नरेन्द्र मोदी सरकार ने बाढ़, सूखा, तूफान और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की मार झेल रहे किसानों को सहायता देने के लिए ऐतिहासिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना शुरू की है। लगातार दो साल से सूखे की स्थिति के बीच केंद्रीय कैबिनेट ने आज एक नयी फसल बीमा योजना को मंजूरी दी जिसके तहत किसानों अनाज एवं तिलहनी फसलों के बीमा संरक्षण के लिए अधिकतम दो प्रतिशत और उद्यानिकी तथा कपास की फसलों के लिए अधिकतम पांच प्रतिशत तक प्रीमियम रखा गया है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस योजना को मंजूरी दी गयी। यह योजना एक अप्रैल से लागू होगी।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि आजादी के बाद एक ऐतिहासिक फैसले में किसानों के लिए न्यूनतम प्रीमियम पर प्रधानमंत्री बीमा योजना को मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इससे उनके लिए सुरक्षा कवच का काम करेगी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में जो दो फसल बीमा योजनाएं शुरू की गई थी, उनका प्रीमियम 15 प्रतिशत था और केवल 23 प्रतिशत किसानों ने ही यह बीमा कराया था। इसके अलावा इन बीमा योजनाओं में कई तरह की विसंगतियाँ भी थी जिसे दूर कर सरकार नयी फसल बीमा योजना शुरू कर रही है जिसमें खरीफ फसल के लिये प्रीमियम मात्र दो प्रतिशत होगा और रबी फसल के लिये प्रीमियम डेढ़ प्रतिशत होगा। किसानों को इस योजना के तहत खरीफ फसलों पर 2 फीसदी और रबी फसलों के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम देना होगा। फल-सब्जी के लिए अधिकतम 5 फीसदी प्रीमियम देना होगा। निजी कंपनियों को भी इस बीमा योजना में शामिल किया जाएगा। सरकार को इस योजना पर 18,000-20,000 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं। अनाज एवं तिलहनी फसलों के बीमा संरक्षण के लिए अधिकतम दो प्रतिशत और उद्यानिकी तथा कपास की फसलों के लिए अधिकतम पांच प्रतिशत तक प्रीमियम रखा गया है।
मंत्रिमंडल द्वारा नयी योजना की मंजूरी के कुछ घंटे बाद मोदी ने ट्वीट किया, किसान
भाईयों एवं बहनों, ऐसे समय में जब आप लोहडी, पोंगल और बीहू जैसे त्यौहार मना रहे हैं, सरकार ने आपको प्रधानमंत्री के फसल बीमा योजना के रुप में उपहार दिया है। मोदी ने कहा, यह एक ऐतिहासिक दिन है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस योजना, जो किसानों के हितों पर विचार करने से प्रेरित है, किसानों के जीवन में महत्वपूर्ण तब्दीली आयेगी अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना में मौजूदा योजना के सफल पहलुओं को शामिल किया गया है और उसमें जो कमी थी उसको दूर करने के प्रभावी उपाय किये गये हैं। उन्होंने कहा, इस योजना में प्रीमियम की दर सबसे कमतर है, इसमें मोबाइल फोन जैसी प्रौद्योगिकी के आसनी से इस्तेमाल की बात है, क्षति का त्वरित आकलन और एक निश्चित समय के भीतर उसके लिए वितरण किये जाने की बात शामिल है। मोदी ने कहा कि इसमें आपदा की परिभाषा का विस्तार किया गया है ताकि फसल के पानी में डूबने और कटाई के बाद की क्षति जैसे पहलुओं को शामिल किया जा सके। उन्होंने कहा कई अन्य पहलुओं की ओर भी ‘विशेष ध्यान’ दिया गया है। उन्होंने कृषक समुदाय से कहा, इसे लेना और इससे लाभ प्राप्त करना आसान है, इसलिए आप इसमें जरुर शामिल हों। देश में कृषक समुदाय मुश्किलों को झेल रहे हैं और उनमें से कइयों ने आत्महत्या की है।
इस योजना के अनुसार बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पाता तो यह जोखिम भी शामिल है उसे दावा राशि मिल सकेगी। ओला,जलभराव और लैण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा माना जाएगा। पुरानी योजनाओं के अंतर्गत यदि किसान के खेत में जल भराव (पानी में डूब) हो जाता तो किसान को मिलने वाली दावा राशि इस पर निर्भर करती कि यूनिट आफ इंश्योरेंस (गांव या गांवों के समूह) में कुल नुक्सानी कितनी है। इस कारण कई बार नदी नाले के किनारे या निचले स्थल में स्थित खेतों में नुकसान के बावजूद किसानों को दावा राशि प्राप्त नहीं होती थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इसे स्थानीय हानि मानकर केवल प्रभावित किसानों का सर्वे कर उन्हें दावा राशि प्रदान की जाएगी। पोस्ट हार्वेस्ट नुकसान भी शामिल किया गया है। फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल ख्रेत में है और उस दौरान कोई आपदा आ जाती है तो किसानों को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी ।
एक आकलन के अनुसार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से फसल बीमा संरक्षण का दायरा कुल 19.44 करोड़ हेक्टेयर फसल क्षेत्र के 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा जो फिलहाल इसके 25-27 प्रतिशत रकबे तक ही है। इससे इस योजना पर व्यय बढ़कर करीब 9,500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. उन्होंने बताया कि इस योजना में प्रीमियम पर कोई सीमा नहीं होगी और बीमित राशि में भी कमी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही संभावित दावे के 25 प्रतिशत के बराबर राशि का भुगतान सीधे किसानों के खाते में किया जाएगा और पूरे राज्य के लिए एक बीमा कंपनी होगी। नयी योजना मौजूदा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और परिवर्तित एनएआईएस की जगह लेगी।

