ठंड में दूध उत्पादन होगा प्रभावित.. बचाव के लिए कराएं टीकाकरण

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पंचायत खबर टोली
मऊ : सर्दी आते ही इंसान अपने को ढ़कने के लिए पूरा तैयारी करता है। ठीक उसी तरह पशुओं को भी बराबर से ठंढ़ लगती है। ऐसे में यदि सर्दी के मौसम में यदि पशुओं के रहन-सहन और आहार का ठीक प्रकार से प्रबंध नहीं किया गया, तो ऐसे मौसम का पशु के स्वास्थ्य व दुग्ध उत्पादन की क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

gai_nपशुओं को दें संतुलित आहार,लगवाएं टीका
विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड के मौसम में पशुपालक अपने पशुओं को संतुलित आहार दें। उसमें ऊर्जा, प्रोटीन, खनिज तत्व, पानी, विटामिन व वसा आदि पोषक तत्व मौजूद हों। इन दिनों में पशुओं को विशेष देखभाल की जरूरत होती है, ऐसे में पशुओं के खान-पान व दूध निकालने का समय एक ही रखना चाहिए। ठंड में पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग की ओर से चलाए जाने वाले विशेष टीकाकरण अभियान में टीके लगवाने की प्रतिबद्धता पर भी बल दिया।

gai-2_nक्या कहते हैं विशेषज्ञ
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ पशु वैज्ञानिक डा.वीके सिंह बताते हैं कि सर्दी के मौसम में अंदर व बाहर के तापमान में अच्छा खासा अंतर होता है। पशु के शरीर का सामान्य तापमान विशेष तौर पर गाय का 101.5 डिग्री व भैंस को 98.3 से 103 डिग्री फारेनहाइट होता है। इसके विपरीत पशुघर के बाहर का तापमान शून्य तक चला जाता है।
पशुघर को ढ़कने का करें इंतजाम
पशु के बिछावन की मोटाई व खिड़कियों पर बोरा व टाट का प्रबंध करते हुए शीतलहर के समय विशेष ध्यान रखना होगा। इस मौसम में दुधारू पशुओं को बनौला अधिक मात्रा में खिलाना चाहिए। बनैला दूध के अंदर की चिकनाई की मात्रा बढ़ाता है। इसमें भूसा के साथ हरा चारा की मात्रा भी दो तिहाई होना आवश्यक है। शीतलहर में पशु की खुर के ऊपर सेंधा नमक का ढेला अवश्य रखें। आवश्यकतानुसार पशु उसे चाटता रहता है। सर्दी के मौसम में पशुओं को गुनगुना या ताजा पानी देना चाहिए। धूप निकलने पर पशुओं को बाहर अवश्य बांधे। दिन गर्म होने पर नहलाकर सरसों के तेल की मालिश करना चाहिए। इससे खुश्की आदि से बचाया जा सकता है।

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