता और टीकाकरण की उपयोगिता के प्रति जागरूक करने में मददगार साबित होंगी और समय के साथ कई सामाजिक संगठन इस विषय में देशव्यापी पहल करेंगे और कोरोना के फैलाव विशेषकर ग्रामीण इलाकों में इसके फैलाव पर जरूर विराम लगेगा।                                                                …बेबी कूल कूल कूल

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