कमाठीपुरा के बासिंदो के जीवन में रंग भरती संगिनी बैंक

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“क्या आप वास्तव में ऐसा सोचती हैं कि अगर मेरा पति यहां होता तो मैं यहां रह रही होती।“ ये कमाठीपुरा की पपाया के शब्द हैं, जब उससे उसके परिवार के विषय में पूछा जाता है। उसका छोटा सा कमरा, जिसमें वेंटीलेशन की कोई सुविधा नहीं हैं, कमरे में एक ओर घेर कर ​रसोई भी बनी हुई है, और बिस्तर भी सजा हुआ है। इस कमरे में वह अपने पांच साल की बेटी के साथ रहती है, जो कि आईने से खेल रही है। उसके दो और बच्चे हैं। पूछने पर पपाया कहती है, उसके दो और बच्चे हैं। मैं चार माह तक कोलकाता में थी, वहीं लड़की की शादी की। एक बेटा भी है, जो कि मुंबई के सबअरबन ईलाके में रहता है, वहीं स्कूल में पढता है। मैं ज्यादा दिनों तक यहां से दूर भी तो नहीं रह सकती। कैसे मासिक ख्रर्च पूरा होगा। पहले ही खर्च जुटा पाना मुश्किल हो जाता है। केवल पपाया ही क्यों राईमा भी पश्चिम बंगाल की रहने वाली है। वह भले ही कमाठीपुरा में रहती हो लेकिन उसे वहां पश्चिम बंगाल में अपने परिवार की मदद भी करनी है। उसने वहां एक आटो रिक्शा और कुछ जमीन ले रखी है। वह बताती है कि “मैं यहां पांच सालों से रही हूं, और अपने परिवार के लिए कुछ पैसा भी बचा रही हूं।

Sangini_मुंबई के कमाठीपुरा में केवल पपाया और राईना ही नहीं (परिवर्तित नाम)   बल्कि 20,000 सेक्स वर्कर रहती हैं। मुंबई के कमाठीपुरा इलाके की पहचान एशिया के सबसे बड़े वेश्यावृति केन्द्र के रूप में है..इस इलाके की तंग गलियों से गुजरते हुए यहां के हालात का अहसास खुद ब खुद हो जाता है…हर वक़्त… रात हो या दिन यंहा पर लड़कियां दरवाजो, खिड़कियों और बरंडे से बाहर झांकती नज़र आती है.. इंतजार होता है अपने नए ग्राहक के आने का.. इन चेहरो को देखकर इनकी उम्र का अंदाजा लगाना काफी मुश्किल होता है, इन गलियों में रहने वाली लड़कियों के सामने एक अजीब चुनौती हर पल रहती है… छोटी उम्र की लड़कियां अपने आपको बड़ा दिखाने की कोशिश करती है, और बड़ी उम्र की लड़कियां अपनी उम्र को मेकअप के पीछे छिपाती दिखती है। एशिया की सबसे बड़ी रेड लाइट डिस्टिक में सबसे कम उम्र की लड़की 12 से 13 साल तक की मिल जाती है..ज्यादातर लड़कियों को पड़ोसी मुल्क नेपाल से लाया जाता है, मजबूरी और अपने आपको ज़िंदा रखने की जदोजहद में ये लड़कियां मशीन की तरह काम करती है। अपने शरीर को बेचकर कमाए गए पैसे अपनी मैडम को दे देती है, जो इन्हें ग्राहक को लुभाने के गुर सिखाने से लेकर.. इन्हें खिलाने पिलाने की जिम्मेदारी उठाती है।  लेकिन इनमे इनमें से कई हैं जो अपने पड़ोसियों की तरह यह धंधा छोड कर नया रास्ता अपनाने का सपना बुनती हैं। घर जाना चाहती है। पपाया और राईमा इस सफर में कुछ दूर तक आगे आने में सफलता पाई है, और लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाया है। यह सब संभव हो पाया है इस ईलाके में काम करने वाले संगिनी महिला सेवा कॉपरेटिव सोसाईटी लिमिटेड के जरिए जो कि इस ईलाके मे 2007 से काम कर रही है, संस्था ने इस ईलाके में पेशेवर सेक्स वर्करों को बैंक से जोड़ने का बीड़ा उठाया है। 5000 से भी ज्यादा बैंक खाते खोले गये हैं, जिसमें 3000 खाते में नियमित रूप से पैसे जमा कराये जा रहे हैं। संगिनी मे काम कर रहे चार वोलंटियर की टीम कमाठीपुरा की चौदह गलियों में पैदल ही घूमकर लोगों से पैसा जमा लाते हैं। वैसे लोगों की मदद करते हैं,जो उनके कार्यालय नहीं आ सकते। उनकी फ़ोटो बैंक में रखी जाती है और पासबुक उन्हें उनके कमरे पर दे दी जाती है.इस बैंक की ब्याज दरें सरकारी बैंकों के बराबर ही रहती हैं.

kamathi pura_nसंगिनी के दफतर में कार्यरत अंजली देसाई 2014 से यहां है। उन्हें सभी महिलाओं के नाम याद हैं। अंजली कहती हैं वे हमारा खाताधारक मात्र नहीं हैं, हम उन्हें पैसे के प्रबंधन का गुर भी सिखाते हैं। पहले ग्राहक या वेश्यावृति कराने वाले उनके पैसे चुरा लेते थे, संगिनी ने उन्हें इस परेशानी से निजात दिलाई हैं। संगिनी की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दिन में एक लाख रूपये तक जमा कराये जाते हैं।

संगिनी की शुरूआत पोपुलेशन सर्विस इंटरनेशनल नामक संगठन जो कि वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य विशेष रूप से परिवार नियोजन एवं एचआईवी एवं एड्स जैसे मुद्दों पर काम करती है। संगिनी के ​​लिए समर्पित वोलंटियर यह बात बखूबी समझते हैं कि यदि संस्था को अपने दीर्घकालिक विकास कार्यक्रम को पूरा करना है तो इसे वित्तिय सहायता की जरूरत होगी। अभी पीएसआई द्वारा दी जा रही मदद से संस्था के कर्मचारियों को वेतन देता है।

इनपुट साभार: द हिन्दू

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