अखिलेश अखिल, वरिष्ठ पत्रकार
संयुक्त बिहार से सबसे ज्यादा जमीनें भूदान आंदोलन को दान की गई थी । कोई 22 लाख एकड़ जमीने संयुक्त बिहार से मिली थी । इनमें से बिहार के जमींदारों ने 6,48,593 एकड़ और झारखड के जमिंदारों ने 14,69,280 एकड़ जमीने विनोबा जी को दी थी । 45 सालों के बाद भी ये जमीनें आज तक भूमिहीनों को नही दी गई है। बिहार और झारखंड में 2 लाख 32 हजार लोगों ने ये जमीने दान दी थी। बिहार में में मात्र 2,78,320 एकड़ जमीने ही आज तक बंट पायी है जबकि झारखंड में मात्र 4,88,735 एकड़ जमीने ही भूमिहीनों तक पहुंच पाई है। इनमें भी जिन भूमिहीनों को जमीने दी भी गई है उसका मालिकाना पट्टा आज तक अधिकतर लोगों को नही मिली है। राजस्व विभाग सारे कागजात अपने पास रखे हुए है और कागज देने के नाम पर मोटी रकम की मांग कर रहे है। बिहार और झारखंड से मिली लगभग 22 लाख एकड़ जमीनों में से अधिकतर जमीनों को दलालों और भ्रष्ट नौकर शाहों से लेकर भूदान समिति से जुड़े अनफीट और बेकार की जमीन घोषित कर मजा मार रहे है। नदी नाला और पहााड़ी जमीन के नाम पर ये जमीने लूट की शिकार हो रही है । इसके अलावा बहुत सारी जमीने तो ऐसी भी है जिसे दानदाताओं ने नाम कमाने के लिए दान तो दे दिया किन्तु आज भी उन जमीनों पर कब्जा उन्हीं का बना हुआ है। झारखंड के सामाजिक कार्यकर्ता ठाकुर प्रसाद कहते हैं कि -‘आदिवासियों ,गरीबों और भूमिहीनों की बात करने वाली बिहार और झारखंड सरकार से कौन पूछने जाए कि भूदानी जमीन कहां है और उन जमीनों को सही तरीके से भूमिहीनो के बीच क्यों नही बांटा जा रहा है । जो सरकार इतना भी काम नहीं कर सकती भला उससे उम्मीद क्या की जाएगी।
सही बात तो यह है कि भूदानी अधिकतर जमीनों पर बिल्डरों ने हड़प लिया है और इसमें राज्य सरकार के लोग सदा से मिले रहे हैं। कभी-कभी तो लगता है कि पूरे देश में नकली सरकार की भरमार सी हो गई है।’ ठाकुर प्रसाद की बातों में दम है। राज्य बने 10 साल हो गए हैं और भूदानी जमीनों को लेकर आज तक किसी मुख्यमंत्री ने अपनी सक्रियता नहीं दिखाई। राज्य के भू राजस्व मंत्री हैं मथुरा महतो। जमीनी आदमी हैं और लोकप्रिय भी । लेकिन भूदान से संबंधित जमीन वितरण के बारे में जब इस संवाददाता ने सवाल किया तो महतो साहब चुप हो गए । कहने लगे कि- ‘कुछ जमीनें पहले भूमिहीनों को बांटी गई थी अभी इस पर फिर से काम किया जाना हैं जमीन की मानिटरिंग की जा रही है। लेकिन सबसे बड़ी बात तो यह है कि यहां का भूदान समिति डिफंक्ट है। वह ठीक से काम नहीं कर रहा है। एक अन्य सवाल पर महतो साहब भड़क गए। कहने लगे कि आप लोग केवल निगेटिव सवाल ही करते हैं । राज्य में अच्छा काम भी हो रहा है उसे आप लोग नहीं दिखाते।’
