
लखनऊ: किसान आंदोलन के सवाल पर एक तरफ किसान सड़क पर जमे हुए हैं वहीं इस आंदोलन ने विपक्षी राजनीतिक दलों को भी सड़क पर उतरने की वजह दे दी है। इसी क्रम में आज उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव किसान आंदोलन के मद्देनजर सड़क पर नजर आए। हालांकि उनका ईरादा कन्नौज जाने का था लेकिन इससे पहले ही उन्हें पुलिसिया विरोध का सामना करना पड़ा। समाजवादी पार्टी ने कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों के समर्थन में किसान यात्रा का आह्वान किया था। इसी क्रम में अखिलेश घर से पार्टी कार्यालय जाने के लिए निकले थे,जहां उन्हें रोक दिया गया।
क्या कहा अखिलेश ने
अखिलेश ने अपने ट्वीट में कहा कि, ‘कदम-कदम बढ़ाए जा, दंभ का सर झुकाए जा। ये जंग है जमीन की, अपनी जान भी लगाए जा।’ अखिलेश ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि विपक्ष अगर कहीं पर भी कुछ करता है तो सरकार कोरोना का बहाना बना लेती है। भाजपा के लिए किसी भी कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए कोरोना वायरस कहीं पर भी नहीं है, लेकिन विपक्ष अगर कहीं पर भी कुछ करता है तो सरकार कोरोना का बहाना बना लेती है। अब तो यह सरकार भरपूर तानाशाही कर रही है। हर जगह पर पुलिस के दम पर हमें रोका जा रहा है। इसके बाद अखिलेश यादव ने गिरफ्तारी दी।

यदि किसान खुश नहीं हैं तो वापस ले लो
समाजवादी मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही थी लेकिन अब कृषि कानून लाकर उन्हें कमजोर कर रही है। अगर किसानों के लिए बने कानून से किसान ही खुश नहीं हैं, तो फिर सरकार इन्हें वापस ले। किसानों की आवाज को सरकार सुन नहीं रही है। सरकार ने किसानों की दोगुनी आय करने का वादा किया था, लेकिन आज किसानों को बर्बाद करने वाला कानून लाया गया है। इससे पहले अखिलेश यादव के आवास के साथ ही विक्रमादित्य मार्ग पर सपा कार्यालय को भी बैरिकेडिंग लगाकर सील कर दिया गया है। विक्रमादित्य मार्ग पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और किसी भी प्रदर्शन से निपटने की पूरी तैयारी की गई। दरअसल, किसान आंदोलन की आग पूरे देश में फैल चुकी है।

अखिलेश यादव कन्नौज में किसान मार्च करने की अनुमती मांगी थी लेकिन प्रशासन ने अनुमति नहीं दी। जिलाधिकारी राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि अभी कोरोना वायरस खत्म नहीं हुआ है लिहाजा भीड़ जुटाने की अनुमति किसी भी स्थिति में नहीं दी जा सकती। सपा मुखिया को पत्र भेजकर इस पर अवगत करा दिया गया है
उल्लेखनीय है कि कृषि कानूनों के खिलाफ पूरे देश के किसानों में उबाल है। 12 दिन से किसानों ने दिल्ली को घेर रखा है। यही नहीं कई प्रदेशों में भी किसान आंदोलन कर रहे हैं। सरकार की तरफ से सकारात्मक रुख न मिलने की वजह से किसानों ने कल 8 दिसंबर को भारत बंद का आह्वान किया है।
