तेलंगाना के इस शख्स ने अपना खुद का जंगल, उसमें निवास करती हैं कई जीव और वनस्पतियां

0
111

 

आने वाले कुछ दशक में जंगल कहानियों में रह जाएंगे। जंगलों के खतम होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं लेकिन अगर यह कहा जाय कि लगभग 80 प्रतिशत तक इसके लिए मानव ही जिम्मेदार हैं, तो शायद ही कोई होगा जो इस दावे को नकार सके। ऐसे में एक आदमी ने ऐसा प्रयास किया है जो आपको सुनकर आश्चर्य जरुर होगा।

एक छोटे से गाँव के एक व्यक्ति ने अपने दम पर वनस्पतियों और जीवों की विभिन्न प्रजातियों से मिलकर एक पूरा जंगल बसाया है।

सूर्यापेट जिले में एक शख्स ने अकेले ही 70 एकड़ जमीन को जंगल में बदल दिया।  इस जंगल में लगभग 32 विभिन्न प्रकार के पक्षी, जानवर और लगभग 5 करोड़ विभिन्न प्रकार के पेड़ हैं।  जंगल के चारों ओर कोई बाड़ और गेट नहीं है।  जंगल में सात तालाब हैं जिसमे कमल तालाब सबसे लोकप्रिय है।

वन मालिक- दुशार्ला सत्यनारायण

जंगल के मालिक दुर्शला सत्यनारायण अपने जंगल में कम से कम 3 और तालाब जोड़ना चाहते हैं। सत्यनारायण बचपन से ही प्रकृति प्रेमी रहे हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन राघवपुरम गांव में अपने जंगल की देखभाल में बिताया। मालिक का इरादा अपनी जमीन अपने दो बच्चों को देने का नहीं था। उनका मानना है कि जंगल उन जानवरों और पक्षियों का है जो उसमें रहते हैं। जिस ज़मीन पर जंगल बना है वह ज़मीन उनके परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है।

सत्यनारायण ने जो जंगल बनाया है उसका बाजार मूल्य बहुत अधिक है।  हालांकि सत्यनारायण अपनी जमीन बेचने के बारे में सोचते भी नहीं हैं और उनका मानना है कि पैसों से भी पूरा जंगल नहीं खरीदा जा सकता। वह कई दशकों से इस जंगल का पालन-पोषण और संरक्षण कर रहे हैं।

जब सत्यनारायण बालक थे। तब एक व्यक्ति ने अपने मवेशियों को चराने के लिए एक पेड़ की शाखा तोड़ दी।  इस पूरी घटना को सत्यनारायण ने देखा और पेड़ की शाखा टूटने का विरोध करने के लिए उस व्यक्ति पर हमला कर दिया।  उस व्यक्ति ने इसकी शिकायत अपने पिता से की, जिस पर उसके पिता ने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना उनके बेटे का स्वभाव है।

सत्यनारायण ने कृषि के क्षेत्र में स्नातक की पढ़ाई की। बाद में उन्हें एक बैंक में नौकरी मिल गई।  उन्होंने नलगोना जिले में फंसे पानी के मुद्दे पर काम करने के लिए अपनी बैंक की नौकरी छोड़ दी।

सत्यनारायण ने जो जंगल बनाया, उसका अपना इको-सिस्टम है।  पेड़ों को नहीं हटाया जाता, भले ही उनकी शाखाएँ गिर जाएँ।  इसमें रहने वाले पशु-पक्षी जंगल के पुनर्जीवन में मदद करते हैं।

👉जैविक खेती के बढ़ते चलन के बीच एक आईटी प्रोफेशनल ने नौकरी छोड़ अपनाया खेती, कमा रहे हैं 40 लाख सालाना

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here