Diwali Date Auspicious Time: हिन्दू धर्म में दिवाली का पर्व बहुत ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। यह पावन पर्व हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। इस त्योहार को लेकर धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या तिथि पर भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे थे और उन्होंने लंका के राक्षसराज रावण को पराजित किया था। इस दिन अयोध्या वासियों ने बेहद खुशी मनाई थी और दीपों से नगर को रोशन किया थी। यह इस समय की जीत और अच्छाई के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
इस शुभ अवसर पर भगवान राम परिवार के संग मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि सच्चे मन से उपासना करने से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है और धन की प्राप्ति होती है। इस बार दिवाली को लेकर लोगों में असमंसज की स्थिति उत्पन्न हो रही है। जिसकी वजह से लोग बेहद परेशान हो रहे हैं कि आखिर दिवाली का पर्व किस दिन मनाया जाएगा।
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दिवाली की सही तिथि
हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत 31 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 01 नवंबर को संध्याकाल 06 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में 31 अक्टूबर को बड़ी दिवाली मनाई जाएगी।
दिवाली पर्व के पांच त्योहारों की तिथि
धनतेरस 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा।,छोटी दिवाली 30 अक्टूबर को मनाई जाएगी।,बड़ी दिवाली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी।,गोवर्धन पूजा 02 नवंबर को है।,भाई दूज का त्योहार 03 नवंबर को मनाया जाएगा।
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दिवाली का शुभ मूर्हूत
दिवाली का ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04 बजकर 49 मिनट से 05 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त- दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से 02 बजकर 39 मिनट तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05 बजकर 36 मिनट से 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा।
दीवाली पूजन विधि और मंत्र
दिवाली पूजन आरंभ करें पवित्री मंत्र सेः “ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:॥” इन मंत्रों से अपने ऊपर तथा आसन और पूजन सामग्री पर 3-3 बार कुशा या पुष्पादि से छींटें लगाएं। आचमन करें – ऊं केशवाय नम: ऊं माधवाय नम:, ऊं नारायणाय नम:, फिर हाथ धोएं। इस मंत्र से आसन शुद्ध करें- ऊं पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्यवं विष्णुनाधृता। त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥ अब चंदन लगाएं। अनामिका उंगली से श्रीखंड चंदन लगाते हुए मंत्र बोलें चन्दनस्य महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम्, आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी तिष्ठ सर्वदा।