बिहार में कई मामले तो चोकाने वाले हैं । उपरोक्त कमीशन की रिपोर्ट ने खुलासा किया था कि भूदान की 11130 एकड़ जमीन 59 संस्थाओं को दे दी गई जो भूदान कानून के विरूद्ध. है। औसत एक संस्था को 189 एकड़ जमीने दी गई है। चूकि यह मसला राज्य सरकार से संबंधित है इसलिए कहा जा सकता है कि सरकार के बाबूओं और भूदान समिति के लोगों ने मिलकर यह सारा खेल किया है। बिहार में भूदानी जमीनों की कैसे लूट की गई है इसकी कुछ बानगी आप देख सकते हैं । बिहार के पूर्णिया जिला में भूदान कार्यालय मंत्री रहे हैं मुस्तफा रजा आलम। आलम ने अपनी पत्नी रेहाना खातुन के नाम 4 एकड़ जमीन खाता नंबर 444 ,खेसरा नंबर 405 के नाम 23 जुलाई 2008 को करवा दी हैं। यह जमीन पूर्णिया जिले के रूपौली थाना के मउआ परबल गांव में दी गई है। इसका प्रमाण पत्र संख्या है 778549। इसी महिला के नाम पूर्णिया जिले के गोपालपुर थाना के जहांगीरपुर बैसी में 2 एकड़ की एक और जमीन दी गई है ।इस जमीन का खाता नंबर 866 और खेसरा नंबर है 101। इसका प्रमाणपत्र संख्या है 768166। यह जमीन 3 नवंबर 2007 को दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट का इस मसले में साफ आदेश है कि भूमिहीनों को जमीन दी जाएगी और वह भी स्थानीय भूमिहीनों को। लेकिन यहां तो एक ही आदमी को दो जगह जमीन दी गई है और वह भी स्थानीय आधार पर नही। इसे लूट नही तो और क्या कहा जाए? इसी परिवार से जुडा एक और केस है पटना का। पूर्णिया के मुस्तफा रजा का सगा भाई मो0 इसराफिल पटना भूदान आफिस में काम करते हैं। इन्होने अपनी पत्नी रजिया खातून के नाम 4 एकड़ जमीन पूर्णिया के ही भउआ परबल गांव में करबा दी है। इस जमीन का प्रमाण संख्या है 778530 ।यह जमीन 23 जुलाई 2008 को रजिया खातुन के नाम की गई है। इसी महिला के नाम एक एकड़ जमीन जहांगीर पुर बैसी में भी की गई है जिसका प्रमाण संख्या 768211 है। यह जमीन 3 नवंबर 2007 को लिखी गई है। इस परिवार के लोगों ने सरकार के लोगों से मिलकर या फिर राजनीति के तहत जमक र भूदानी जमीनों की लूट की है। एक 2 एकड़ की तीसरी जमीन भी इसी रजिया खातून के नाम जहांगीरपुर बैसी में की गई है जिसका खाता नंबर है896 और खेसरा नंबर है 101। इस जमीन का प्रमाण पत्र देने वालों में विजय कुमार शर्मा , कार्यालय मंत्री , भागलपुर भूदान कार्यालय के हस्ताक्षर हैं। आपको यह भी बता दें कि ये सारी जमीने नीतीश कुमार के शासन में बांटी गई है। बंटी यह जमीन जायज है या नाजायज यह जांच का विषय हो सकता है।
