चंपारण में आई बाढ़ से अशोक स्तंभ पर खतरा, शेरवा गांव में घुसा पानी

अमरनाथ झा
चंपारण: बिहार इन दिनों बाढ़ के चपेट में है। चंपारण में आई बाढ़ से अशोक स्तंभ पर खतरा है। स्थानीय लोगों के उम्मीद के विपरीत आखिरकार शेरवा गांव में पानी घुस गया। महीनों की लिखा-पढ़ी और दौड़ा-दौड़ी बेकार हुआ। पानी उस अशोक स्तंभ के चारों भी फैल गया है जिसके पास भगवान बुध्द ने संन्यास की पहली दीक्षा संत अलार कलार (जिनके नाम पर यह स्थान लौरिया कहलाया) से ली थी। पिछली बाढ में अशोक स्तंभ के आसपास गंभीर कटाव हुआ है और बचाव का कोई इंतजाम अभी तक नहीं हुआ है। तो क्या यह पुरातात्विक स्थल बाढ़ और कटाव की भेंट चढ़ जाएगा। बिहार सरकार के अधिकारियों को इसकी परवाह नहीं है। …  अशोक स्तंभ पर खतरा

कई स्तर पर हुआ प्रयास,लेकिन नहीं बनी बात
शेरवा गांव को बचाने के लिए सरकार के हर स्तर पर बात पहुंचाई गई। पिछली बाढ़ में उस गांव को बाढ़ से बचाने वाला तटबंध कट गया था। उसे मरम्मत की जरूरत थी। इसके लिए ग्रामीणों के अलावा अंचल अधिकारी ने भी संबंधित अधिकारियों के लिखा था। पर बाढ़-नियंत्रण विभाग के अधिकारियों का टालू रवैया नहीं बदला। नतीजा हुआ कि मानसून की पहली बारिश में ही मसान नदी का पानी गांव में घुस गया। यह पानी यहीं तक नहीं रहेगा, कई गांवों को तबाह करेगा। सडकों का कटाव होगा और आवागमन बंद होगा। रामनगर-परसौनी मार्ग पिछले साल ही कट गया था। वह सड़क भी मजबूत तटबंध का काम करता है। पर उसकी मरम्मत नहीं हो सकी है।
नीचे से उपर तक हुई बात,नतीजा ढ़ाक के तीन पात
रामनगर के अंचल अधिकारी ने एक फरवरी को ही 17 स्थलों पर कटाव निरोधक कार्य कराने की जरूरत बताते हुए जिलाधिकारी को लिखा था। इस 17 स्थलों में जोगिया पंचायत के शेरवा का नाम सबसे उपर था। मई में जब मसान नदी का पानी बढ़ने लगा तो ग्रामीण चिंतित हुए और बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के पास इस मामले को पहुंचाते रहे। यह इलाका मोतीहारी अधीक्षण अभियंता के अधीन पड़ता है। उनके पास ज्ञापन भेजा गया, फोन किया गया। फिर मुजफ्फरपुर में बैठने वाले मुख्य अभियंता से संपर्क किया गया। पर सारी भागदौड़ बेकार गई। जून के पहले सप्ताह में अस्थाई बाढ़ बचाव उपाय करने के लिए बांस और बालू की व्यवस्था विभाग ने किया, पर उन बोरियों की व्यवस्था नहीं कर पाया जिनमें बालू भर कर कटावरोधी इंतजाम होता। बोरियों के आने का इंतजार होता रहा, इधर बाढ आ गई और नदी के तटपर बनी रामनगर-परसौनी सड़क में पिछले साल से बने कटाव स्थल से होकर पानी गांव में भर गया। …  अशोक स्तंभ पर खतरा


