पंचायत आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट में मामला

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आरक्षण को लेकर हरियाणा में संग्राम मचा है। जाट सड़कों पर हैं, बिहार में पंचायत में आरक्षण की मांग को लेकर लोग सड़कों पर न उतरे हों लेकिन विमर्श में केंद्र में आरक्षण है। राजनीतिक दल नयी जातियों को आरक्षण के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। पटना हाईकोर्ट ने पंचायत आरक्षण को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार से जबाब तलब किया है। मामला एससी, एसटी और अति पिछड़ी जातियों के लिए रोटेशन के आधार पर आरक्षण का है। बक्सर के मुखिया ब्रज किषोर उपाध्याय ने याचिका दायर की है। सरकार को 25 फरवरी को हलफनामा के साथ जबाब देना है।

patna highcourt

सरकार ने दर्जन भर जातियों को अति पिछडी जाति और दो जातियों को अनुसूचित जाति में जोड़ दिया है। इसलिए वर्तमान 20 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाकर 30 प्रतिशत और 16 प्रतिशत से बढ़ाकर 19 प्रतिशत करने की मांग उठ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और विपक्ष के नेता प्रेम कुमार ने यह मांग उठाई है। यह एक राजनीतिक पेंच है। भाजपा का अंाकलन है कि विधानसभा चुनावों में उसे एक करोड़ 30 लाख वोट मिले जिसमें से 50 लाख अतिपिछडों के र्हैं। पार्टी इस जातीय समूह में पंचायत आरक्षण के बहाने अपनी पैठ बढाने के फेर में है।

पंचायत चुनावों में आरक्षण का निर्धारण जनसंख्या के आधार पर होता है। इसकी गणना जटिल है। इसबार आरक्षित सीटों का क्रम बदला जाना है। आरक्षण की प्रक्रिया आरंभ करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने 17 दिसंबर 2015 को निदेष दिया। पर अभी तक महज 16 जिलों की पंचायती-राज संस्थाओं में आरक्षण का निर्धारण किया जा सका है। अनुसूचित जाति, जनजाति और अतिपिछड़ी जातियों को अभी 37 प्रतिषत आरक्षण है। महिलाओं के लिए सभी पदों पर पचास प्रतिशत आरक्षण है।

बिहार पंचायत-राज अधिनियम 2006 के अनुसार, ग्राम पंचायत के सदस्य, ग्राम पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति के सदस्य, जिला परिषद केसाथ ग्राम कचहरी के पंच और सरपंच का चुनाव होना है। इन पदों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अति पिछडा और उक्त श्रेणी की महिलाओं और अनारक्षित श्रेणी की महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था है। आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर होगी और बीते दो पंचायत चुनावों में रहे आरक्षण क्रम को बदलते हुए किया जाना है। आरक्षण का निर्धारण पंचायत समिति प्रमुख और जिला परिषद अध्यक्ष के पदों का भी होना है जिनका चुनाव परोक्ष ढंग से होती है अर्थात पंचायत समिति व जिला परिषद के निर्वाचित सदस्य अपने बीच से अध्यक्ष का चुनाव करते हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग कुछेक जिलों में आरक्षण का काम पूरा कर लिया है और आरक्षण का रोस्टर जारी कर दिया है।

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