जानिए कैसे एक आईटी प्रोफेशनल नौकरी छोड़ने के बाद सालाना 40 लाख कमा रहा है?
हिमालय की तलहटी में स्थित शिल्ली गांव में 5 एकड़ के खेत का उपयोग अब स्वादिष्ट कीवी और सेब की जैविक खेती के लिए किया जा रहा है। तैयार होने के बाद ये फल सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाए जाते हैं। ये फल रसायनों और कृत्रिम पदार्थों से पूरी तरह मुक्त हैं।
‘स्वस्तिक फार्म’ नाम का यह फार्म मनदीप वर्मा के स्वामित्व में है। इस फार्म पर उगाए जाने वाले फल पौधों के विकास नियामकों, कीटनाशकों, कवकनाशी और खरपतवारनाशी जैसे कृत्रिम रसायनों से पूरी तरह मुक्त हैं। इन्हें धोने की भी जरूरत नहीं होती। इन्हे सिर्फ कपड़े से रगड़ना ही काफी होता है।
मनदीप वर्मा की कहानी
मनदीप ने साल 2010 में एमबीए पूरा किया था। इसके बाद उन्होंने बिजनेस मार्केटर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। उनकी नौकरी के लिए उन्हें उच्च-रैंक वाले सरकारी अधिकारियों और क्षेत्र के अन्य पेशेवरों से मिलना पड़ता था। उन्होंने इस तरह के लगभग 8 ग्राहकों को संभाला, जिससे उन्हें एक नए तरह का अनुभव मिला। उन्होंने आईटी क्षेत्र में साढ़े चार साल तक काम किया। हालांकि, उन्हें कभी भी अपनी नौकरी और करियर से संतुष्टि महसूस नहीं हुई। आख़िरकार काफ़ी हिम्मत जुटाकर उन्होंने अपनी आईटी नौकरी छोड़ दी। फिर उन्होंने एक वैकल्पिक करियर अपनाने के बारे में विचार किया। जहां वह शून्य से कुछ बना सकें और उसे अपना कह सकें। उन्होंने अपने पास मौजूद शैक्षणिक कौशल के लिए एक अलग रास्ता चुनने का फैसला किया।
स्वास्तिक फार्म की शुरुआत
38 वर्षीय आईटी पेशेवर मनदीप ने खेती को वैकल्पिक करियर के रूप में अपनाने का फैसला किया। उन्होंने इस मामले पर अपनी पत्नी से चर्चा की और वह उनका साथ देने के लिए तैयार हो गईं। दंपति के पास लगभग 4 एकड़ ज़मीन थी। जिसे उन्होंने अपनी खेती के लिए उपयोग करने का निर्णय लिया। हालाँकि, केवल विपणन विशेषज्ञता और खेती का बिल्कुल भी अनुभव न होने के कारण मंदीप को सब्जियाँ या कोई भी फसल उगाने के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यहां तक कि जिस जमीन का वे उपयोग कर रहे थे वह भी बंजर थी और इसका उपयोग पहले कभी खेती के लिए नहीं किया गया था।
उनके खेत रहन-सहन से अलग-थलग थे। घास, खरपतवार और अन्य जंगली वनस्पतियों से भरी हुई थी। फिर भी उनका मानना था कि हिमालय की मिट्टी पोषक तत्वों से समृद्ध है क्योंकि प्रकृति को हमेशा विघटित जानवर और अन्य कार्बनिक पदार्थ विरासत में मिलते हैं। उन्होंने रसायनों के उपयोग के बिना अपनी खेती करने का फैसला किया। मनदीप ने ज़मीन की सफ़ाई शुरू कर दी और सभी खरपतवार और जंगली वनस्पतियाँ हटा दीं। उन्होंने मिट्टी को समतल भी किया क्योंकि ज़मीन ढलान वाली थी और असमान थी।
इंटरनेट से ली मदद
उन्होंने इंटरनेट की मदद ली व सैकड़ों वीडियो देखे और खेती के बारे में सब कुछ सीखा। उन्होंने जैविक कृषि पद्धतियों के बारे में सीखा और स्थानीय कृषि अधिकारियों से मार्गदर्शन भी मांगा। फार्म को पूरा करने में 5 महीने की लगातार कड़ी मेहनत और परिश्रम लगा। फार्म के आस पास के स्थानों पर बंदर ज्यादा थे जोकि उनके लिए एक दिक्कत की बात थी।
फिर उन्होंने एक कृषि प्रोफेसर की मदद से कीवी उगाने का फैसला किया। फल लगने के पहले कुछ दिनों के दौरान कीवी खट्टा होता है और इसकी बाल जैसी सतह बंदरों को इसके पास आने से रोकने में मदद करती है। यह उच्च बाजार मूल्य वाला फल भी है और इसने मनदीप को सालाना 40 लाख रुपये की कमाई के लक्ष्य तक पहुंचने में मदद की।
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