ग्रामीणों ने खुद ही पहल कर मसान नदी के तटबंध के टूटान स्थल को बांधने का काम आरंभ किया। खुद ही काम की निगरानी भी की। सामाजिक कार्यकर्ता उज्जवल चौबे ने जिलाधिकारी के पास के पास संदेश भेजा। इतना ही नहीं उन्होंने मुख्यमंत्री के पास ईमेल किया। स्थानीय अखबारों ने भी इस विषय पर खूब लिखा। ट्वीटर पर अभियान चला। पर सारे प्रयास बेकार गए। मानसून की पहली बारिश में इस गांव में पानी घुस गया। आसपास के दस-बारह गांव इससे प्रभावित होंगे। उजज्वल चौबे कहते हैं कि आज जो हुआ है वह सिर्फ अधिकारियों के लापरवाही से हुआ है। शेरहवा गांव के कई घरों में पानी घुस गया है एक समय का भोजन भी किस तरह बनेगा यह भी बहुत बड़ा सवाल है। ग्रामीण भी उज्जवल की बात से इत्तफाक रखते हैं। उनका कहना है कि शेरहवा गांव के स्थानीय जनता की बात करें तो उनका कहना है कि हमारे गांव के साथ जो हो रहा है वह सिर्फ अधिकारियों के लापरवाही से हो रहा है। हमने किसे चिट्ठी नहीं लिखी। किस के सामने हाथ नहीं जोड़े। जिला अधिकारी से लेकर चीफ इंजीनियर तक और चीफ इंजीनियर से लेकर मुख्यमंत्री तक। सब तक हमने अपनी बात पहुंचाई कि हमारे गांव के तटबंध को ढंग से व्यवस्थित किया जाए, नहीं तो बरसात का पानी नदी को इतना अधिक बेकाबू कर देगा कि हम सब डूब जाएंगे। यह निवेदन आवेदन हम पिछले महीने से करते आ रहे हैं।
हम इस मामले को लेकर लगातार अधिकारियों से बात कर रहे थें फिर ये लोग कान में तेल डाल कर सोए रहे। आज जो घटना घटी है वो प्राकृतिक प्रकोप बिल्कुल नहीं है यह सरकारी अधिकारी द्वारा लाई गई आपदा है।                                          ...  अशोक स्तंभ पर खतरा

अन्य साथियों के साथ ग्रामीणों की मदद में लगे उज्जवल ने बताया कि उन्हें यहां के लोगों की भयावह स्थिति देखकर मन टूट जाता है। खाने की तकलीफ है। लोग जाएं तो जाएं कहां … प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई नहीं आया। सुबह गांव वालों से बात कर चावल का भुजा बटवाया है। कई घरों से रोटी की व्यवस्था हुई है। लेकिन यह कब तक चलेगा। अब भी कई लोग भूखे इधर-उधर भटक रहे हैं। पता नहीं कब तक भटकेंगे। अगर मैं अदालत में रिट डालूं तो क्या अदालत मेरी बात को सुनेगी?              …  अशोक स्तंभ पर खतरा

उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यसचिव त्रिपुरारी शरण ने 5 मई के पत्र में बाढ सुरक्षात्मक तटबंधों के कमजोर स्थलों और बाढ़ संभावित क्षेत्रों की सडकों की मरम्मत 15 जून के पहले कर लेने का आदेश सभी जिलाधिकारियों और प्रमंडलीय आयुक्तों को दिया था। इस काम में तकनीकी अधिकारियों को तत्काल लगाने और उन्हें हर प्रकार का सहयोग करने के निर्देश दिया गया था। मुख्यसचिव के पत्र में कराए जाने वाले कार्यों का विस्तृत विवरण दिया गया है। जिसमें महामारी के मद्देनजर जरूरी दवाओं की व्यवस्था करना भी शामिल है।
बाढ़ के तैयारी की खुली पोल
यह बाढ़-पूर्व प्रशासनिक तैयारियों की एक बानगी है। बाढ़ चंपारण की सभी छोटी,बड़ी नदियों में आई है। कई इलाके में आवागमन ठप्प है। चंपारण उत्तर-पश्चिम कोने पर है, वहां आई बाढ़ की पानी धीरे-धीरे पूरब-दक्षिण की ओर बढ़ता है और नए नए इलाके बाढ़ग्रस्त होने लगते हैं। तो इस साल 14-15 जून की दरमियानी रात में ही शुरुआत हो गई है।                                                  …  अशोक स्तंभ पर खतरा

 

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