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नई दिल्ली: लगातार बढ़ रहे तापमान से गेहूं के कम पैदावार का खतरा मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि गेहूं की बाली में दाने कमजोर होकर सिकुड़ रहे हैं। लेकिन चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी (सीएसए) विश्वविद्यालय के फार्म और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के खेतों में गेहूं की फसल लहलहा रही है। यह गेहूं की ऐसी नई प्रजातियां हैं। जो अधिक गर्मी झेलने में सक्षम हैं। 43 डिग्री तापमान तक में इन प्रजातियों के दाने नहीं सिकुड़ते और पैदावार पर विपरीत असर नहीं पड़ता। ओलावृष्टि का भी असर नहीं होता। प्रति हेक्टेयर उत्पादन भी 35 से 60 क्विंटल पाया गया है।
30 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान
विश्वविद्यालय के निदेशक बीज प्रक्षेत्र डा. विजय कुमार यादव ने बताया कि जलवायु परिवर्तन का असर पिछले दो साल से दिख रहा है। कभी तापमान बढ़ता तो कभी घटता है। टर्मिनल हीट स्ट्रेस यानी पुष्पन के बाद और दाना विकास के दौरान तापमान में वृद्धि (30 डिग्री सेल्सियस से अधिक) हो रही है। जो गेहूं में दाना भरने की प्रक्रिया को बाधित करता है। फसल की पैदावार कम हो जाती है।
गर्मी में नहीं होगी गेहूं की फसल खराब
सीएसए ने कई साल पहले ही इस समस्या को ध्यान में रखकर काम शुरू किया। और हलना (के-7903) और उन्नत हलना (के-9423) प्रजाति विकसित की है। गेहूं की इन दोनों प्रजातियों की विशेषता है कि ये 90 दिन में तैयार हो जाती हैं। इस की बोआई खेतो में की जा सकती है। अचानक तापमान घटने बढ़ने का असर इस पर नहीं पड़ता है। 43 डिग्री के तापमान में भी दाना नहीं सिकुड़ता।
क्या है के—1317 प्रजाति
के-1317 गेहूं की सामान्य प्रजाति है, जो 120 दिन में तैयार होती है। लेकिन केवल दो सिंचाई करनी जरूरी होती है। इसका प्रति हेक्टेयर उत्पादन 50 से 55 क्विंटल है। तापमान बढ़ने का इन दोनों प्रजाति पर कोई असर नही होता। यह प्रजाति ओलावृष्टि भी झेल सकती है। विश्वविद्यालय ने 2022 में के-1616 को विकसित किया है। तापमान सहनशीलता वाली यह प्रजाति प्रति हेक्टेयर 55 से 60 क्विंटल उत्पादन देती है।
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स्प्रिंकलर से करें गेहूं की सिंचाई
फरवरी और मार्च में बढ़ रहा तापमान गेहूं की फसल के लिए हानिकारक हो सकता है। ये समय गेहूं की बालियों में दाने भरने का है। सामान्य से अधिक गर्मी होने से दानों के सिकुड़ने का खतरा बढ़ गया है। और आकार छोटा रहने पर उत्पादन कम होना तय है। मार्च के अंत तक तापमान 40 डिग्री के आसपास रहता है, तो उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसके अलावा गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए गेहूं के खेत में स्प्रिंकलर से सिंचाई करनी चाहिए। इससे पानी के वाष्पीकरण को कम किया जा सकता है। हवा की गति कम रहने पर ही सिंचाई करें। शाम के समय सिंचाई करने पर फसल खराब होने का खतरा कम हो जाता है।


