उत्तरी बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome-AES) का असर गर्मी की धमक के साथ ही दिखने लगा। मिली जानकारी के मुताबिक, इस साल जिले में अब तक 3 बच्चों में एईएस क लक्षण मिले हैं जिनमें SKMCH के पीकू वार्ड में भर्ती 3 वर्षीय एक बच्चा शामिल है। पिछले साल भी कई बच्चों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है, जिसको लेकर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग इस बार अलर्ट मोड पर है।
शिशु रोग विभागाध्यक्ष डा. गोपालशंकर सहनी ने बताया कि बिधीपुर गांव के तीन वर्ष के फरहान को चमकी – बुखार के लक्षण के बाद स्वजन यहां लेकर आए। उसके खून का नमूना जांच के लिए भेजा गया है। हालांकि फिलहाल हालत में सुधार होने के बाद परिजन उसे अस्पताल से छुट्टी कराकर घर ले गए।
डा. सहनी ने बताया कि पिछले साल भी फरहान में एईएस की पुष्टि हुई थी। सकरा के पीएचसी में इलाज हुआ था। स्थिति बिगड़ने के बाद एसकेएमसीएच के पीकू वार्ड में भर्ती कराया गया। वह स्वस्थ होकर गया था। बताया कि यह बीमारी कुछ बच्चों को दोबारा हो सकती है। इसके पीछे मुख्य कारण मेटाबोलिक संबंधी विकार होता है।
वहीं, जिला वेक्टरजनित रोग पदाधिकारी डा. सतीश कुमार ने बताया कि आशा को निर्देश दिया गया है कि पोषक क्षेत्र में लोगों को जागरूक करे। बता दें कि इस साल एईएस का पहला मरीज 16 जनवरी को पूर्वी चंपारण के केसरिया से आया था। जिसको इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
क्या है एईएस बीमारी और उसके लक्षण?
AES मच्छरों द्वारा प्रेषित एन्सेफलाइटिस की एक गंभीर स्थिति है, इसकी मुख्य विशेषता तीव्र बुखार और मस्तिष्क में सूजन आना है। अधिकतर अप्रैल से जून के बीच मुजफ्फरपुर, बिहार और आसपास के लीची उत्पादक ज़िलों में AES के मामले देखने को मिलते हैं। गर्मी के मौसम के दौरान उच्च तापमान और आर्द्रता के कारण AES के फैलने के दर बहुत अधिक होती है। यह बीमारी विशेष रूप से बच्चों और युवा वयस्कों को सबसे अधिक प्रभावित करती है।
सरकार की पहल
JE/AES के कारण बच्चों में होने वाली रुग्णता, मृत्यु दर और विकलांगता को कम करने के लिये भारत सरकार ने संबंधित मंत्रालयों के सहयोग से जापानी इंसेफेलाइटिस (Japanese Encephalitis-JE)/ एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम की रोकथाम और नियंत्रण के लिये राष्ट्रीय कार्यक्रम [National Programme for Prevention and Control of Japanese Encephalitis(JE)/ Acute Encephalitis Syndrome (NPPCJA)] के तहत एक बहु-आयामी रणनीति तैयार की है। जैसे-
o JE टीकाकरण को मज़बूत बनाना और विस्तारित करना
o सार्वजनिक स्वास्थ्य गतिविधियों को मज़बूत बनाना
o JE/AES मामलों का बेहतर नैदानिक प्रबंधन
o भौतिक चिकित्सा और पुनर्वास (Physical medicine and rehabilitation)
o ज़िला परामर्श केंद्र की स्थापना
o निगरानी, पर्यवेक्षण और समन्वय
