संतोष कुमार सिंह
नयी दिल्ली: किसान भाई लोग खरीफ की फसल बुआई कर चुके हैं। कहीं बुआई हो चुकी है तो बाढ़ वाले ईलाके में पानी उतरने का इंतजार है ताकि रबी की फसल ठीक से लगाई जा सके। किसानों को उनके आगामी फसल में मदद मिल सके इसके लिए केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री, राधा मोहन सिंह ने आज विज्ञान भवन में दो-दिवसीय रबी सम्मे्लन 2016 समारोह का उद्घाटन किया।
इस सम्मेलन में आगामी रबी मौसम के फसल की तैयारी फसल बुआई में किसानों को आने वाली परेशानियों, उनकी जरूरतों पर विस्तार से चर्चा की गयी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने कृषि क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और वित्त मंत्रालय ने बजट 2016-17 में किसानों के कल्याणार्थ कृषि क्षेत्र को 35984 करोड़ रूपये के आवंटन किया है जोकि आज तक का सर्वोच्च आवंटन है । इसके अलावा सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दुगुना करने का लक्ष्य तय किया है। जो राज्यों के सहयोग से ही संभव हो सकेगा। हमारे किसानों की मेहनत से ही हमारा देश खाद्य सुरक्षा का लक्ष्य पूरा कर पाया है। किसान विभिन्न प्रकार की अन्य वस्तुओं का भी उत्पादन कर रहे हैं जो कृषि प्रसंस्करण उद्योगों की सहायता करती है व खेत से बाहर भी नौकरियां प्रदान करती हैं। हमारे ठोस प्रयासों से हम 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान परिकल्पित 25 मिलियन टन खाद्यान्न का अतिरिक्त उत्पादन लक्ष्य प्राप्त कर सकेंगे।
भारत में सभी प्रमुख फसलों की मौजूदा औसत उपज वैश्विक उपज औसत से कम है और राज्यों के बीच भी उत्पादकता में काफी विविधता दृष्टिगोचर होती है। आवश्यकता इस बात की है कि केंद्र एवं राज्य सरकार के वैज्ञानिक एवं अधिकारीगण समर्पित भाव से किसान की आय दो गुना करने के उपायों चर्चा कर ठोस रणनीति तैयार करें।
विगत वर्षो में अल्प वर्षा और इस वर्ष बेहतर मानसून की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा किदो वर्षों में देश के अनेक हिस्सों में कृषि कार्य अल्पवृष्टि से प्रभावित रहा। इसके बावजूद यह हमारे किसानों की कर्मठता है कि चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार वर्ष 2015-16 के दौरान खाद्य अनाजों का कुल उत्पादन न घटकर वर्ष 2014-15 के उत्पादन 252.02 मिलियन टन की तुलना में 252.22 मिलियन टन होने की आशा की जाती है। इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून काफी अच्छा रहा है और कुछ राज्यों को छोड़कर अधिकांश राज्यों में वर्षा सामान्य अथवा सामान्य से अधिक रही है। कृषि मंत्री जी ने कहा कि फिर भी राज्य सरकारों को उन जिलों पर विशेष निगरानी रखने की जरूरत है जहाँ मानसून की वर्षा सामान्य से कम हुई है तथा आवश्यकतानुसार प्रभावी कदम उठाने चाहिए दूसरी ओर कई राज्य जैसे असम, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान बाढ़ की चपेट में आ गये हैं जिसके कारण फसलों का एक बड़ा क्षेत्र प्रभावित हुआ है।
राधामोहन सिंह ने सुझाव दिया कि वैसे क्षेत्रों में जहां अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई है वहां नमी युक्त मृदा का उपयोग रबी दलहनों और तिलहनों की उपज में हो सकेगी जहां कहीं वर्षा अधिक/सामान्य है वहां ऐसे प्रयास किए जा सकते हैं जिसके द्वारा रबी/ ग्रीष्म मौसमों के दौरान यथासंभव वर्षा जल का संचयन किया जा सके। राज्यों को चाहिए कि वे वर्षा सिंचित क्षेत्रों में रबी दलहनों और तिलहनों की अधिक से अधिक कवरेज करने संबंधी कार्य योजना बनाएं।
उन्होंने कहा कि चूंकि रबी का मौसम शुरू होने वाला है, राज्य सरकारों को फसलों की किस्मों के गुणवत्ताप्रद बीजों की पर्याप्त मात्रा की खरीद करने और किसानों के लिए उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा का स्टॉक करने के लिए योजना बनानी चाहिए और यह सुनिश्चित करना होगा कि बुवाई मौसम के दौरान इनपुट की कोई कमी न हो।
कृषि राज्य मंत्री सुदर्शन भगत ने किसानो के कल्याण के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कृषि में सतत विकास हेतु हमारी सरकार लगातार प्रयत्नशील है। “स्वस्थ धरा खेत हरा” के घोष वाक्य के साथ सोएल हेल्थ कार्ड योजना का शुभारम्भ किया गया है। “हर खेत को पानी” जैसे संकल्प को लेकर मोर क्रॉप पर ड्राप पर आधारित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की शुरुआत की गयी है। हमारे हिमालयी तथा उत्तर पूर्व के राज्यों में खाद्यान उत्पादन के लिए अधिक उपयुक्तता न होने के कारण बागबानी की फसलें, फल, सब्जी, मसाले, फूल एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ाने हेतु उचित कदम उठाये जा रहे है। आज हम फलों एवं सब्जियों के उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर आते है। पूर्वोत्तर राज्यों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, सिक्किम राज्य इसका एक सफल उदाहरण है। पूर्वोत्तर भारत को पूर्ण जैविक कृषि संपन्न क्षेत्र बनाने के लिए 100 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही कृषि आधारित उद्योग जैसे पशुपालन, पोलट्री, डेरी, मत्स्य पालन जैसे उद्योगों को बढ़ावा देकर उत्तर पूर्व के राज्यों सहित पूरे देश में खाद्य सुरक्षा, रोजगार की कमी एवं गरीबी का समाधान किया जा सकता है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला ने हमारे देश की लगभग 58% आबादी अपने जीवनयापन के लिए कृषि पर निर्भर करती है। इसलिए सरकार ने निर्णय लिया है कि वह न केवल उत्पादकता सुधारने हेतु ध्यान केंद्रित करेगी अपितु लक्ष्य यह भी है कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुनी कर दी जाए। हाल ही में सरकार ने डेयरी मत्स्य पालन और कृषि क्षेत्रों की बाबत नए कार्यक्रम शुरू किए हैं। इसके अलावा सफल ई-राष्ट्रीय मंडियों की परिचालना से 200 ई-मंडियां तैयार हो जाएंगी। इस अनुक्रम में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना भी एक अच्छा कदम है। इसके तहत किसान 2016-17 से बेहतर सुरक्षा हासिल करने के साथ साथ अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर सकेंगे।
इस कार्यक्रम में पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य पालन विभाग के सचिव देवेंद्र चौधरी, कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव एस०के० पटनायक कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग सचिव त्रिलोचन महापात्रा सहित बड़ी संख्या में देश भर से आये खेती किसानी से जुड़े लोगों ने शिरकत किया।



