मनरेगा कर्मियों के साथ खड़ी हुईं ममता बनर्जी…कहा, उनकी सरकार 2.1 मिलियन मनरेगा लाभार्थियों को दो साल के लिए उनकी लंबित मजदूरी का भुगतान करेगी।
कोलकाता: यूपीए के शासन काल में शुरू हुई मनरेगा वैसे तो ग्रामीण भारत के संस्थागत विकास और गांव में ही ग्रामीणों को सुनिश्चित रोजगार मिले इसके लिए शुरू की गई मनरेगा योजना हमेशा ही भ्रष्टाचार के कारण सुर्खियां बटोरती है। आपको याद होगा कि एनडीए के शासन काल में ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कांग्रेस के भ्रष्टाचार की ग्वाही देने वाली इस योजना को वो गाजे बाजे के साथ जारी रखना चाहते हैं। लेकिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस योजना में भ्रष्टाचार को लेकर सचेत हैं और कोशिश कर रही हैं कि इस योजना के कारण उनका दामन दागदार न हो। इसी दिशा में की जा रही पहल के तहत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अत्यधिक सावधानी बरत रही है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 (मनरेगा) निधि का कोई दुरुपयोग न हो। हालाकि केंद्र द्वारा नियत की जा रही राशि न दिये जाने का आरोप भी केंद्र सरकार पर है और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 21 फरवरी को राज्य के खजाने से वितरित करने का वादा किया है। फलस्वरूप अधिकारी इस प्रक्रिया की देखभाल कर रहे हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी
वैसे तो इस बाबत राज्य सरकार के एक अधिकारी मुंह खोलने को तैयार नहीं है लेकिन विभागीय सूत्र ये बताते हैं कि “राज्य पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने मंगलवार को आदेश दिया कि सभी सूचीबद्ध लाभार्थियों के आधार कार्ड और बैंक खातों की फिर से जांच की जानी चाहिए। सभी डेटा को मूल सूची के विरुद्ध सत्यापित किया जाना है।”
सूत्रों की माने तो “यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानी बरती जा रही है कि किसी भी फर्जी लाभार्थी को पैसा न मिल सके। लाभार्थियों के नाम वाली नई एक्सेल फाइलें पासवर्ड से सुरक्षित की जाएंगी, जिन तक केवल ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) की पहुंच होगी।”
ममता का केंद्र पर आरोप
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनकी सरकार 2.1 मिलियन मनरेगा लाभार्थियों को दो साल के लिए उनकी लंबित मजदूरी का भुगतान करेगी, हालांकि केंद्र ने 2021 में अपना हिस्सा देना बंद कर दिया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया है कि टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच खींचतान के बीच केंद्र ने 2021-22 से मनरेगा के तहत 6,913 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया है। हालाँकि, भाजपा ने दावा किया है कि धन बंगाल सरकार को प्राप्त हुआ था लेकिन यह फर्जी लाभार्थियों के बैंक खातों के माध्यम से टीएमसी नेताओं के पास चला गया।
उल्लेखनीय है कि गत मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय ने बंगाल में योजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच शुरू की और चार स्थानों पर छापेमारी की।
चल रही है गहन छानबीन
राज्य सरकार कें अधिकारी लाभार्थियों की सूची बैंकों को क्रॉस-चेकिंग के लिए भेजने से पहले पंचायत विभाग के कर्मचारी घर-घर जाकर जांच करेंगे।
इसके बाद, बीडीओ सूचियां प्राप्त करेंगे और उन्हें संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को भेजेंगे जो 19 फरवरी तक पंचायत विभाग से धन प्राप्त करेंगे। संवितरण 21 फरवरी को विशिष्ट बैंक खातों के माध्यम से किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दिसंबर 2021 में बंगाल के लिए मनरेगा फंड रोक दिया। राज्य के उपभोक्ता मामलों के मंत्री बिप्लब मित्रा के अनुसार, केंद्रीय मंत्रालय ने 9 मार्च, 2022 को एक पत्र भेजा, जिसमें कहा गया कि यह कार्रवाई मनरेगा की धारा 27 के तहत की गई थी।
क्या है प्रावधान
केंद्र सरकार, किसी भी योजना के संबंध में इस अधिनियम के तहत दी गई धनराशि के अनुचित उपयोग या मुद्दे के संबंध में कोई शिकायत प्राप्त होने पर, यदि प्रथम दृष्टया संतुष्ट है कि कोई मामला है, तो किसी भी नामित एजेंसी द्वारा की गई शिकायत की जांच कर सकती है। यह और यदि आवश्यक हो, तो योजना के लिए धन जारी करने पर रोक लगाने का आदेश दें और उचित समय के भीतर इसके उचित कार्यान्वयन के लिए उचित उपचारात्मक उपाय करें।
पिछले साल अक्टूबर में कोलकाता दौरे के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री साधवी निरंजन ज्योति ने कहा था, “केंद्र का फंड रोकने का कोई इरादा नहीं है। जैसे ही राज्य सरकार अब तक खर्च किए गए धन का लेखा-जोखा प्रस्तुत करेगी, इसे जारी कर दिया जाएगा।”
इस बाबत इसी माह 3 फरवरी को मुख्यमंत्री बनर्जी ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के लिए उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा करने में देरी पर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की हालिया रिपोर्ट का खंडन किया।
👉ममता बनर्जी को पंचायतों से बाहर करने के लिए भाजपा ने किया इन पार्टियों से गठबंधन