भूदानी जमीन की लूट केवल बिहार या गुजरात में ही नहीं की गई है। जहां जहां से जमीने मिली है ,जमीने लूट की शिकार हुई है। आंध्र में कुल 2,52,119 एकड़ जमीने दान में मिली थी। इनमें से 1,08,770 एकड़ जमीन अनियमितता पूर्वक बंट तो गई है बाकि लगभग एक लाख जमीन बिल्डरों और संस्थाओं के हाथ में चली गई है। बिल्डरों के कई मामले अभी अदालत में चल रहे हैं। तामिलनाडू में तो भूदानी जमीन को लूटने के लिए भूदान एक्ट में ही संसोधन कर दिया गया। तामिलनाडू में कुल 27677 एकड़ जमीन दान में मिली थी । इनमें से 22837 एकड़ जमीन किसी तरह तो बंट गई है वाकि के 4840 एकड़ जमीन संस्थाएं और विल्डरों के चंगुल में है। राज्य सरकार ने भूदान कानून में बदलाव करके कानून बना रखा है कि अगर भूदानी जमीन का उपयोग सार्वजनिक काम के लिए होता है तो इसे बाजार दर से दोगुनी दर पर ली जा सकती है। उडीसा में भी भूदानी जमीन को लूटा गया हैं । उड़ीसा में भूदान आंदोलन के तहत कुल 6,38,706 एकड़ जमीने दान में मिली थी। इसमें से 5,79,984 एकड़ जमीनें बांट दी गई है। इनमें भी कई जमीनें ऐसे लोगों को दे दी गई हैं जो भूमिहीन वर्ग में नहीं आते हैं। इसके अलावा खुर्दा जिले के पीपली तहसील में 171 एकड़ जमीन बिल्डर के हाथों बेच दी गई है। बिल्डरों ने इस पर निर्माण भी कर लिया था जिसे एफआईआर के बाद खुर्दा के कलेक्टर ने तोड़ दिया है। लेकिन अभी तक जमीन बेचने वाले और खरीदने वाले पुलिस के हाथ नहीं लग पाए हैं। राज्य के राजस्व और आपदा मंत्री सूर्य नारायण पात्रों कहते हैं कि ‘दोषी चाहे जो भी हो हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे। भूदानी जमीन किसी को नहीं दी जा सकती। यह भूमिहीनों के लिए है। जिन लोगों ने जमीन की लूट की है हम उसे तलास रहे हैं।’
विनोबा भावे के भूदान आंदोलन के तहत भूमिहीनों के लिए देश भर से दान में मिली जमीनों की पहली शर्त ये है कि स्थानीय भूमिहीनों के अलावा किसी और को न तो दी जा सकती है और न हीं किसी भी सुरत में किसी को भी ये जमीने बेची जा सकती हैं । भूदानी कानून के अलावा माननीय सुप्रीम कोर्ट का भी यही आदेश है। लेकिन इस आदेश की धज्जियां सबसे ज्यादा गुजरात सरकार और राज्य भूदान समिति से जुड़े लोगों ने उड़ाई है।
हालाकि ऐसा नही है कि गुजरात के अलावा अन्य राज्यों में भी भूदानी जमीन की लूट नहीं की गई है। हम उस पर भी चर्चा करेंगे। लेकिन सबसे पहले आइए नजर डालते हैं गुजरात में भूदानी जमीनों पर । सरकार के लोगों और राज्य भूदान समिति के लोगों ने मिलकर पैसे की लालच में भूदानी जमीनों को विल्डरों के हाथ बेच दी है। ऐसा कोई एक मामला नहीं है । जरा इन मामलों पर आप भी गौर कर ले।गुजरात का ब्लाक नंबर 542। गांव भदज। इस इलाके को आधुनिक समय में साइंस सिटी के नाम से जाना जाता है। राज्य सरकार और भूदानी समिति से जुड़े लोगों ने यहां की लगभग 12 एकड़ भूदानी जमीन एक बिल्डर रश्मिकांत छगान भाई पटेल को मात्र एक करोड़ 18 लाख में बेच दिया। बर्तमान समय में यहां एक एकड़ जमीन की कीमत 2 करोड़ के आसपास है। यानि 24 करोड़ की जमीन लगभग सवा करोड़ में बिल्डर लोगों को खिलापिला कर ले उड़े। आज तक किसी की इस पर नजर नहीं गई है।
