आलोक रंजन
प्रथम संस्था द्वारा जारी ‘असर’ रिपोर्ट में प्रत्येक साल ये बात सामने आती है कि ग्रामीण स्कूलों के बच्चों का दाखिला भले ही स्कूलों में बढ़ा हो लेकिन पढ़ाई के मामले में वे फिसड्डी ही हैं। ज्यादतर बच्चे न तो अपनी कक्षा के पाठ्य पुस्तक को न पढ पाते हैं और न ही गणित की गणना कर पाते हैं। लेकिन सरकार शिक्षा का अधिकार कानून लागू कर और स्कूलों में पढ़ाई के अलावां बुनियादी सुविधाएं मसलन स्कूल की ईमारत, शौचालय आदि सुविधाओं को तेजी से बढ़ाकर अपना पीठ थपथपाते नजर आती है। लेकिन जिस पंचायत पर स्कूल मैनेजमेंट कमिटी के गठन के जरिये स्कूल के परिचालन और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जिम्मेवारी हो, यदि वही पंचायत गांव के बच्चों को सरकारी स्कूल में न भेजने का फरमान जारी करे, तो स्थिति की गंभीरता का सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है।
एक ऐसी ही घटना सामने आइ है उत्तरप्रदेश के मिर्जापुर में। मिर्जापुर जिले के रायपुर पुख्ता गाँव में ग्रामीणों ने पंचायत बुलाकर बच्चों को गाँव के सरकारी स्कूल में न भेजने का निर्णय लिया है। उनका कहना है की इस स्कूल में रहते बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। वे कई साल स्कूल में पढ़ने के बाद भी अपना नाम भी नहीं लिख पा रहे, जबकि निजी स्कूलों के एलकेजी के बच्चे न सिर्फ अंग्रेजी के वर्णों की जानकारी रखते हैं, बल्कि गणना में भी ठीक हैं। जबकि प्राथमिक विद्यालय के पांचवी में पढने वाले छात्र नाम लिखना भी नहीं जानते।
ग्रामीण विशेष रूप से ग्राम प्रधान हरिश्चंद्र शुक्ल इसके लिए स्कुल के हेडमास्टर को जिमेवार बता रहे हैं। उनका कहना है की वे अपना ज्यादातर समय स्कुल में नहीं बिताते बल्कि दुसरे कामो में लगे रहते हैं। ऐसे में बच्चे भी उनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाते हुए नदी नाले में खेलते रहते हैं। बच्चों का भविष्य ख़राब हो रहा है। ग्रामीणों की पंचायत में रामजीत मौर्या ने कहा कि टीचरों के नहीं रहने से बच्चे इधर-उधर घूमते और खेलते रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार अगर पढ़ाई का माहौल नहीं दे सकती तो स्कूल के नाम पर राजस्व का नुकसान नहीं करना चाहिए। पढ़ाई के नाम पर बच्चों को कोई नॉलेज नहीं है। ग्रामीण रामलाल ने कहा कि पढ़ाई नहीं होने से पढ़ने की ललक ही उनके अंदर नहीं है।
ग्रामीणों ने पंचायत कर यह फरमान सुनाया है की जब तक हेडमास्टर का तबादला स्कूल से नहीं हो जाता तबतक कोई बच्चा रायपुर ढबही प्राथमिक विद्यालय में नहीं जायेगा।