गुजरात के ही खेड़ा जिला के राधु गांव की ही भूदानी 5 एकड़ जमीन भूदान समिति और राज्य सरकार के लोगों ने सभी नियमों को ताख पर रखकर मात्र 3 लाख में बिल्डर दिनेश भाई रमण भाई पटेल को बेच दी है । इस जमीन का सर्वे नं0 है 1662 और 1664। आपको बता दें कि भूदान के तहत पहले यह जमीन अलेफ खान और गुलाब खान पठान को दी गई थी। बाद में इन खानों से जमीन छीन कर बिल्डर के हवाले कर दिया गया। अहमदाबाद शहर में ही सावरमती आश्रम के पास ग्राम स्वराज आश्रम स्थित है। यहां की लगभग आधा एकड़ जमीन 3 नवंबर 2009 को एक ब्यापारी के हाथ मात्र 39 लाख रूपए में बेच दी गई है। बेची गई जमीन पर आश्रम की पांच कमरे थी, एक बड़ा हाल था और खुली जमीन थी। अभी अहमदाबाद में 40-45 लाख में एक कमरा मिलना भी मुश्किल है । चूकि ब्यापारी के हाथ में सीधे जमीन बेचने में दिक्कत आ सकती थी इसलिए दलालों ने पहले एक संस्था बनाई फिर इस जमीन को बेच दी।
गुजरात के ही बड़ोदरा शहर में भी दलालों और भूदान समिति से जुड़े लोगों ने भूदानी जमीन को बेचने में कोई कोताही नही बरती हैं बाघोरिया रोड पर पापोद मुहल्ला की 1.4 हेक्टेयार भूदानी जमीन प्रणव पंचाल,बैकुंठ नाथ बिल्डर को 2004 में बेच दी गई है। अहमदाबाद के ही नरोदा में एक और भूदानी जमीन को बिल्डर के हवाले किया जा चुका है। 0.43.43 हेक्टेयर जमीन 2008 में प्रवीण भाई मणि भाई पटेल के हाथ बेच दी गई है। इस जमीन का रजिस्ट्ी नं0 है 5160/2008 ।
जरा दिल्ली का हाल तो देखें। भूदान यज्ञ में दिल्ली के लोगों ने विनोबा भावे को 300 एकड़ जमीन दान में दी थी। इन जमीनों में से 180 एकड़ जमनों का वितरण दिल्ली सरकार कर देने का दावा कर रही है। बाकि 120 एकड़ जमीन कहां है और किसके कब्जे में इसका कोई रिकार्ड किसी के पास नहीं है। आप को बता दें कि यहां कि अधिकतर भूदानी जमीनों पर माफियाओं का कब्जा हो चुका है। फरीदाबाद और नोएडा की भूदानी जमीनों को विल्उरों ने कब्जा रखा है।डिफेंस हाउसिंग के नाम पर माफियाओं ने सहां की 30 एकड़ जमीन लूट ली है । यह मामला अदालत में है। कहा जा रहा है कि दिल्ली और हरियाणा के तीन नेताओं ने मिलकर यह धंधा किया था और करोड़पति बन गए थें। इसी तरह महाराष्ट् से भूदान के तहत 1,58,160 एकड़ जमीन मिली थी। इसमें से 1,13,230 एकड़ जमीन बंट चुकी है। बाकि की 44,930 एकड़ जमीन अभी विवादों में फंसी हुई है। विनोबा भावे ने सबसे पहले भूदान आंदोलन की शुरूआत बर्धा से की थी। लेकिन बाद के दिनो में बर्धा और थाने इलाके में भूदानी जमीन की जमकर लूट की गई। बर्धा में सबसे ज्यादा विल्डरों ने भूदानी जमीन को कब्जा कर रखा है और थाने इलाके में भूदान समिति औा सरकार से मिलकर विल्डरों और कई संस्थाओं ने सैकडों एकड़ जमीन कम भाव में ले रखी है।


